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दिल्ली में अब अपराध की श्रेणी से हटाई गई 2 चीजें, पहले होती थी सजा और लगता था जुर्माना

 Published : Apr 03, 2026 07:00 pm IST,  Updated : Apr 03, 2026 07:10 pm IST

जन विश्वास बिल 2026 के तहत दिल्ली में दिल्ली पुलिस एक्ट 1978 की दो धाराएं अपराध श्रेणी से हटा दी गई हैं। अब बच्चों की शरारत और किसी बिल्डिंग या गाड़ी में संदिग्ध मौजूदगी पर सजा नहीं होगी। इस बिल का उद्देश्य छोटे अपराध खत्म कर नागरिकों और कारोबारियों को राहत देना है।

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दिल्ली पुलिस अब इन 2 धाराओं में केस दर्ज नहीं कर सकेगी। Image Source : PTI FILE

नई दिल्ली: आम लोगों और कारोबारियों को राहत देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए संसद ने जन विश्वास विधेयक 2026 को मंजूरी दे दी है। इस बिल के पास होने के बाद दिल्ली पुलिस अधिनियम 1978 की 2 धाराओं को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया है। पहले इन दोनों धाराओं में पकड़े जाने पर आरोपी को सजा होती थी और जुर्माना भी लगता था। बता दें कि इस बिल के तहत करीब एक हजार छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाने या आसान करने की बात कही गई है।

दिल्ली में किन धाराओं को किया गया खत्म?

नए संशोधन के तहत धारा 95 को हटा दिया गया है, जिसमें 7 साल से कम उम्र के बच्चे द्वारा सार्वजनिक स्थान पर शरारत करने पर अभिभावक पर 100 रुपये तक जुर्माने का प्रावधान था। यानी कि किसी सार्वजनिक स्थान पर 7 साल से छोटा बच्चा कोई शरारत करता और इसकी शिकायत होती तो दिल्ली पुलिस जुर्माना वसूल सकती थी। इसके अलावा धारा 102 (c) भी खत्म कर दी गई है, जिसमें सूर्यास्त से सूर्योदय के बीच किसी इमारत या वाहन में बिना संतोषजनक कारण पाए जाने पर तीन महीने तक की सजा हो सकती थी।

दिल्ली मेट्रो में बगैर इजाजत कुछ बेचने पर जुर्माना बढ़ा

जन विश्वास विधेयक के पास होने के बाद अब दिल्ली मेट्रो में बिना अनुमति कोई सामान बेचने या बेचने के लिए दिखाने पर कड़ा जुर्माना लगेगा। पहले इस तरह के मामले में 100 से 400 रुपये तक का जुर्माना होता था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 5,000 रुपये तक कर दिया गया है। यह बदलाव धारा 73 के तहत किया गया है। सरकार छोटे अपराधों को आपराधिक की बजाय दीवानी बनाकर नियम सख्त और प्रभावी करना चाहती है।

क्या है जन विश्वास बिल का मकसद?

सरकार का उद्देश्य छोटे-मोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना और कानून को सरल बनाना है, ताकि लोगों को अनावश्यक कानूनी परेशानियों से बचाया जा सके और कारोबारी माहौल बेहतर हो। यह बिल 79 केंद्रीय कानूनों के 784 प्रावधानों में बदलाव का प्रस्ताव करता है। इसमें करीब 1000 छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाने या सरल बनाने की योजना है। इस बिल को लोकसभा में बुधवार को और राज्यसभा में गुरुवार को ध्वनिमत से पारित किया गया।

'छोटी गलतियों पर पहले देंगे चेतावनी'

सदन में चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि अब छोटी गलतियों पर पहले चेतावनी दी जाएगी। उन्होंने बताया कि अगर कोई व्यक्ति दूसरी बार गलती करता है तो उस पर जुर्माना लगेगा, और तीसरी बार गंभीर गलती होने पर सख्त कार्रवाई और अदालत का सामना करना पड़ सकता है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस कानून के लागू होने से 1000 से ज्यादा छोटे मामलों में लोगों को अदालत नहीं जाना पड़ेगा। इससे न सिर्फ समय और पैसा बचेगा, बल्कि अनावश्यक परेशानी और शर्मिंदगी से भी राहत मिलेगी। इस बिल के तहत निम्न बदलावों के प्रस्ताव हैं:

  1. 57 प्रावधानों में जेल की सजा खत्म
  2. 158 प्रावधानों में जुर्माना हटाया जाएगा
  3. 17 प्रावधानों में सजा की अवधि कम होगी
  4. 113 प्रावधानों में जेल और जुर्माने को बदला जाएगा

इसके अलावा, आम जीवन को आसान बनाने के लिए नई दिल्ली नगरपालिका परिषद अधिनियम 1994 और मोटर वाहन अधिनियम 1988 में भी 67 संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं।

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