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हरियाणा चुनाव में नाकाम होने के बाद मायावती ने लिया बड़ा फैसला, बोलीं- अब क्षेत्रीय दलों से भी नहीं किया जाएगा गठबंधन

 Published : Oct 11, 2024 01:33 pm IST,  Updated : Oct 11, 2024 01:55 pm IST

BSP सुप्रीमो मायावती ने हरियाणा चुनाव की हार से सीख लेते हुए एक बड़ा फैसला किया है। उन्होंने फैसला लिया है कि उनकी पार्टी आगामी चुनावों में किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करेगी।

BSP सुप्रीमो मायावती- India TV Hindi
BSP सुप्रीमो मायावती Image Source : PTI

हरियाणा विधानसभा चुनाव में बीएसपी को एक भी सीट हासिल नहीं हुई। इसके बाद बीएसपी प्रमुख ने एक बड़ा फैसला किया है। बीएसपी प्रमुख ने बताया कि उनकी पार्टी अब किसी भी राज्य में क्षेत्रीय दलों से गठबंधन नहीं करेगी। इसकी जानकारी उन्होंने खुद ट्वीट कर दी है। उन्होंने लिखा कि यूपी समेत दूसरे राज्यों के चुनाव में भी बीएसपी का वोट गठबंधन की पार्टी को ट्रांसफर हो जाने पर उनका वोट बीएसपी को ट्रांसफर कराने की क्षमता उनमें नहीं होने की वजह अपेक्षित चुनाव रिजल्ट नहीं मिलने से पार्टी कैडर को निराशा व उससे होने वाले मूवमेन्ट की हानि को बचाना जरूरी है इसीलिए अब पार्टी क्षेत्रीय पार्टियों से भी आगे गठबंधन नहीं करेगी।

अब किसी के साथ नहीं करेंगी गठबंधन

मायावती ने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा कि यूपी समेत दूसरे प्रदेशों के चुनाव में भी बीएसपी का वोट गठबंधन की पार्टी को ट्रांसफर हुआ पर उनका वोट बीएसपी को ट्रांसफर कराने की क्षमता उनमें नहीं होने की कारण अपेक्षित चुनाव रिजल्ट नहीं मिला, इससे पार्टी कैडर को निराशा व उससे होने वाले मूवमेन्ट की हानि को बचाना जरूरी है। इसी सिलसिले में हरियाणा विधानसभा के चुनाव रिजल्ट व इससे पहले पंजाब चुनाव के कड़वे अनुभव के बाद आज हरियाणा व पंजाब की समीक्षा बैठक में क्षेत्रीय पार्टियों से भी अब आगे गठबंधन नहीं करने का निर्णय, जबकि भाजपा/एनडीए व कांग्रेस/इंडिया गठबंधन से दूरी पहले की तरह ही जारी रहेगी। 

 

नेताओं को बताया स्वार्थी

आगे उन्होंने लिखा कि देश की एकमात्र प्रतिष्ठित अम्बेडकरवादी पार्टी बीएसपी व उसके आत्म-सम्मान व स्वाभिमान मूवमेन्ट के कारवां को हर प्रकार से कमजोर करने की चौतरफा जातिवादी कोशिशें लगातार जारी हैं, जिस क्रम में अपना उद्धार स्वंय करने योग्य व शासक वर्ग बनने की प्रक्रिया पहले की तरह ही जारी रखनी जरूरी है। बीएसपी विभिन्न पार्टियों/संगठनों व उनके स्वार्थी नेताओं को जोड़ने के लिए नहीं, बल्कि बहुजन समाज के लोगों को आपसी भाईचारा व सहयोग के बल पर संगठित होकर राजनीतिक शक्ति बनाने व उनको शासक वर्ग बनाने का आंदोलन है, जिसे अब इधर-उधर में ध्यान भटकाना अति-हानिकारक है। 

इससे पहले जातिवादी लोगों पर किया था प्रहार

इससे पहले उन्होंने जातिवादी लोगों पर हमला बोला था, उन्होंने कहा था कि हरियाणा विधानसभा आम चुनाव बीएसपी व इनेलो ने गठबंधन करके लड़ा लेकिन आज आए परिणाम से स्पष्ट है कि जाट समाज के जातिवादी लोगों ने बीएसपी को वोट नहीं दिया जिससे बीएसपी के उम्मीदवार कुछ सीटों पर थोड़े वोटों के अन्तर से हार गए, हालांकि बीएसपी का पूरा वोट ट्रांसफर हुआ।

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