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बैकफायर कर गई है ट्रंप की 'टैरिफ' पॉलिसी, अमेरिका में बेरोजगारी बढ़ी; महंगाई में भी इजाफा

 Published : Sep 06, 2025 12:00 pm IST,  Updated : Sep 06, 2025 12:00 pm IST

अमेरिका में राष्ट्रपति ट्रंप की टैरिफ नीतियों के चलते बेरोजगारी 4.3 फीसदी तक पहुंच गई है और महंगाई बढ़ रही है। अगस्त में सिर्फ 22,000 नई नौकरियां बनीं। फैक्ट्रियों, निर्माण और तेल क्षेत्रों में हजारों नौकरियां घटी हैं। एक्सपर्ट्स ट्रंप की रणनीति को अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदायक बता रहे हैं।

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। Image Source : AP

वॉशिंगटन: अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा सत्ता में आने के बाद 7 महीनों में नौकरी बाजार की हालत कमजोर हो गई है। नई नौकरियों का पैदा होना लगभग रुक सा गया है और महंगाई फिर से सिर उठाने लगी है। शुक्रवार को जारी अगस्त महीने की जॉब्स रिपोर्ट ने दिखाया कि केवल 22,000 नई नौकरियां पैदा हुईं, जो उम्मीद से बहुत कम है। इसके साथ ही बेरोजगारी दर 4.3% तक पहुंच गई, जो पिछले 4 साल में सबसे ज्यादा है। बता दें कि ट्रंप द्वारा भारत समेत तमाम देशों पर टैरिफ लगाने की रणनीति अपनाने के बाद ये खबरें सामने आई हैं।

वादों पर खरे नहीं उतर पा रहे ट्रंप

रिपोर्ट के मुताबिक, जून में अमेरिका में 13000 नौकरियां गायब हुईं, जो दिसंबर 2020 के बाद पहली मासिक गिरावट है। फैक्ट्रियों और निर्माण क्षेत्र में नौकरियों में कमी देखी गई है। अप्रैल में ट्रंप ने कहा था कि उनकी टैरिफ पॉलिसी नौकरियों और फैक्ट्रियों को वापस लाएगी, लेकिन इसके बाद से मैन्युफैक्चरिंग में 42000 और कंस्ट्रक्शन में 8000 नौकरियां कम हो चुकी हैं। ट्रंप ने 2024 में वादा किया था कि उनकी नीतियां अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगी। लेकिन हकीकत में अर्थव्यवस्था सुस्त पड़ रही है। ट्रंप ने तेल को 'लिक्विड गोल्ड बताते हुए दावा किया था कि इससे देश अमीर होगा, लेकिन तेल और गैस क्षेत्र में भी 12000 नौकरियां कम हो चुकी हैं।

महंगाई ने बढ़ाई सरकार की चिंता

ट्रंप ने अपने पहले दिन से महंगाई खत्म करने और बिजली की कीमतें आधी करने का वादा किया था। लेकिन अप्रैल में 2.3 फीसदी की वार्षिक महंगाई दर जुलाई में बढ़कर 2.7 फीसदी हो गई। बिजली की कीमतें भी इस साल 4.6 फीसदी बढ़ चुकी हैं। ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी ने कई कंपनियों, जैसे वॉलमार्ट और प्रॉक्टर एंड गैंबल, को कीमतें बढ़ाने के लिए मजबूर किया है। खराब आर्थिक आंकड़ों के लिए ट्रंप ने फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना है कि अगर ब्याज दरें कम की जातीं, तो नौकरियां बढ़तीं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी जल्दी ब्याज दरें कम करने से महंगाई और बढ़ सकती है। 

आप्रवासन नीतियों ने श्रमिकों की कमी को बढ़ाया

ट्रंप ने 2024 में कहा था कि अवैध आप्रवासियों को निकालने से 'ब्लैक जॉब्स' सुरक्षित होंगे, लेकिन ब्लैक समुदाय की बेरोजगारी दर 7.5 फीसदी तक पहुंच गई, जो अक्टूबर 2021 के बाद सबसे ज्यादा है। उनकी आप्रवासन नीतियों ने श्रमिकों की कमी को और बढ़ा दिया है, जिससे नौकरी बाजार पर बुरा असर पड़ा है। ट्रंप ने पिछले महीने खराब जॉब्स रिपोर्ट के बाद ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स (BLS) की कमिश्नर एरिका मैकएंटारफर को बर्खास्त कर दिया था। उन्होंने बिना सबूत के दावा किया था कि आंकड़े उनके खिलाफ 'हेरफेर' किए गए।

'ट्रंप की नीतियां जॉब मार्केट को बर्बाद कर रही हैं'

व्हाइट हाउस के आर्थिक सलाहकार केविन हैसेट ने कहा कि अगस्त का डेटा एक अपवाद है और अर्थव्यवस्था जल्द ही रफ्तार पकड़ेगी। उन्होंने दावा किया कि अटलांटा फेडरल रिजर्व 3% की तिमाही वृद्धि की उम्मीद कर रहा है। लेकिन बाइडन प्रशासन के पूर्व अधिकारी डैनियल हॉर्नुंग ने कहा कि अगस्त के आंकड़ों में कोई रिकवरी का संकेत नहीं दिखता। प्रोग्रेसिव सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन ने कहा, 'ट्रंप की नीतियां जॉब मार्केट को बर्बाद कर रही हैं।' डेमोक्रेट सीनेटर चक शूमर ने कहा, 'ट्रंप की टैरिफ और बेतरतीब नीतियां अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रही हैं। यह एक चेतावनी है कि ट्रंप हमारी अर्थव्यवस्था को तबाह कर रहे हैं।'

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