डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैक्स और अमेरिका-भारत व्यापारिक संबंधों में तनाव ने भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को प्रभावित किया है। भारत और अमेरिका के व्यापारिक संबंधों में इस वृद्धि और गिरावट का एक बड़ा असर दोनों देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और भारत-अमेरिका रिश्तों को मजबूत करने का भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप पीएम मोदी को अपना "बहुत अच्छा दोस्त" मानते हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार और तकनीकी मुद्दों पर चर्चा हुई।
वाणिज्य मंत्रालय ने कहा, "दोनों पक्षों ने समझौते की संभावित रूपरेखा पर विचारों का आदान-प्रदान किया और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौते को शीघ्र पूरा करने के लिए बातचीत जारी रखने का फैसला लिया गया।"
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि ट्रंप ने रूस पर दबाव बनाने के लिए भारत पर रूसी तेल खरीद पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया, भले ही भारत अमेरिका का करीबी साझेदार है। रुबियो ने भारत के साथ संबंधों की मजबूती और बातचीत जारी रखने पर जोर दिया।
भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों को लेकर शशि थरूर ने कहा कि भले ही अल्पकालिक झटका लगा हो, लेकिन दोनों देशों के दीर्घकालिक हित अंततः उन्हें एक समान स्तर पर लाएंगे।
भारत और अमेरिका के विदेश मंत्रियों एस. जयशंकर और मार्को रुबियो के बीच न्यूयॉर्क में मुलाकात हुई, जहां दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करने पर चर्चा की गई। दोनों देशों के बीच विशेष रूप से क्वाड, व्यापार, रक्षा, और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार ने हाल में हुए डेवलपमेंट को देखते हुए यह उम्मीद जाहिर की है। द्विपक्षीय टैरिफ विवाद की वजह से कई भारतीय उत्पादों पर कुल मिलाकर 50% तक शुल्क लग रहा है।
भारत के लिए नामित अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भारत को अपने पाले में करने को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता करार दिया है। उन्होंने भारत के साथ अमेरिका के संबंधों को सुधारने और उसे चीन से दूर करने को अपना मुख्य मकसद बताया है।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत पहले ही मॉरीशस, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ऑस्ट्रेलिया के साथ व्यापार समझौते कर चुका है।
भारत ने यह साबित कर दिया है कि यह 21वीं सदी का हिंदुस्तान है, जो अमेरिका जैसे देशों के आगे भी घुटने नहीं टेकता, बल्कि पूरी दुनिया को अपने कदमों में झुकाने का दम रखता है।
नई दिल्ली में चीनी राजदूत जू फेइहोंग ने कहा कि भारत और चीन को अमेरिका द्वारा लगाए गए अनुचित टैरिफ का मिलकर मुकाबला करना चाहिए। उन्होंने आर्थिक सहयोग, आतंकवाद के विरोध और सीमा विवाद पर सकारात्मक संवाद को अहम बताया।
भारत को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बदले सुर पर शशि थरूर ने कहा कि मैं इस नए माहौल का स्वागत सावधानी के साथ करूंगा। कोई भी इतनी जल्दी भूलकर माफ नहीं कर सकता है।
अमेरिका से टैरिफ विवाद के दौरान भारत और इजरायल में मुक्त व्यापार समझौता होने की उम्मीदें बढ़ गई हैं। इजरायल के वित्त मंत्री 8 सितंबर से इसके लिए भारत की यात्रा पर आ रहे हैं।
भारत और अमेरिका के बीच छिड़े टैरिफ विवाद के दौरान एक दिन पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सुर बदले हुए दिखे। ट्रंप ने कहा-लगता है कि उन्होंने भारत को रूस और चीन के हाथों खो दिया। ट्रंप ने मोदी को महान प्रधानमंत्री बताया। इस घटनाक्रम को एक्सपर्ट किस नजरिये से देखते हैं। आइये समझते हैं।
अमेरिका में राष्ट्रपति ट्रंप की टैरिफ नीतियों के चलते बेरोजगारी 4.3 फीसदी तक पहुंच गई है और महंगाई बढ़ रही है। अगस्त में सिर्फ 22,000 नई नौकरियां बनीं। फैक्ट्रियों, निर्माण और तेल क्षेत्रों में हजारों नौकरियां घटी हैं। एक्सपर्ट्स ट्रंप की रणनीति को अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदायक बता रहे हैं।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हमेशा दोस्त रहेंगे और भारत-अमेरिका के रिश्ते 'खास' हैं। हालांकि, भारत के रूस से तेल खरीदने पर उन्होंने नाराजगी जताई।
भारत पर राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ का मामला अब अमेरिका की शीर्ष अदालत तक पहुंच गया है। ट्रंप को यह सफाई पेश करने के लिए मजबूर होना पड़ा है कि उन्होंने भारत जैसे देश पर इतना अधिक टैरिफ क्यों लगाया?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर लगाए गए 50 फीसद टैरिफ को सही ठहराया है। उन्होंने कहा कि भारत हमसे सबसे ज्यादा टैरिफ वसूलता है।
जेफरीज की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ की वजह डोनाल्ड ट्रंप की नाराजगी है, जो कश्मीर पर मध्यस्थता के भारत द्वारा इनकार से उपजी। भारत ने स्पष्ट किया कि वह राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा। इससे भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव बढ़ गया है।
डेमोक्रेट्स का कहना है कि चीन जैसे बड़े खिलाड़ी को छूट देना और भारत को अलग से निशाना बनाना,न केवल कूटनीतिक असंतुलन पैदा करता है, बल्कि इससे भारत-अमेरिका के बढ़ते रणनीतिक संबंधों को भी खतरा हो सकता है।
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