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Captagon Seize: NCB ने पहली बार सीज की 'जिहादी ड्रग', ऑपरेशन RAGEPILL में मिली बड़ी कामयाबी; गृहमंत्री शाह ने भी की तारीफ

 Reported By: Manish Prasad, Edited By: Vinay Trivedi
 Published : May 16, 2026 01:16 pm IST,  Updated : May 16, 2026 01:49 pm IST

NCB ने Operation RAGEPILL के तहत पहली बार ‘कैप्टागॉन’ नामक ड्रग्स की बड़ी खेप को सीज किया है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने इसको लेकर एजेंसी की तारीफ भी की है। इस खबर में जानिए कि इसे जिहादी ड्रग कहे जाने की क्या कहानी है।

ऑपरेशन RAGEPILL हुआ सफल।- India TV Hindi
ऑपरेशन RAGEPILL हुआ सफल। Image Source : REPORTERS INPUT/NCB (X)

Operation RAGEPILL: एनसीबी ने ड्रग्स के खिलाफ ऑपरेशन में बड़ी कामयाबी हासिल की है। केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट के माध्यम से बताया कि ‘ऑपरेशन RAGEPILL’ के अंतर्गत एजेंसी ने पहली बार ‘कैप्टागॉन’ नामक ड्रग्स की बड़ी खेप को सीज किया, जिसकी कीमत लगभग 182 करोड़ रुपये है। जब्त की गई कैप्टागॉन को 'जिहादी ड्रग' के नाम से भी जाना जाता है।

गृहमंत्री शाह ने की NCB की तारीफ

अमित शाह ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, 'मोदी सरकार नशा मुक्त भारत के लिए प्रतिबद्ध है। यह बताते हुए खुशी हो रही है कि Operation RAGEPILL के जरिए हमारी एजेंसियों ने पहली बार तथाकथित जिहादी ड्रग कैप्टागन को जब्त किया, जिसकी कीमत करीब 182 करोड़ रुपये है। मध्य-पूर्व जा रही ड्रग्स की खेप को जब्त करना और एक विदेशी नागरिक की गिरफ्तारी, ड्रग्स के प्रति हमारी शून्य सहिष्णुता की प्रतिबद्धता के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। हम भारत में प्रवेश करने वाले या हमारे क्षेत्र के गुजरने वाले या देश से बाहर जाने वाले हर ग्राम ड्रग्स पर कड़ी कार्रवाई करेंगे। एनसीबी के बहादुर और सतर्क कार्यकर्ताओं को सलाम।'

क्या है Captagon ड्रग?

बता दें कि कैप्टागॉन, वह आम नाम है जो ऐतिहासिक रूप से Fenethylline नामक सिंथेटिक उत्तेजक से जुड़ा रहा है। इसे मूल रूप से 1960 के दशक में Attention Disorders और नार्कोलेप्सी जैसी बीमारी के इलाज के लिए डेवलप किया गया था। हालांकि, इसकी लत लगाने वाली प्रवृत्ति और दुरुपयोग की आशंका की वजह बाद में इस दवा के मूल फार्मास्युटिकल के तौर पर इंटरनेशनल लेवल पर प्रतिबंध लगा दिया गया।

इसे क्यों कहा जाता है जिहादी ड्रग?

यह ड्रग मिडिल ईस्ट और वेस्ट एशिया के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर उपयोग की जाती है। सुरक्षा मामलों की चर्चाओं में अक्सर कैप्टागॉन को अक्सर जिहादी ड्रग कहा जाता है। इसका कारण यह रहा कि वर्षों से ऐसे कई खुफिया इनपुट और आरोप सामने आते रहे हैं जिनमें वेस्ट एशिया के संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में एक्टिव चरमपंथी नेटवर्क और आतंकी गुटों के साथ इसके प्रयोग और तस्करी को जोड़ा गया।

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