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मोबाइल का एडिक्शन धकेल देता है डिप्रेशन की तरफ, बाबा रामदेव से जानें हो सकती हैं कौन कौन सी परेशानियां?

 Written By: Pankaj Kumar Edited By: Poonam Yadav
 Published : Jul 27, 2025 10:08 am IST,  Updated : Aug 04, 2025 04:52 pm IST

ऑनलाइन कॉन्टेंट कंज्यूम करते-करते मेंटल फटीग होने लगती है। चिड़चिड़ापन महसूस होता है स्ट्रेस लेवल हाई हो जाता है और लंबे वक्त तक स्ट्रेस लेवल बढ़ने का असर शरीर के मेटाबॉलिक सिस्टम पर पड़ता है।

बाबा रामदेव- India TV Hindi
बाबा रामदेव Image Source : SORA AI

आज के दौर में रील भी पॉल्यूशन बन गई है। बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक बस रील देखने में व्यस्त हैं। ये एक सच्चाई है कि घर हो या पब्लिक प्लेस, फोन की तेज आवाज कर, लोग रील देखने से नहीं कतराते। दरअसल ये एक तरह का 'कैमिकल लोचा' है जिसे 'डोपामाइन रश' कहा जाता है। इसमें एक वीडियो देखने से जो खुशी मिलती है उसके बाद 'और अधिक' यानि एक के बाद एक रील्स देखने का मन करता है और लोग देखते चले जाते हैं। ये 'फोन एडिक्ट'-'रील्स एडिक्शन' उन्हें फिजिकली और मेंटली पूरी तरह तोड़कर रख देता है। मतलब ये कि अगर आपको लगता है सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आप काफी लोकप्रिय हो गए हैं। स्क्रॉलिंग और रील्स देखे बगैर आप रह नहीं सकते तो आपके लिए एक डरावनी चेतावनी है क्योंकि ऑनलाइन कॉन्टेंट कंज्यूम करते-करते मेंटल फटीग होने लगती है। चिड़चिड़ापन महसूस होता है स्ट्रेस लेवल हाई हो जाता है और लंबे वक्त तक स्ट्रेस लेवल बढ़ने का असर शरीर के मेटाबॉलिक सिस्टम पर पड़ता है। आइए बाबा रामदेव से जानते हैं कि मोबाइल एडिक्शन से आपको कौन-कौन सी परेशानियां हो सकती हैं? 

हार्मोन्स डिस्टर्ब होते हैं जिससे बॉडी के बायोमार्कर्स बिगड़ते हैं जो तरह-तरह की बीमारियों के आने का गेट वे बन जाता है। वैसे भी मोबाइल फोन पर ज्यादा देर रहने का मतलब है कि हर वक्त ऊंगलियां फोन पर स्क्रीन पर नजर गड़ाए रहना, गर्दन झुकाए रहना अब इसका असर तो शरीर पर पड़ेगा ही। 'रील्स एडिक्शन' का सीधा मतलब ही है कि आप कम उम्र में ही बूढ़ा और बीमार बनने की तरफ बढ़ चुके हैं और जिसे आप एप्स के फिल्टर से भी नहीं छिपा सकते तो देर मत कीजिए कैंसर जैसी घातक बीमारियों की तरह भले ही इसकी शक्ल डरावनी दिखाई ना दे लेकिन ये कैंसर से कम खतरनाक नहीं है कैंसर की तरह ही, हर अंग को ये पैरालाइज कर रही है।

मोबाइल का इस्तेमाल?

  • युवा 24 घंटे में से 5-6 घंटे सेलफोन पर रहते हैं

  • नौकरी वाले 80%फोन पर रहते हैं

  • 20% पढ़ाई करने वाले मोबाइल पर रहते हैं 

  • MNC's वाले 8 घंटे लैपटॉप

मोबाइल की आदत

  • चिड़चिड़ापन-गुस्सा करना

  • रुटीन के काम ना करना

  • मेंटली वीक

  • फिजिकली कमजोर

  • फोन से 22% बच्चे ऑटिज्म के शिकार

मोबाइल फोन - स्मार्ट इस्तेमाल जरूरी

  • मोटापा

  • डायबिटीज

  • हार्ट प्रॉब्लम

  • कंसंट्रेशन बिगड़ना 

  • नर्वस प्रॉब्लम

  • स्पीच प्रॉब्लम

  • नजर कमजोर

  • हियरिंग प्रॉब्लम

स्मार्टफोन - सही इस्तेमाल ज़रूरी

  • 43%: नोमोफोबिया मोबाइल खोने का डर

  • 43%: रिंग-एंग्जायटी फोन ना बजने से घबराहट

  • 25%: फैंटम रिंगिंग फोन रिंग होने का आभास होना

फोन का मिसयूज - पेरेंट्स कन्फ्यूज

  • बच्चों के फोन यूज से अंजान माता पिता

  • 90% नहीं देते बच्चों पर ध्यान

स्मार्टफोन विजन सिंड्रोम

  • नजर कमजोर - ड्राईनेस 

  • पलकों में सूजन - रेडनेस 

  • तेज रोशनी से दिक्कत

  • एकटक देखने की आदत

कानों का दुश्मन  - स्मार्टफोन

  • सिरदर्द

  • बहरापन

  • अनिद्रा

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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