पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और बांग्लादेश स्थित चरमपंथी संगठनों के इशारे पर दिल्ली में एक बड़ी आतंकी साजिश रचने के आरोप में 8 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल के एडिशनल कमिश्नर प्रमोद सिंह कुशवाहा ने इस मामले में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कई अहम खुलासे किए हैं।
उन्होंने कहा कि लश्कर का हैंडलर बांग्लादेश से मॉड्यूल चला रहा था। 7 फरवरी को दिल्ली में एंटी नेशनल पोस्टर लगाए गए थे। पुलिस ने सबसे पहले पोस्टर लगाने वालों का रूट चेक किया था। स्पेशल सेल ने कलकत्ता से 2 संदिग्धों को पकड़ा है। इनका नाम उमर फारुक और रॉबिन उल इस्लाम (बांग्लादेशी) है। इन दोनों ने पोस्टर लगाए थे।
एडिशनल कमिश्नर ने कहा कि इन दोनों को बांग्लादेश में बैठा शब्बीर अहमद लोन डायरेक्शन दे रहा था। 2007 में सेल ने इसे पकड़ा था। इसके पास से AK 47 मिली थी। 2019 में सजा पूरी करने के बाद वह बांग्लादेश भाग गया था।
गांदरबल कश्मीर का रहने वाला था। वह लश्कर के संपर्क में आया। दिल्ली के अलावा 10 फरवरी को कलकत्ता में पोस्टर लगवाए गए। कलकत्ता में सेफ हाउस बनाने के लिए सेफ हाउस लिया था। तमिलनाडु वाले आरोपियों की मदद से वह मंसूबों को अंजाम देने वाले थे। उमर फारुख मालदा का रहने वाला है।

इन सभी संदिग्धों का देश के अलग-अलग इलाकों को टारगेट करना था। इसके पास से वीडियो भी मिले हैं। देश के कई शहरों की रेकी की गई थी। उमर फारुक शब्बीर अहमद से मिलने बांग्लादेश गया था। शब्बीर का बेस पहले भी बांग्लादेश ही था।
कलकत्ता से पकड़े गए आरोपी गारमेंट की फैक्ट्री में काम करते थे। तमिलनाडु वाले भी गारमेंट फैक्ट्री में काम करते थे। उमर एक और बाग्लादेशी सैदुल इस्लाम के भी संपर्क में था। बुरहान वाणी के पक्ष में पोस्टर लगाए थे। इनके पास से कई चैट्स मिले हैं।

संदिग्धों के कब्जे से दर्जनों मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद किए गए। प्रारंभिक जांच से पता चला कि यह समूह पाकिस्तान की आईएसआई और बांग्लादेश स्थित कुछ संगठनों से जुड़े लोगों के संपर्क में था। सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय एजेंसियां जांच में मदद कर रही हैं। सूत्रों के अनुसार, खुफिया एजेंसियों ने संकेत दिया था कि लश्कर-ए-तैयबा 'इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस' (IED) से हमले को अंजाम देने की कोशिश कर सकता है।