नई दिल्ली. नए कृषि कानूनों के विरोध में किसान संगठनों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। किसान 20 दिन से ज्यादा समय से दिल्ली की सीमाओं पर अपना विरोध जता रहे हैं। इस बीच एक किसान संगठन अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को पत्र लिखकर कहा कि वर्तमान में चल रहे किसानों के विरोध प्रदर्शन किसी भी राजनीतिक दल से संबद्ध नहीं हैं। वहीं पीएम नरेंद्र मोदी ने लोगों से कृषि सुधारों को रेखांकित करती अपनी सरकार द्वारा जारी की गई ई-पुस्तिका पढ़ने और उसे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने का आग्रह किया।
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सरकार ने अंग्रेजी और हिंदी में ई-पुस्तिका जारी की है जो सितंबर में लागू किए गए सुधारों से फायदा उठाने वाले किसानों की सफलता को रेखांकित करती है। प्रधानमंत्री ने पुस्तिका के हिंदी संस्करण के पृष्ठों की तस्वीरें ट्विटर पर साझा करते हुए लिखा, ''इस पुस्तिका में ग्राफिक्स और बुकलेट समेत ढेर सारी चीजें हैं, जिनके जरिये यह समझाया गया है कि हाल ही में लाए गए कृषि सुधार हमारे किसानों के लिए किस प्रकार लाभकारी हैं। ये नमो ऐप के वॉलंटियर मॉड्यूल के यॉर वॉइस और डाउनलोड सेक्शन में मिल सकते हैं। इसे पढ़ें और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं।''
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शनिवार को बड़ी खबर ये भी रही कि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात की। मुलाकात के बाद मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि केंद्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसान संघों और सरकार के बीच वार्ता के अगले दौर के लिए रास्ता एक या दो दिन में निकल सकता है। आज किसान आंदोलन से जुड़ी तमाम खबरें आप हमारे इस पेज पर पा सकते हैं।
जब तक बिल वापिस नहीं होगा, MSP पर क़ानून नहीं बनेगा तब तक किसान यहां से नहीं जाएंगे। 23 तारीख को किसान दिवस के मौके पर किसान आप से कह रहे हैं कि एक समय का भोजन ग्रहण न करें और किसान आंदोलन को याद करें: राकेश टिकैत, भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता
बॉर्डर पर पंजाब, हरियाणा से आए युवा किसान इस आंदोलन के समर्थन में ब्लड डोनेट कर रहे हैं तो वहीं अपने शरीर पर कृषि विषय पर टैटू भी बनवा रहे हैं। नौजवान अपना ब्लड डोनेट करके अपना समर्थन किसानों को दे रहे हैं। बॉर्डर पर एक निजी एनजीओ द्वारा ब्लड बैंक लगाया गया है। ब्लड बैंक शनिवार सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक लगा। जिसमें 18 वर्ष से 40 वर्ष तक के करीब 50 लोगों ने अपना ब्लड डोनेट किया।
कृषि कानूनों के खिलाफ चिल्ला बॉर्डर पर किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है। किसानों के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए बॉर्डर पर सुरक्षा बल तैनात है। #FarmersProtests
कृषि कानूनों के खिलाफ किसान प्रदर्शनकारी दिल्ली-यूपी बाॅर्डर पर डटे हुए हैं, प्रदर्शनकारी किसान कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। एक प्रदर्शनकारी ने बताया, "कानून खत्म कर दिए जाएं और हम दो घंटे में चले जाएंगे।"
तीन कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसान यूनियनों ने शनिवार को कहा कि वे अपना अगला कदम अगले दो तीन दिनों में तय करेंगे। इस सप्ताह के शुरू में उच्चतम न्यायालय ने उल्लेखित किया था कि वह गतिरोध के समाधान के लिए कृषि विशेषज्ञों और किसान यूनियनों का एक ‘‘निष्पक्ष और स्वतंत्र’’ समिति गठित करने पर विचार कर रहा है। किसान नेता शिव कुमार कक्का ने कहा कि रणनीति तय करने के लिए यूनियनों के बीच वर्तमान में चर्चा चल रही है। उन्होंने कहा कि वे इस मामले पर कानूनी राय भी ले रहे हैं।
कक्का ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘हमारी बैठकें अगले कदम के लिए हो रही हैं। हम उम्मीद करते हैं कि अगले दो-तीन दिनों में, हमारे समक्ष यह स्पष्टता होगी कि हमें अदालत द्वारा सुझाई गई समिति का हिस्सा होना चाहिए या नहीं।’’ एक अन्य नेता बलबीर सिंह ने कहा कि किसान तब तक अपना विरोध प्रदर्शन समाप्त नहीं करेंगे जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जाती। उन्होंने कहा, ‘‘हम एक लंबी लड़ाई के लिए तैयार हैं। हम अपने अधिकारों के लिए यहां हैं। हम अदालत के आदेश के बाद अपना रुख तय करने की प्रक्रिया में हैं।’’
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शनिवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बड़ा दिल दिखाते हुए किसानों की मांग माननी चाहिए और कृषि कानूनों को वापस लेना चाहिए। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि केंद्र सरकार में संवेदनशीलता नहीं बची है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने संवाददताओं से कहा, ‘‘किसानों के साथ में अन्याय हो रहा है। किसान भारी ठंड में बैठे हुए हैं। सरकार में बैठे लोग इतने संवेदनहीन लोग हैं कि इनमें संवेदनशीलता नाम की चीज नहीं है।’’
गहलोत ने कहा, ‘‘इन किसानों में खेतिहर किसान भी हैं, भूमिहीन मजदूर भी हैं। बड़े-छोटे सब किसान हैं और सब दुखी हैं। सरकार को चाहिए, प्रधानमंत्री जी को खुद को चाहिए कि वह बड़ा दिल रखें और प्रतिष्ठा का सवाल नहीं बनाएं। अगर वह कानून वापस लेते हैं, जनता का मान सम्मान बढ़ता है और लोकतंत्र मजबूत होता है। इनको अपना अहम-घमंड छोड़ना चाहिए।’’
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