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असम: धड़ल्ले से यूं होती है गायों की तस्करी, INDIA TV की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में खुलासा

असम में भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर गायों की तस्करी धड़ल्ले से होती रही है। आलम यह है कि यहां गोतस्कर इस कदर बेखौफ हैं कि उन्हें गोलियों से भी डर नहीं लगता।

IndiaTV Hindi Desk
Published : Jun 24, 2017 09:30 pm IST, Updated : Jun 24, 2017 09:30 pm IST
Cow Smuggling- India TV Hindi
Cow Smuggling

गुवाहाटी: असम में भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर गायों की तस्करी धड़ल्ले से होती रही है। आलम यह है कि यहां गोतस्कर इस कदर बेखौफ हैं कि उन्हें गोलियों से भी डर नहीं लगता। गोतस्करों के सीक्रेट अड्डे पर जब इंडिया टीवी का रिपोर्टर पहुंचा और पड़ताल की तो चौंकाने वाले खुलासे सामने आए। यहां पर ऐसे ठिकानों के बारे में पता लगा, जहां से तस्करी के जरिए गाएं आसानी से कत्लखानों तक पहुंच जाती हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस इलाके में गायों को केले के तने से बांधकर नदी पार कराई जाती है। हैरानी की बात यह है कि गोतस्कर गायों के साथ-साथ छोटे-छोटे बछड़ों को भी बेरहमी से बांधकर ब्रह्मपुत्र नदी पार कराते रहे हैं। इस पड़ताल में यह हकीकत भी सामने आई कि इस तरीके से रोज लगभग 2,000 गाएं बांग्लादेश भेजी जाती हैं। इंडिया टीवी की पड़ताल में यह हकीकत भी सामने आई कि आखिर किस तरह तस्कर इतनी बड़ी संख्या में गायों को बॉर्डर पार कराने में सफल होते रहे हैं।

गायों की तस्करी में इस्तेमाल होता है सीक्रेट कोड

हमें खबर मिली थी कि गाय के तस्कर एक सीक्रेट कोड का इस्तेमाल करते हैं। यह वो कोड होता है, जिसके जरिए गायें लावारिस हालत में नदी में छोड़ दी जाती हैं और वो खुद-बखुद उन एजेंट्स के पास पहुंच जाती हैं जो बड़े आराम से गायों को बांग्लादेश पहुंचा देते हैं। भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर असम के धुबरी जिले से गायों को ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी कालजनी के जरिए बांग्लादेश भेजा जाता है।

पुलिस ही नहीं, BSF की आंखों में भी झोंकी जाती है धूल
धुबरी के इस इलाके में सिर्फ पुलिस ही नहीं, BSF की आंखों में भी धूल झोंकना बेहद आसान है। ऑपरेशन ब्रह्मपुत्र कतई आसान नहीं था, क्योंकि चप्पे-चप्पे पर गोतस्करों के मुखबिर फैले थे। यह वो इलाका है जहां किसी के पहुंचने से पहले ही उसकी मूवमेंट गोतस्करों तक पहुंच जाती है। धुबरी में छोटी-छोटी पगडंडियों के रास्ते गायों को बड़ी आसानी से नदी किनारे ले जाया जाता है और उन्हें अंजाम तक पहुंचाया जाता है। इस काम को यूं अंजाम दिया जाता है कि पुलिस और BSF को भी कानोंकान खबर नहीं हो पाती। 

यूं हो जाती है गायों की तस्करी
तस्कर गाय की तस्करी के लिए उस वक्त को चुनते हैं, जब यहां बारिश हो रही होती है। बारिश के बीच नदी में हर तरफ धुंध पसर जाती है और सुरक्षाकर्मियों की निगरानी का दायरा सीमित हो जाता है। इसी में गोतस्कर अपने खेल को अंजाम दे देते हैं। बड़े तस्कर आमतौर पर नाव का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन जब इलाके में चौकसी ज्यादा होती है तब ये तस्कर गायों को ब्रह्मपुत्र नदी में तैरने के लिए छोड़ देते हैं। सबको एक दूसरे के साथ बांध दिया जाता है, ताकि एक साथ तैरती हुई गायें उस पार चली जाएं या फिर तस्कर केले के तने का इस्तेमाल करते हैं।

इंडिया टीवी की खबर का हुआ बड़ा असर 
गोतस्करी की ये तस्वीरें सामने आने के बाद बीएसएफ ने तस्करों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया। ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू हो गई और बंशीचार इलाके में तस्करों के कब्जे से 70 गायें छुड़ाई गईं।

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