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Holika Dahan 2026: होलिका की परिक्रमा क्यों की जाती है? यहां जानिए क्या है इसका धार्मिक महत्व और नियम

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : Mar 02, 2026 04:20 pm IST,  Updated : Mar 02, 2026 04:31 pm IST

Holika Dahan 2026: होलिका दहन की अग्नि को बहुत ही पावन माना गया है। होलिका की पूजा के बाद अग्नि के चारों ओर परिक्रमा भी लगाई जाती है। तो यहां जानिए कि होलिका की कितनी बार परिक्रमा लगाएं और इसका नियम क्या है।

होलिका दहन 2026- India TV Hindi
होलिका दहन 2026 Image Source : PEXELS

Holika Dahan 2026: हर साल फाल्गुन पूर्णिमा तिथि के दिन होलिका दहन किया जाता है। इसे छोटी होली के नाम से भी जाना जाता है। होलिका दहन के बाद ही रंगवाली होली खेली जाती है। होलिका दहन को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। हिंदू धर्म में होलिका की अग्नि को अत्यंत ही पवित्र माना जाता है। होलिका दहन की पूजा विधिपूर्वक की जाती है। होलिका की आग में  जौ या गेहूं की बाली, चना, मूंग, चावल, नारियल, गन्ना, बताशे आदि चीजें अर्पित की जाती है। होलिका दहन की पूजा के बाद होली की अग्नि की परिक्रमा भी करने का विधान है। तो आइए जानते हैं होलिका दहन के बाद अग्नि की कितनी परिक्रमा लगानी चाहिए और इसका सही नियम क्या है।

होलिका की कितनी परिक्रमा लगानी चाहिए?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलिका दहन की अग्नि की तीन या सात बार परिक्रमा लगानी चाहिए। परिक्रमा के दौरान 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय'मंत्र का जाप करना चाहिए। इसके साथ ही परिक्रमा के समय मन ही मन भगवान से प्रार्थना करना चाहिए। शास्त्रों के मुताबिक, अग्नि की तीन या सात बार परिक्रमा करना सबसे शुभ माना जाता है। तीन की संख्या को त्रिदेवों ब्रह्मा, विष्णु और महेश के सम्मान में उत्तम माना जाता है, जबकि सात परिक्रमाएं हमारे जीवन के सात चक्रों की शुद्धि का संकेत देती हैं।

परिक्रमा का सही नियम

  • होलिका की परिक्रमा करने से पहले हाथ में थोड़ा जल, फूल और अक्षत लें। इसके बाद ईश्वर का ध्यान करें।
  • अग्नि की परिक्रमा हमेशा घड़ी की दिशा में ही करनी चाहिए। ऐसा करना शुभ माना गया है।
  • परिक्रमा पूरी होने के बाद हाथ जोड़कर प्रणाम करें और घर-परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।
  • विधि-विधान से की गई परिक्रमा पितरों का आशीर्वाद दिलाती है।

होलिका की अग्नि की परिक्रमा क्यों की जाती है?

माना जाता है कि अग्नि के चारों ओर घूमने से हमारे अंदर की समस्त नकारात्मक ऊर्जा जलकर राख हो जाती है और नई ऊर्जा का संचार होता है।  इससे हमारे घर के वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और हमेशा सुख-शांति बनी रहती है। साथ ही होलिका दहन कीपवित्र आग के सामने सच्चे मन से की गई हर प्रार्थना शीघ्र पूर्ण होती है और जीवन में खुशहाली और समृद्धि का आगमन होता है।

होलिका दहन मुहूर्त 2026

पंचांग के अनुसार, फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि का आरंभ 2 मार्च को शाम 5 बजकर 55 मिनट पर होगा। पूर्णिमा तिथि का समापन 3 मार्च 2026 को शाम 5 बजकर 7 मिनट पर होगा। होलिका दहन का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 44 मिनट से रात 9 बजकर 11 मिनट तक रहेगा। होलिका दहन के दिन भद्रा पूंछ दोपहर 1 बजकर 25 मिनट से दोपहर 2 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। भद्र मुख दोपहर 2 बजकर 35 मिनट से शाम 4 बजकर 30 मिनट तक रहेगा।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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