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'महिला को वर्जिनिटी टेस्ट के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता', जानें छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने ऐसा क्यों कहा

 Written By: Rituraj Tripathi @riturajfbd
 Published : Mar 30, 2025 11:58 pm IST,  Updated : Mar 31, 2025 12:03 am IST

हाई कोर्ट ने कहा, 'किसी महिला को वर्जिनिटी टेस्ट के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। ये संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है।'

High Court- India TV Hindi
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट Image Source : FILE

बिलासपुर: महिलाओं की वर्जिनिटी को लेकर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की टिप्पणी सामने आई है। हाई कोर्ट ने कहा, 'किसी महिला को वर्जिनिटी टेस्ट के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। ये संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है। ये अनुच्छेद महिला को सम्मान के अधिकार सहित जीवन और स्वतंत्रता की सुरक्षा के मौलिक अधिकार की गारंटी देता है।'

हाई कोर्ट ने और क्या कहा?

हाई कोर्ट ने कहा कि वर्जिनिटी टेस्ट की अनुमति देना मौलिक अधिकारों, प्राकृतिक न्याय के प्रमुख सिद्धांतों और महिला की लाज के विरुद्ध होगा। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि अनुच्छेद 21 "मौलिक अधिकारों का हृदय" है।

हाई कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की यह टिप्पणी एक व्यक्ति द्वारा दायर आपराधिक याचिका के जवाब में आई, जिसने अपनी पत्नी के वर्जिनिटी टेस्ट की मांग करते हुए आरोप लगाया था कि वह किसी अन्य व्यक्ति के साथ अवैध संबंध में है। उसने 15 अक्टूबर, 2024 के एक पारिवारिक अदालत के आदेश को चुनौती दी, जिसने अंतरिम आवेदन को खारिज कर दिया था।

वहीं इस मामले में पत्नी ने आरोप लगाया था कि उसका पति नपुंसक है और सहवास से इनकार कर रहा है। उच्च न्यायालय ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता यह साबित करना चाहता है कि नपुंसकता के आरोप निराधार हैं, तो वह संबंधित मेडिकल परीक्षण करा सकता है या कोई अन्य सबूत पेश कर सकता है। लेकिन 'उसे अपनी पत्नी का कौमार्य परीक्षण कराने तथा अपने साक्ष्य में कमी को पूरा करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।'

9 जनवरी को पारित आदेश हाल ही में उपलब्ध कराया गया। हाई कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा अपनी पत्नी की वर्जिनिटी टेस्ट की मांग करना असंवैधानिक है, क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन करता है, जिसमें महिलाओं के सम्मान का अधिकार शामिल है। भारत के संविधान का अनुच्छेद 21 न केवल जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार की गारंटी देता है, बल्कि सम्मान के साथ जीने का अधिकार भी देता है, जो महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण है। (इनपुट: PTI)

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