नई दिल्ली: वोहरा समुदाय में महिलाओं के खतना यानी फीमेल जेनिटल म्यूटलेशन (खतना) परंपरा पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करने का फैसला लिया है। इस मामले में चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली बेंच ने भारत सरकार, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ये मामला अहम और संवेदनशील है। ये याचिका सुनीता तिवारी की ओर से दायर की गई है। ('मेरे आंसुओं को कमज़ोरी ना समझना', MLA की फटकार के बाद लेडी IPS का जवाब)
याचिका में फीमेल जेनिटल म्यूटलेशन(एफजीएम) को अमानवीय प्रथा बताते हुए इस पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की गुहार की गई है। इसे संज्ञेय अपराध और गैर जमानती वारंट के तहत लाने की गुहार भी की गई है। याचिका में कहा गया है कि दाउदी वोहरा समुदाय में बच्चियों (पांच वर्षं से रजोस्वला तक के बीच) के साथ होने वाले इस अमानवीय कृत्य को मानवाधिकार का घोर उल्लंघन है। साथ ही सयुक्त राष्ट्र कनवेंशन केखिलाफ है। याचिका में कहा गया है कि नाबालिग केसाथ होने वाली यह कुप्रथा महिलाओं केसाथ भेदभाव है।
तिवारी ने संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के साथ, नीति निर्देशक तत्व के अनुच्छेद 39 का हवाला देते हुए इस पर प्रतिबंध लगाए जाने की मांग की है। भारत में वोहरा समुदाय की महिलाओं के बीच खतना का प्रचलन है। याचिका को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा है। दिसंबर 2012 में संयुक्त राष्ट्र महाधिवेशन में महिलाओं के खतना पर प्रतिबंध लगाने को लेकर प्रस्ताव पारित किया गया था, जिस पर भारत ने भी दस्तखत किया है।
याचिकाकर्ता ने इसी प्रस्ताव का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रथा को रोकने के लिए कानून बनाए जाने के निर्देश देने की मांग की है।
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