गायों की घंटियों की हल्की आवाज वो सुकून है, जो महानगरों में बहुत मुश्किल से मिलता है। हमारी संस्कृति में गाय को 'माता' कहा गया है, क्योंकि ये सिर्फ दूध नहीं देती ये जीवन में शांति, संतुलन और ऊर्जा भी लाती है। कृष्ण की बांसुरी और गौशाला का रिश्ता भी तो यही सिखाता है कि कुदरत के करीब रहना ही असली खुशहाली है। आज साइंस भी मानती है सिर्फ 15 मिनट गौ माता को सहलाने से तनाव वाला हार्मोन 'कोर्टिसोल' घटता है और लव हार्मोन 'ऑक्सीटोसिन' बढ़ता है। यही वजह है कि गायों का साथ दिल की धड़कन को शांत और मन को स्थिर कर देता है।
जब हम इनके साथ समय बिताते हैं उन्हें चारा देते हैं, उनकी देखभाल करते हैं तो सिर्फ इमोशनल अटैचमेंट ही नहीं बनती है। शरीर के अंदर हार्मोनल बैलेंस भी बेहतर होता है। स्टडी बताती है'ह्यूमन-एनिमल इंटरैक्शन'ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट को कम करता है और स्ट्रेस कम होने से थायराइड हार्मोन के रेगुलेशन में मदद मिलती है। आज जब शहरों की भागदौड़ हमें नेचर से दूर ले जा रही है तो यही दूरी हार्मोनल इबैलेंस और इम्यूनिटी कमजोर होने की वजह बन रही है। जानवरों को पालना, प्रकृति से जुड़ना एक तरह की 'लिविंग थेरेपी' है जो मन को ग्राउंड करता है और शरीर को बैलेंस करता है। क्योंकि जैसे-जैसे हम पशुओं से, प्रकृति से दूर हुए तनाव,हार्मोनल प्रॉब्लम्ज और लाइफस्टाइल की तमाम बीमारियां बढ़ती चली गईं। तो आज हार्मोनल प्रॉब्लम थायराइड की परेशानियों को योगिक उपाय जानने के साथ कुदरत के करीब लाने की कला योगगुरु स्वामी रामदेव से जानेंगे।
लाइफस्टाइल की बीमारी
बीपी-शुगर
हाई कोलेस्ट्रॉल
ओबेसिटी
थायराइड
लंग्स प्रॉब्लम
इनसोम्निया
आर्थराइटिस
डेफिशियेंसी
रोज़ योग के फायदे
एनर्जी बढ़ेगी
बीपी कंट्रोल
वजन कंट्रोल
शुगर कंट्रोल
नींद में सुधार
बेहतर मूड
कंट्रोल होगा थायराइड
वर्कआउट जरूर करें
सुबह एप्पल विनेगर पीएं
रात में हल्दी दूध लें
कुछ देर धूप में बैठें
7 घंटे की नींद जरूर लें
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता ह
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