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भारत की नई ताकत की गवाह बनेगी पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा, चीन के खिलाफ ह्वाइट हाउस मांगे दिल्ली का साथ

Written By: Dharmendra Kumar Mishra @dharmendramedia Published : May 25, 2023 01:01 pm IST, Updated : May 25, 2023 01:01 pm IST

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 जून को अमेरिका के राजकीय यात्रा पर जाएंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और ह्वाइट हाउस को पीएम मोदी की मेहमानवाजी का बेसब्री से इंतजार है। इसी बहाने भारत और अमेरिका संबंधों की नई इबारत लिखेंगे।

नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री, भारत- India TV Hindi
Image Source : FILE नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री, भारत

राष्ट्रपति जो बाइडेन के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 जून को अमेरिका की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे। पीएम मोदी को अमेरिका ने ऐसे वक्त में राजकीय निमंत्रण भेजा है जब पूरी दुनिया में भारत ने अपनी अलग छवि बनाई है। रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर, वैश्विक खाद्य, ऊर्जा संकट, ग्लोबल वार्मिंग, वैश्विक आतंकवाद, देशों की संप्रभुता पर हो रहे हमले इत्यादि के मुद्दे पर भारत के रुख ने पूरी दुनिया में उसे वर्ल्ड लीडर की पहचान दिला दी है। ऐसे में जो बाइडन द्वारा पीएम मोदी को ह्वाइट में आमंत्रित किया जाना कोई सामान्य घटना नहीं है, बल्कि यह उभरते भारत की ताकत को दुनिया को एहसास कराने वाले पल हैं। वहीं पाक और चीन जैसे दुश्मनों के लिए चिंता का विषय भी।

अमेरिका जानता है कि इस वक्त भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने के साथ-साथ सबसे बड़ा बाजार और सबसे भरोसेमंद देश है, जिस पर दुनिया के अधिकांश देश भरोसा कर रहे हैं। भारत के पास पीएम मोदी जैसा करिश्माई नेतृत्व है। इस नेतृत्व ने पूरी दुनिया में हिंदुस्तान की नई ताकत का डंका बजा दिया है। आज हर कोई देश भारत से दोस्ती को आतुर है। फिर चाहे वह अमेरिका हो, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन या आस्ट्रेलिया और जापान हो। सभी देश भारत के साथ गहरे संबंध रखना चाहते हैं। भारत और रूस में पारंपरिक दोस्ती है, लेकिन रूस भी अब उभरते भारत की स्पष्टवादिता और धमक वैश्विक मंचों पर कई बार देख चुका है। ऐसे में उसके लिए भारत की दोस्ती बदलते वैश्विक परिवेश में और भी अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

चीन के लिए चिंता तो अमेरिका के लिए अमृत है भारत की दोस्ती

भारत और अमेरिका की दोस्ती जहां चीन और पाकिस्तान जैसे दुश्मनों के लिए चिंता का सबब है तो वहीं ह्वाइट हाउस के लिए दिल्ली से नजदीकी किसी अमृत से कम नहीं है। चीन को दक्षिण-चीन सागर से लेकर ताइवान व हिंद-प्रशांत महासागर में घेरने के लिए अमेरिका को भारत का साथ चाहिए। क्योंकि एशिया में भारत इकलौता ऐसा ताकतवर देश है, जिससे अमेरिका दोस्ती करके बहुत कुछ हासिल कर सकता है। चीन लगातार अमेरिका के लिए खतरा बनता जा रहा है। अमेरिका को चीन की बढ़ती बादशाहत से अपनी सुप्रीमेसी के हिलने का डर सता रहा है। इसलिए उसे हर हाल में भारत का साथ चाहिए। इसीलिए अमेरिका अब भारत के साथ रक्षा से लेकर व्यापारिक और वाणिज्यिक समेत अन्य क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भागीदारी कर रहा है। धीरे-धीरे अमेरिका चीन से अपनी कंपनियों को समेटने में लगा है और वह उन्हें भारत में स्थापित करने का विकल्प खोज रहा है।

पूरी दुनिया को मोदी की यूएएस यात्रा से ताकत का संदेश

पूरी दुनिया को भारत अपने प्रधानमंत्री की अमेरिका यात्रा से नए हिंदुस्तान की ताकत का संदेश देने जा रहा है। इसलिए पीएम मोदी की इस अमेरिका यात्रा पर पूरी दुनिया की नजर है। इस दौरान रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर चीन की दादागीरी समेत, डूबती वैश्विक अर्थव्यवस्था, वैश्विक खाद्य, ऊर्जा संकट, ग्लोबल वार्मिंग जैसे मुद्दों पर अमेरिका न सिर्फ भारत का विचार जानना चाहेगा, बल्कि उसे अगुवा के रूप में देखना चाहेगा। अमेरिका-भारत संबंधों पर गहन समझ रखने वाले विद्वानों का भी कहना है कि मोदी की यह यात्रा इस बात का संदेश है कि दोनों देश भू-राजनीतिक, आर्थिक और प्रौद्योगिकी के जरिये एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। प्रधानमंत्री मोदी जून में राष्ट्रपति जो बाइडन और प्रथम महिला जिल बाइडन के निमंत्रण पर अमेरिका की अपनी पहली राजकीय यात्रा पर जाएंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति और जिल बाइडन 22 जून को राजकीय रात्रिभोज में मोदी की मेजबानी भी करेंगे। अघी ने कहा, ‘‘यह बाकी दुनिया के लिए एक संदेश है कि भारत की विकास कहानी वास्तविक है। भारत एक उभरती ताकत है।

भारत अब दुनिया की बड़ी ताकत बनने की ओर

भारत पीएम मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भरता के फाइटर जेट पर सवार है। ऐसे में हिंदुस्तान निश्चित ही एक दिन बड़ी ताकत बनेगा। इसका एहसास अभी से दुनिया को होने लगा है। जब दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही थी और भारत के बर्बाद होने की आशंका से ग्रस्त थी, ऐसे में में दूसरे देशों से मदद की आस नहीं लगाकर इस बड़े संकट से उबरना, फिर दूसरे देशों को वैक्सीन से लेकर अन्य मदद पहुंचाना...और फिर इसी दौरान दुनिया की 5वीं बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाना नए भारत की ताकत का प्रमाण है। भारत के करिश्माई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की क्षमता का भी परिचायक है। भारत मूल रूप से लोकतांत्रिक राष्ट्रों के साथ अधिक जुड़ रहा है, जो कानून के शासन पर केंद्रित हैं। वहीं दूसरी ओर रूस, चीन, ईरान और उत्तर कोरिया का अपना स्वयं का ब्लॉक है। यह एक संदेश है कि भारत का समय आ गया है। भारत अहम भूमिका निभाएगा। इसीलिए दुनिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वर्ल्ड लीडर के तौर पर देख रही है।

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