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वायु प्रदूषण गर्भवती महिलाओं को कैसे नुकसान पहुंचाता है, डॉक्टर से जानें Air Pollution से प्रेगनेंट महिलाएं खुद को कैसे बचाएं?

 Written By: Poonam Yadav @R154Poonam
 Published : Dec 02, 2025 07:11 pm IST,  Updated : Dec 02, 2025 07:11 pm IST

अगर प्रदूषण को गंभीरता से नहीं लेंगे, तो गर्भ में पल रहे बच्चे तक इसका खामियाजा पहुंचेगा। डॉक्टर बता रही हैं कि कैसे देश में बढ़ा हुआ प्रदूषण गर्भवती महिलाओं पर बुरा प्रभाव डालता है?

प्रेग्नेंसी के दौरान एयर पॉल्यूशन से कैसे बचें- India TV Hindi
प्रेग्नेंसी के दौरान एयर पॉल्यूशन से कैसे बचें Image Source : UNSPLASH

वायु प्रदूषण सिर्फ पर्यावरण की समस्या नहीं है, बल्कि गर्भवती महिलाओं और उनके गर्भ में पल रहे शिशु के लिए एक बड़ा स्वास्थ्य खतरा बन चुका है। हवा में मौजूद जहरीली गैसें और रसायन शरीर में ऐसे बदलाव पैदा करते हैं, जो गर्भावस्था को जटिल बना सकते हैं और भ्रूण के विकास में गंभीर बाधाएं डाल सकते हैं। जयपुर में स्थित आब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल में सीनियर कंसल्टेंट डॉ. मानिनि पटेल बता रही हैं कि देश दुनिया में बढ़ा हुआ प्रदूषण गर्भवती महिलाओं को कैसे नुकसान पहुंचा रहा है?

प्रदूषण गर्भवती महिलाओं को कैसे पहुंचाता है नुकसान?

प्रदूषित हवा में मौजूद PM 2.5 और PM 10 जैसे सूक्ष्म कण गर्भवती महिलाओं के फेफड़ों में पहुंचकर सूजन बढ़ाते हैं। इस वजह से सांस फूलना, अस्थमा का बढ़ना और रेस्पिरेटरी इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। गर्भावस्था में ऑक्सीजन की जरूरत ज्यादा होती है, ऐसे में प्रदूषण फेफड़ों की क्षमता को और सीमित कर देता है, जिससे माँ और शिशु दोनों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाता है।

प्रदूषण से गर्भ में शिशु को हो सकती हैं ये दिकक्तें:

  • समय से पहले डिलीवरी: बढ़ा हुआ प्रदूषण गर्भवती महिलाओं में प्रीमैच्योर डिलीवरी के जोखिम को तेजी से बढ़ाती है। प्रदूषण की वजह से प्लेसेंटा में सूक्ष्म कण जमा हो जाते हैं, जो अजन्मे बच्चें पर लंबे समय तक बुरा प्रभाव डालते हैं।

  • कम वजन वाले बच्चे का खतरा: प्रदूषित हवा की वजह से गर्भ में पल रहे शिशु की ग्रोथ रुक सकती है। नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड जैसे प्रदूषक तत्व प्लेसेंटा तक पहुंचकर खून के प्रवाह को रोकते हैं। जिस वजह से भ्रूण को पर्याप्त पोषण और ऑक्सीजन नहीं मिल पाता है। 

  • शिशु का दिमाग होता है प्रभावित: गर्भ में शिशु का दिमाग तेजी से विकसित होता है। लेकिन अगर आप ऐसी जगह रहे रही हैं जहां प्रदूषण बहुत ज़्यादा है तो उस वजह से शिशु का तंत्रिका तंत्र प्रभावित हो सकता हैं। 

  • बच्चों में एलर्जी या अस्थमा: कई शोध बताते हैं कि गर्भावस्था के दौरान प्रदूषण के संपर्क में रहने वाली महिलाओं के बच्चों में एलर्जी, अस्थमा और कमज़ोर इम्यून सिस्टम की संभावना तेजी से बढ़ती है।

गर्भवती महिलाएं प्रदूषण से बचने के लिए क्या करें?

  • गर्भवती महिलाओं को प्रदूषण से बचने के लिए सुबह-शाम के समय जब प्रदूषण बहुत ज़्यादा होता है तब बाहर कम निकलना चाहिए। 

  • गर्भवती महिलाओं को हमेशा ट्रैफिक वाले क्षेत्रों से दूरी रखनी चाहिए। ऐसे क्षेत्रों में प्रदूषण बहुत ज़्यादा होता है। अगर मजबूरी में निकलना ही पड़े तो N-95 मास्क का इस्तेमाल करें। 

  • अपने घर में वेंटिलेशन को और भी बेहतर करें। प्राकृतिक हवा मिले इसलिए एयर-प्यूरीफाइंग पौधे लगाएं। 

  • ज़रूरत के बिना भी भी वाहन चलाने जैसी आदतों को कम करना भी महत्वपूर्ण है। 

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)

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