दिवाली एक ऐसा त्योहार से जो कि सिर्फ फसलों से ही नहीं जुड़ा हुआ बल्कि सेहत से भी जुड़ा हुआ है। तभी इस त्योहार में लोग तेल, घी, दूध और तमाम प्रकार की साग-सब्जियों को शामिल करते हैं। हर राज्य में लोग अलग-अलग तरीके से दिवाली को मनाते हैं और हर राज्य की परंपरा अलग है। ऐसा ही कुछ दक्षिण भारत की इस परंपरा में आप देख सकते हैं। दरअसल, केरल और तमिलनाडु के कई इलाकों में लोग दिवाली के दिन सुबह उठकर तेल से स्नान (Why do people take oil bath on Diwali) करते हैं। ज्यादातर लोग इस स्नान में तिल के तेल का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन, इसके क्या फायदे हैं और सेहत के लिए ये क्यों खास है। जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।
तेल स्नान करने के फायदे कई हैं। पहले तो ये परंपरा सर्दियों से जुड़ी हुई है जिसमें कि तिल के तेल से नहाना शरीर में गर्मी बढ़ाने और इम्यूनिटी बूस्ट करने में मददगार है। ये आपको सर्दियों में सर्दी-जुकाम से बचाने में मददगार है। इससे आप इस मौसम में संक्रामक बीमारियों के शिकार नहीं होंगे और हेल्दी रहेंगे।
तेल स्नान हड्डियों की सेहत के लिए फायदेमंद है। ये एंटी इंफ्लेमेटरी है जो कि जोड़ों को आराम देने के साथ आपको कई बीमारियों से बचाने में मदद करता है। जैसे गठिया और ऑस्टियोपोरोसिस। इसके अलावा इस स्नान से हड्डियों को आराम मिलता है और इनमें हाइड्रेशन बढ़ता है जिससे हड्डियों के बीच घर्षण कम होता है और आप कई बीमारियों से बच पाते हैं।

तिल के तेल में कई सारे विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो कि सेहत के लिए कई प्रकार से काम कर सकते हैं। ये एंटीऑक्सीडेंट आपको कई बीमारियों से बचा सकते हैं। जैसे सर्दी-जुकाम और खराब इम्यूनिटी से जुड़ी बीमारियां। इसके अलावा ये तेल एंटीबैक्टीरियल भी है जो कि आपको स्किन से जुड़ी कई समस्याओं से बचाव में मदद कर सकता है।
इसके अलावा इस परंपरा के पीछे एक सोच ये भी है तिल का तेल डिटॉक्सीफाइंग और मॉइस्चराइजिंग एजेंट भी है जो कि स्किन को साफ करने के साथ इसे मॉइस्चराइज करने में भी मददगार है।
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