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Corona: PM ने की अवधेशानंद गिरी से बात, संतों से की कुंभ को प्रतीकात्मक रखने की अपील

Written by: IndiaTV Hindi Desk Published : Apr 17, 2021 09:24 am IST, Updated : Apr 17, 2021 10:09 am IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बताया कि उन्होंने संतों से कुंभ को प्रतीकात्मक रखने की प्रार्थना की है, ताकी कोरोना से लड़ाई मजबूत हो सके। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, "मैंने प्रार्थना की है कि दो शाही स्नान हो चुके हैं और अब कुंभ को कोरोना के संकट के चलते प्रतीकात्मक ही रखा जाए। इससे इस संकट से लड़ाई को एक ताकत मिलेगी।"

नई दिल्ली. कोरोना की दूसरी प्रचंड लहर के बीच उत्तराखंड के हरिद्वार में चल रहा कुंभ मेला जारी है। कुंभ में कई साधु-संत सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी संक्रमित पाए गए हैं। इस बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने फोन पर स्वामी अवधेशानंद गिरि से बात की और साधु-संतों का हाल जाना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। पीएम मोदी ने ट्वीट किया, "आचार्य महामंडलेश्वर पूज्य स्वामी अवधेशानंद गिरि जी से आज फोन पर बात की। सभी संतों के स्वास्थ्य का हाल जाना। सभी संतगण प्रशासन को हर प्रकार का सहयोग कर रहे हैं। मैंने इसके लिए संत जगत का आभार व्यक्त किया।"

एक अन्य ट्वीट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बताया कि उन्होंने संतों से कुंभ को प्रतीकात्मक रखने की प्रार्थना की है, ताकी कोरोना से लड़ाई मजबूत हो सके। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, "मैंने प्रार्थना की है कि दो शाही स्नान हो चुके हैं और अब कुंभ को कोरोना के संकट के चलते प्रतीकात्मक ही रखा जाए। इससे इस संकट से लड़ाई को एक ताकत मिलेगी।"

कोविड-19 के कारण एक माह की अवधि के लिए सीमित कर दिए गए महाकुंभ के तीन शाही स्नान- महाशिवरात्रि, सोमवती अमावस्या और बैसाखी हो चुके हैं जबकि रामनवमी के पर्व पर आखिरी शाही स्नान होना है। कुंभ के लिए हरिद्वार पहुंचे साधु-संत और श्रद्धालु खासी संख्या में कोरोना वायरस से संक्रमित हो रहे हैं।

निरंजनी के कुंभ समापन की घोषणा के विरोध में उतरे अन्य अखाड़े

कोविड-19 के कारण बिगड़ रहे हालात के मद्देनजर निरंजनी अखाडे द्वारा हरिद्वार महाकुंभ के 17 अप्रैल से समापन की घोषणा किये जाने के बाद अन्य अखाड़े विरोध में उतर आए हैं और इस मसले पर माफी मांगने को कहा है। निर्वाणी अणि अखाडा के अध्यक्ष महंत धर्मदास ने कहा कि कुंभ मेले की समाप्ति की घोषणा का अधिकार केवल मेलाधिकारी या प्रदेश के मुख्यमंत्री को है। उन्होंने कहा कि निरंजनी अखाड़े ने बिना किसी सहमति के ऐसा कहकर समाज में अफरातफरी मचाने का अक्षम्य अपराध किया है और ऐसे में उसके साथ रहना मुश्किल है।

महंत धर्मदास ने कहा कि निरंजनी अखाड़े को अपने ऐसे बयान के लिए पूरे अखाड़ा परिषद के सामने माफी मांगनी चाहिए और तभी उसके साथ आगे बने रहने पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि उसका यह फैसला ठीक नहीं है क्योंकि कुंभ के बारे में कोई भी फैसला सभी 13 अखाड़े मिलकर लेते हैं। बड़ा उदासीन अखाड़े ने भी साफ किया कि वह जल्द महाकुंभ मेला समाप्त करने के पक्ष में नहीं है। अखाड़े के अध्यक्ष महंत महेश्वर दास ने कहा कि बिना अखाड़ा परिषद की बैठक के महाकुंभ मेला समाप्त करने के बारे में कोई फैसला नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कुंभ मेले की व्यवस्था विचार-विमर्श से चलती है लेकिन निरंजनी अखाड़े ने इस पर अखाडों से कोई बात नहीं की।

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