नई दिल्ली: एप आधारित टैक्सी सेवाओं के विरोध में शहर की ऑटो और टैक्सी यूनियनों ने आज से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इससे हजारों यात्रियों का परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऑटो और टैक्सी की बीस यूनियनों ने मिलकर संयुक्त कार्य समिति बनाई है। इसी समिति ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का आह्वान किया था। समिति ने दावा किया कि हड़ताल के समर्थन में करीब 85,000 ऑटो और 15,000 काली-पीली टैक्सियां राजधानी की सड़कों से नदारद हैं। केवल कुछ ही ऑटो रिक्शा चले, वह भी रिहायशी इलाकों में। काली-पीली टैक्सियां सड़कों से पूरी तरह नदारद रहीं।
जेएसीएटीयू के अध्यक्ष राजेंद्र सोनी ने कहा, "इस बार सरकार को हम अपनी ताकत से वाकिफ कराएंगे। हम चाहते हैं कि सरकार इन एप आधारित टैक्सी सेवाओं के लिए किराए की दरों का निर्धारण करे।" तेजी से पांव पसार रही एप आधारित सेवाएं खासकर ओला व उबेर की टैक्सियों ने अधिकांश कारोबार पर कब्जा कर लिया है, जिस पर हाल तक ऑटो रिक्शा व काली-पीली टैक्सियों का कब्जा था। इससे हड़ताली बेहद नाराज हैं।
सोनी ने कहा, "पहले हम रोजाना 1,500 से 2,000 रुपए कमाते थे। लेकिन जब से ये टैक्सियां आई हैं, हमारी कमाई 300-500 रुपए रह गई है। इसके लिए एप आधारित टैक्सियां जिम्मेदार हैं।"एप आधारित सेवा शुरू होने से पहले ऑटो रिक्शा चालकों को दिल्ली मेट्रो के आने से नुकसान हुआ था। एक अन्य ऑटो रिक्शा यूनियन के अध्यक्ष संजय चावला ने कहा कि दिल्ली सरकार को एप आधारित टैक्सी सेवाओं के लिए किराए की दर तय करनी चाहिए, ताकि वे हमारे कारोबार को नुकसान न पहुंचाएं।
उन्होंने कहा, "अब तक ये कैब 6-7 रुपए प्रति किलोमीटर की दर वसूलने का प्रचार कर रहे हैं। ऐसा करके वे हमारे ग्राहकों को आकर्षित करते हैं और 14-15 रुपये प्रति किलोमीटर वसूलते हैं।" हड़ताल से उन हजारों यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है, जो सफर के लिए रोजाना ऑटो रिक्शा का इस्तेमाल करते हैं। अधिकांश लोगों ने मंगलवार को दिल्ली मेट्रो या बसों से यात्रा की, जो भीड़ से खचाखच भरी रही।
सबसे ज्यादा परेशानी तो उन्हें हुई, जो ट्रेन से राजधानी पहुंचे। उन्हें ऑटो रिक्शा व टैक्सी चालक रेलवे स्टेशनों पर प्रदर्शन करते नजर आए। दिल्ली सरकार ने कहा कि उसने लोगों की सहूलियत के लिए 300 अतिरिक्त बसों को सड़कों पर उतारा है। लेकिन, साफ दिखा कि यह पर्याप्त नहीं है। दिल्ली की पुलिस संयुक्त आयुक्त (यातायात) गरिमा भटनागर ने कहा कि हड़ताल के कारण बसों व मेट्रो ट्रेन में भारी भीड़ रही। उन्होंने कहा कि हिंसा की कोई घटना सामने नहीं आई है।
लेकिन, लोगों ने उन ऑटो रिक्शों पर हमलों की कुछ छिटपुट हिंसा की घटनाओं की जानकारी दी है, जिन्होंने हड़ताल न करते हुए गाड़ी चलाने की कोशिश की। एक लॉ कंपनी में कार्यरत संदीप रोशन ने कहा कि उन्होंने मेट्रो से जाना उचित समझा, क्योंकि उन्हें डर था कि ज्यादा मांग की वजह से ओला या उबेर वाले अधिक किराया वसूलेंगे।
जनसंचार कर्मचारी त्रिवेणी सूद ने मुनिरका से सुल्तानपुर के सफर के लिए मेट्रो को तरजीह दी। सामान्यतया वे ऑटो से सफर करती हैं। दिल्ली मेट्रो ने कहा कि ट्रेनों में ज्यादा भीड़ नहीं देखी गई। मेट्रो के एक अधिकारी ने कहा, "हम भीड़ की निगरानी कर रहे हैं। यदि भीड़ ज्यादा बढ़ी, तो हम ट्रेनों के फेरे बढ़ाएंगे।"