बादिन : एक चर्चित कहावत कही जाती है गधे को कितना भी नहलाओं वह घोड़ा नहीं बन सकता,लेकिन पाकिस्तान में इन दिनों गधों का बाजार सजा हुआ है। लेकिन पाकिस्तान के बादिन जिले के एक छोटे शहर तंदू गुलाम में जब आप गधों के मेले का नजारा और उनकी कीमत सुनतें हैं तो आपको अहसास होता है कि यहां तो गधे घोड़ों से भी ज्यादा कीमत के हो गए हैं।
(फोटो साभार: डॉन पत्रिका)
तीन दिन के लिए लगता है गधों का मेला
पाकिस्तान के बादिन जिलें में हर साल 10वें मुहर्रम पर क्रेता और विक्रेता अपन जानवरों के साथ इस मेले में शामिल होते हैं। गधों का यह मेला तीन दिन तक चलता है और यहां हर साल अलग अलग प्रजाति के लगभग 3000 गधों को बेचने के लिए लाया जाता है।
25 से 5 लाख रुपए में बिक रहे हैं गधे
मेले में सबसे खास बात गधों की बढ़ती कीमतें हैं,यहां इस साल 25,000 हजार से 5 लाख तक में गधे बिक रहे हैं। इस साल बाजार में तूफान नाम का गधा सबसे अधिक चर्चा का केंद्र बना हुआ है,उसकी कीमत लाखों में लगी।
सरकार भी करती है कमाई,लगता है टैक्स
पिछले कुछ दशकों से बादिन जिले में गधो का बाजार छोटे पैमाने में लगाया जाता था। लेकिन 2004 में इसे सरकारी मंजूरी मिल गई। उस समय की सरकार ने बादिन के लोगों को जमीन दी ताकि वह अपने बाजार को बढ़ा सके। इसके लिए उनसे कर भी लिया जाता है। इस मेले में क्रेता और विक्रेता दोनों से ही उनके जानवरों का कर लिया जाता है। गधों के बाजार को एक त्योहार के तरह मनाया जाता है इस त्योहार में गधों की रेस करवाई जाती है तथा अगल-बगल में दुकाने भी लगाई जाती है।
तीन दिन के लिए लगता है गधों का मेला
पाकिस्तान के बादिन जिलें में हर साल 10वें मुहर्रम पर क्रेता और विक्रेता अपन जानवरों के साथ इस मेले में शामिल होते हैं। गधों का यह मेला तीन दिन तक चलता है और यहां हर साल अलग अलग प्रजाति के लगभग 3000 गधों को बेचने के लिए लाया जाता है।
25 से 5 लाख रुपए में बिक रहे हैं गधे
मेले में सबसे खास बात गधों की बढ़ती कीमतें हैं,यहां इस साल 25 हजार से 5 लाख तक में गधे बिक रहे हैं। इस साल बाजार में तूफान नाम का गधा सबसे अधिक चर्चा का केंद्र बना हुआ है,उसकी कीमत लाखों में लगी।
सरकार भी करती है कमाई,लगता है टैक्स
पिछले कुछ दशकों से बादिन जिले में गधो का बाजार छोटे पैमाने में लगाया जाता था। लेकिन 2004 में इसे सरकारी मंजूरी मिल गई। उस समय की सरकार ने बादिन के लोगों को जमीन दी ताकि वह अपने बाजार को बढ़ा सके। इसके लिए उनसे कर भी लिया जाता है। इस मेले में क्रेता और विक्रेता दोनों से ही उनके जानवरों का कर लिया जाता है। गधों के बाजार को एक त्योहार के तरह मनाया जाता है इस त्योहार में गधों की रेस करवाई जाती है तथा अगल-बगल में दुकाने भी लगाई जाती है।
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