Saturday, July 13, 2024
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अरुंधति रॉय के खिलाफ UAPA के तहत केस को दिल्ली एलजी की मंजूरी, जानें क्या है आरोप

दिल्ली के एलजी ने दी अरुंधति रॉय और के खिलाफ डॉ. शेख शौकत हुसैन के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है।

Reported By : Bhasker Mishra Edited By : Subhash Kumar Updated on: June 14, 2024 22:28 IST
अरुंधति रॉय के खिलाफ UAPA केस को मंजूरी।- India TV Hindi
Image Source : PTI/ANI अरुंधति रॉय के खिलाफ UAPA केस को मंजूरी।

दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने लेखिका अरुंधति रॉय और कश्मीर सेंट्रल यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल लॉ के पूर्व प्रोफेसर डॉ. शेख शौकत हुसैन के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है।जानकारी के मुताबिक, अरुंधति रॉय और डॉ. शेख शौकत हुसैन ने 21.10.2010 को एलटीजी ऑडिटोरियम, कॉपरनिकस मार्ग, नई दिल्ली में "आज़ादी - द ओनली वे" के बैनर तले आयोजित एक सम्मेलन में कथित तौर पर भड़काऊ भाषण दिए थे। इसके खिलाफ 28.10.2010 को सुशील पंडित की शिकायत पर FIR दर्ज की गई थी। 

कश्मीर को लेकर था भड़काऊ भाषण?

अरुंधति रॉय और शेख शौकत हुसैन ने कथित तौर पर भड़काऊ और भारत विरोधी भाषण दिए थे। सम्मेलन में जिन मुद्दों पर चर्चा की गई, उनमें "कश्मीर को भारत से अलग करने" की बात सबसे महत्वपूर्ण थी। सम्मेलन में भाषण देने वालों में सैयद अली शाह गिलानी, एसएआर गिलानी (सम्मेलन के एंकर और संसद हमले मामले के मुख्य आरोपी), अरुंधति रॉय, डॉ. शेख शौकत हुसैन और माओवादी समर्थक वारा वारा राव शामिल थे।

कश्मीर को अलग करने की बात कही थी

गिलानी और अरुंधति रॉय पर आरोप है कि इन्होंने इस बात का जोर-शोर से प्रचार किया कि कश्मीर कभी भी भारत का हिस्सा नहीं था और उस पर भारत के सशस्त्र बलों ने जबरन कब्जा किया हुआ है। इसमें यहां तक कहा गया कि भारत से जम्मू-कश्मीर की आजादी के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए। शिकायतकर्ता द्वारा इसकी रिकॉर्डिंग भी दी गई है। कोर्ट ने 27.11.2010 को मामले में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश के साथ शिकायत का निपटारा किया। इसके बाद एक एफआईआर दर्ज की गई और इसकी जांच की गई।

अब तक क्या-क्या हुआ?

अरुंधति रॉय और कश्मीर के शेख शौकत हुसैन के खिलाफ धारा 124-ए/153ए/153बी/504 और 505 और 13 यूए (पी) अधिनियम के तहत 29.11.2010 को मामला दर्ज किया गया था। इससे पहले अक्टूबर, 2023 में, उपराज्यपाल ने आईपीसी की धारा 153ए/153बी और 505 के तहत दंडनीय अपराधों के लिए उपरोक्त आरोपियों पर मुकदमा चलाने के लिए सीआरपीसी की धारा 196 के तहत मंजूरी दी थी।

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