हरियाणा में दीवापली के बाद से हवा बेहद प्रदूषित है। इससे निपटने के लिए सरकार अलग-अलग तरीके अपना रही है। इसी कड़ी में किसानों के पराली जलाने पर सख्त पाबंदी लगाई जा रही है। पराली जलाने वाले दो किसानों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। फतेहाबाद में पराली जलाने के दो मामले सामने आए हैं। वहीं, एक मामला पलवल में सामने आया है। 19 और 20 अक्टूबर को पलवल के जनौली और किठवाड़ी गांव में पराली में आग जलाने के मामले सामने आए थे। इन दोनों मामलों में किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
हरियाणा में अब तक पराली जलाने के 58 मामले सामने आ चुके हैं। प्रशासन की तरफ से पराली जलाने वाले किसानों पर कार्रवाई की जा रही है। वहीं, पराली नहीं जलाने पर किसानों को प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।
हरियाणा और पंजाब में वायु गुणवत्ता खराब
हरियाणा के कुछ हिस्सों में गुरुवार को वायु गुणवत्ता खराब और बेहद खराब श्रेणियों में दर्ज की गई, जबकि पड़ोसी राज्य पंजाब में यह खराब श्रेणी में रही। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार हरियाणा में रेवाड़ी जिले के धारुहेड़ा में सुबह 10 बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 338 दर्ज किया गया। जींद और रोहतक में भी वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) क्रमशः 305 और 302 के साथ 'बेहद खराब' श्रेणी में दर्ज किया गया। जिन स्थानों पर एक्यूआई खराब श्रेणी में था उनमें अंबाला (248), भिवानी (251), चरखी दादरी (263), गुरुग्राम (230), पंचकुला (257), पानीपत (275), कुरूक्षेत्र (249), करनाल (207), फतेहाबाद (277) और सोनीपत (226) शामिल हैं। पंजाब और हरियाणा की संयुक्त राजधानी चंडीगढ़ में एक्यूआई 129 दर्ज किया गया।
पराली की गांठें बेचकर कमाई कर रहे किसान
हरियाणा में कई किसान बेलर मशीन से पराली की गांठें बनाकर, उन्हें बेच रहे हैं और अच्छी कमाई कर रहे हैं। कुछ किसानों का कहना है कि वह गाठें बनाकर रख रहे हैं। आने वाले महीनों में इसकी अच्छी कीमत मिलेगी, तब वह इन्हें बेच देंगे। पराली का इस्तेमाल कई उद्योगों में होता है। गैस कंपनियों से लेकर शराब फैक्ट्री तक पराली का इस्तेमाल होता है।
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