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हरियाणा के नूंह में 20% से घटकर 10% रह गए हिंदू? सुप्रीम कोर्ट में डाली गई थी याचिका

 Written By: Gonika Arora
 Published : Jun 28, 2021 11:13 am IST,  Updated : Jun 28, 2021 01:20 pm IST

रंजना अग्निहोत्री ने अपनी याचिका में हरियाणा के नूंह में 'हिन्दुओं की रक्षा' और जबरन धर्मांतरण की जांच के लिए SIT बनाने की भी मांग की थी।

Supreme Court rejects plea on population of hindus in nuh area of haryana हरियाणा के नूंह में 20% से- India TV Hindi
हरियाणा के नूंह में 20% से घटकर 10% रह गए हिंदू? सुप्रीम कोर्ट में डाली गई थी याचिका Image Source : PTI

नई दिल्ली. नूंह में 'हिन्दुओं की रक्षा' के लिए दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है। चीफ जस्टिस एन वी रमना की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस याचिका को रद्द किया। CJI ने कहा कि हम समाचार पत्रों की रिपोर्टों के आधार पर इस याचिका पर विचार नहीं कर सकते हैं।

आपको बता दें कि रंजना अग्निहोत्री ने अपनी याचिका में हरियाणा के नूंह में 'हिन्दुओं की रक्षा' और जबरन धर्मांतरण की जांच के लिए SIT बनाने की भी मांग की थी। उन्होंने अपनी याचिका में कहा है था कि हरियाणा के नूंह में तबलीगी जमात की वजह से मुसलमानों का दबदबा बढ़ा है। इस इलाके में हिंदुओं की जनसंख्या लगातार घट रही है और ये साल 2011 में की हुई जनगणना के अनुसार, 2011 से 20 फीसदी से घटकर 10 फीसदी पर आ चुकी है।

प्रधान न्यायाधीश एन वी रमणा, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय की पीठ ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह से कहा कि क्षमा करें,याचिका खारिज की जाती है। सिंह ने पीठ को बताया कि दो याचिकाकर्ता क्षेत्र में गए थे और उन्होंने 21 वर्षीय निकिता तोमर के परिवार सहित अन्य लोगों से मुलाकात की थी। तोमर की पिछले वर्ष अक्टूबर में वल्लभगढ़ में कॉलेज के अंदर घुस कर हत्या कर दी गई थी।

पीठ ने कहा,"हमें नहीं लगता कि समाचार पत्रों की खबरों पर आधारित इस याचिका पर हमें सुनवाई करनी चाहिए।"

हत्या मामले का एक आरोपी तौसीफ छात्रा पर विवाह का दबाव बना रहा था। इस वर्ष मार्च में हरियाणा के फरीदाबाद की त्वरित अदालत ने तोमर की हत्या के जुर्म में दो लोगों को ताउम्र कैद की सजा सुनाई थी। अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन के माध्यम से दाखिल की गई याचिका में आरोप लगाया गया है कि नूह में हिंदुओं का जीवन, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और धार्मिक अधिकारों का अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों द्वारा ‘‘लगातार उल्लंघन’’ किया जा रहा है, जिनका वहां दबदबा है।

उत्तर प्रदेश के अधिवक्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के समूह द्वारा दाखिल याचिका में दावा किया गया है कि राज्य सरकार, जिला प्रशासन और पुलिस अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करने में नाकाम रहे हैं जिसके कारण हिंदुओं की जिंदगियां और उनकी स्वतंत्रता, खासतौर पर महिलाओं और दलितों की, संकट में हैं और वे वहां दबदबे वाले समूह के भय के साये में जिंदगी’’जीने को मजबूर हैं। याचिका में उच्चतम न्यायालय से एसआईटी के गठन का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। 

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