ओडिशा सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा फैसला लिया है। राज्य कैबिनेट ने 'ज्ञानोदय–शिक्षारु समृद्धि' को मंजूरी दे दी है। इस योजना का उद्देश्य राज्य के हर जरूरतमंद छात्र को आर्थिक परेशानी के कारण पढ़ाई छोड़ने से बचाना है। सरकार का कहना है कि अब राज्य में किंडरगार्टन यानी केजी से लेकर पोस्ट ग्रेजुएशन यानी पीजी तक शिक्षा को पूरी तरह मुफ्त बनाने की दिशा में यह बड़ा कदम है।
सरकार देगी पूरी एडमिशन फीस
नई योजना के तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 से सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों में रेगुलर मोड में पढ़ाई करने वाले पात्र छात्रों की पूरी एडमिशन फीस सरकार देगी। इसमें सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों की कक्षा 9 से 12 तक के छात्र और राज्य के सार्वजनिक विश्वविद्यालयों, सरकारी कॉलेजों तथा सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेजों में नियमित रूप से पढ़ने वाले यूजी और पीजी के छात्र शामिल होंगे।
इस योजना का सबसे बड़ा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पैसों की कमी के कारण कोई भी छात्र अपनी पढ़ाई बीच में न छोड़े। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित परिवारों के छात्रों को इससे सबसे अधिक फायदा मिलेगा। इससे स्कूल और कॉलेजों में दाखिले बढ़ेंगे, ड्रॉपआउट कम होंगे और अधिक छात्र उच्च शिक्षा तक पहुंच सकेंगे।
CM ने बताया क्या होगा फायदा
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा, "यह ओडिशा के लिए एक ऐतिहासिक फैसला है। हमारा राज्य देश का पहला राज्य बन गया है, जहां केजी से पीजी तक सभी योग्य छात्रों के लिए मुफ्त शिक्षा की व्यवस्था की गई है। 'ज्ञानोदय–शिक्षारु समृद्धि' योजना के जरिए लाखों छात्रों को अच्छी शिक्षा का अवसर मिलेगा और आर्थिक तंगी उनकी पढ़ाई में बाधा नहीं बनेगी। हर साल 32 लाख से ज्यादा छात्रों को इसका लाभ मिलेगा। कक्षा 9 से लेकर पीजी तक सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों में पढ़ने वाले नियमित छात्रों की फीस सरकार वहन करेगी। पहले से केजी से कक्षा 8 तक शिक्षा मुफ्त थी, अब इस योजना के साथ हमारा केजी से पीजी तक मुफ्त शिक्षा देने का संकल्प पूरा हो गया है। इससे उच्च शिक्षा में दाखिला बढ़ेगा, युवाओं का कौशल विकास होगा और ओडिशा के विकास के लिए शिक्षित और सक्षम मानव संसाधन तैयार होगा।"
किन्हें मिलेगा लाभ?
हालांकि यह योजना सभी छात्रों पर लागू नहीं होगी। इसका लाभ केवल सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों के नियमित पाठ्यक्रमों में पढ़ने वाले छात्रों को मिलेगा। सेल्फ-फाइनेंसिंग कोर्स, निजी संस्थान, PPP मॉडल के संस्थान और प्रोफेशनल और तकनीकी कोर्स इस योजना के दायरे में शामिल नहीं किए गए हैं।
895.57 करोड़ रुपये खर्च करेगी सरकार
इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए सरकार पहले वर्ष में 895.57 करोड़ रुपये खर्च करेगी। वहीं अगले पांच वर्षों में इस योजना पर कुल 5,467.55 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार का अनुमान है कि इससे हर साल 32 लाख से अधिक छात्रों को सीधा लाभ मिलेगा और उनके परिवारों पर शिक्षा का आर्थिक बोझ काफी कम होगा।
हर बच्चे और युवा को समान अवसर देने की दिशा में एक बड़ा कदम
यह योजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, ओडिशा विजन 2036 और ओडिशा विजन 2047 के लक्ष्यों के अनुरूप तैयार की गई है। सरकार के अनुसार, 'ज्ञानोदय–शिक्षारु समृद्धि' सिर्फ फीस माफ करने की योजना नहीं है, बल्कि यह राज्य के हर बच्चे और युवा को समान अवसर देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसका उद्देश्य आर्थिक स्थिति चाहे जैसी भी हो, हर छात्र को बिना रुकावट अपनी पढ़ाई पूरी करने का मौका देना है और विकसित ओडिशा के सपने को मजबूत करना है।
(ओडिशा से शुभम कुमार की रिपोर्ट)
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