Iran Supreme Leader News: मिडिल-ईस्ट की जियो-पॉलिटिक्स में दशकों तक सबसे ताकतवर रहे ईरान के सुप्रीम लीडर Ayatollah Ali Khamenei की मौत का दावा किया जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बयान में कहा कि अमेरिकी और इजरायली वायुसेना के प्रहार में खामेनेई की जान चली गई। अगर ट्रंप के दावे की पुष्टि हो जाती है, तो यह ईरान समेत पूरी दुनिया के इतिहास का बहुत बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित होगा। आइए जानते हैं कि खामेनेई कैसे एक आम मौलवी से ईरान के सर्वोच्च नेता तक बन गए और कैसे उन्होंने 4 दशक तक सत्ता चलाई।
अली खामेनेई का सियासी सफर का ग्राफ ईरान में सन् 1979 की ऐतिहासिक इस्लामी क्रांति के साथ ऊपर चढ़ा। जब अयातुल्ला रुहल्लाह खुमैनी की लीडरशिप में ईरान से अमेरिका के सपोर्ट वाली शाह की सत्ता को उखाड़ फेंका गया, तो अली खामेनेई उनके सबसे विश्वासपात्र सिपहसालारों में से एक थे। 1981 में एक बम विस्फोट में उन पर जानलेवा हमला हुआ, जिसमें वे बाल-बाल बच गए। फिर 1981 से 1989 तक अली खामेनेई ने ईरान के राष्ट्रपति के तौर पर काम किया। सन् 1989 में अयातुल्ला रुहल्लाह खुमैनी के निधन के बाद, ईरान की कमान खामेनेई के पास आ गई और उनको ईरान का 'सुप्रीम लीडर' चुन लिया गया।
अली खामेनेई के 1989 में सुप्रीम लीडर बनने के बाद से 2026 तक, ईरान में पत्ता भी उनकी मर्जी के बिना नहीं हिला। अपने 37 साल के शासन में अली खामेनेई ने ईरान की फौज इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC को भरपूर ताकत दी।
उन्होंने सीधे जंग लड़ने की जगह मिडिल-ईस्ट में अपना दबदबा बढ़ाने के लिए अपने 'प्रॉक्सी नेटवर्क' का जाल बिछा दिया। अली खामेनेई ने गाजा में हमास, यमन में हूतियों और लेबनान में हिजबुल्लाह को पैसा और हथियार देकर खड़ा किया और पूरे इलाके में गहरी पैठ बनाई। ईरान में जब भी उनकी कट्टर नीतियों या आर्थिक तंगी के खिलाफ पब्लिक ने आवाज उठाई, तो खामेनेई के ऑर्डर पर उसे सख्ती से कुचला गया।
अली खामेनेई की पूरी सियासत 'अमेरिका और इजरायल के विरोध' पर टिकी रही। उन्होंने अमेरिका को 'द ग्रेट शैतान' का खिताब दिया। ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर अली खामेनेई की पश्चिमी देशों से हमेशा ठनी रही, जिसकी वजह से ईरान पर कड़े अंतरराष्ट्रीय आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए और इससे अर्थव्यवस्था चरमरा गई। फिर 2020 में अमेरिकी ड्रोन अटैक में उनके सबसे ताकतवर जनरल कासिम सुलेमानी की मौत ने इस दुश्मनी को और हवा दे दी।
सुप्रीम लीडर खामेनेई ने हमेशा इजरायल को दुनिया के मैप से मिटाने की कसमें खाईं और अमेरिका को मिडिल-ईस्ट एशिया से बाहर निकालने का प्रण लिया। यही कट्टर दुश्मनी आखिरकार 28 फरवरी 2026 को ईरान पर भीषण हवाई हमले का कारण बनी।
अमेरिका-इजरायल के साथ ईरान के संघर्ष का लेटेस्ट अपडेट यहां पढ़ें
संपादक की पसंद