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जब संसद की सुरक्षा में लगी थी सेंध, जमानत याचिका पर आज फैसला सुनाएगा दिल्ली हाई कोर्ट, जानिए कौन हैं आरोपी?

Edited By: Dhyanendra Chauhan @dhyanendraj Published : Jul 01, 2025 09:52 pm IST, Updated : Jul 02, 2025 12:01 am IST

दिसंबर 2023 में संसद की सुरक्षा में हुई सेंध मामले की सुनवाई दिल्ली हाई कोर्ट में चल रही है। दिल्ली हाई कोर्ट ने 21 मई को आरोपियों के जमानत याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित लिया था। इस मामले पर अब फैसला आज आने वाला है।

संसद की सुरक्षा में सेंध- India TV Hindi
Image Source : FILE PHOTO संसद की सुरक्षा में सेंध

दिल्ली हाई कोर्ट दिसंबर 2023 में संसद की सुरक्षा में सेंध लगाने के मामले में दो आरोपियों की जमानत याचिका पर बुधवार (2 जुलाई) को फैसला सुनाएगा। न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद और न्यायमूर्ति हरीश वैद्यनाथन शंकर की पीठ ने 21 मई को आरोपियों नीलम आजाद और महेश कुमावत की जमानत याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। आरोपियों ने उनकी जमानत याचिका खारिज करने के निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी थी। 

लोकसभा की दर्शक दीर्घा से कूदे थे आरोपी

साल 2001 संसद आतंकवादी हमले की बरसी पर संसद की सुरक्षा में सेंध की एक बड़ी घटना में आरोपी सागर शर्मा और मनोरंजन डी शून्यकाल के दौरान दर्शक दीर्घा से लोकसभा कक्ष में कथित तौर पर कूद गए थे। इसी दौरान कैनिस्टर से पीली गैस छोड़ने के साथ ही नारेबाजी की थी। बाद में कुछ सांसदों ने उन्हें काबू कर लिया था। 

संसद के अंदर लगाए थे ये नारे

लगभग उसी समय, दो अन्य आरोपियों अमोल शिंदे और आजाद ने संसद परिसर के बाहर "तानाशाही नहीं चलेगी" के नारे लगाते हुए कैनिस्टर से रंगीन गैस छोड़ी थी। आजाद के वकील ने कहा कि उसे जमानत दी जानी चाहिए, क्योंकि इस मामले में यूएपीए के प्रावधान लागू नहीं होते। उसके वकील ने दावा किया कि वह संसद में कोई विस्फोटक लेकर नहीं आई थी और केवल बाहर खड़ी थी। 

संसद हमले की पीड़ादायक यादें

जमानत याचिका का विरोध करते हुए पुलिस ने आरोप लगाया कि आरोपी की मंशा 2001 के संसद हमले की 'पीड़ादायक यादें' दोबारा ताजा करने की थी। अभियोजन पक्ष ने जमानत याचिका का विरोध किया और कहा कि प्रारंभिक जांच के दौरान पता चला कि आरोपी आजाद और शिंदे - शर्मा और मनोरंजन डी के सहयोगी थे। उन्होंने मिलकर इस घटना को अंजाम दिया था। 

13 दिसंबर 2001 को संसद भवन पर हुआ था हमला

अभियोजन पक्ष ने हाई कोर्ट को सूचित किया कि उसने मामले में आरोपियों को गिरफ्तारी के आधार 'विधिवत' बताए गए हैं। अदालत ने सवाल किया था कि क्या मामले में आरोपियों को गिरफ्तारी के आधार बताए गए थे। अदालत ने इससे पहले आरोपियों से 13 दिसंबर की विशिष्ट तिथि चुनने का कारण पूछा था, जिस दिन 2001 में संसद भवन पर हमला हुआ था। 

 'प्रथम दृष्टया' में सही पाए गए आरोप

अदालत ने पुलिस से भी पूछा था कि क्या संसद के अंदर और बाहर धुंए वाले कैनिस्टर को ले जाना या उसका उपयोग करना यूएपीए के अंतर्गत आता है और क्या यह आतंकवादी गतिविधियों की परिभाषा के अंतर्गत आता है। निचली अदालत ने आजाद की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि यह मानने के लिए पर्याप्त सबूत हैं कि उसके खिलाफ लगाए गए आरोप 'प्रथम दृष्टया' सत्य हैं। 

चार आरोपियों को मौके से लिया गया था हिरासत में

अदालत ने कहा था कि सभी आरोपियों आजाद, मनोरंजन डी, सागर शर्मा, अमोल धनराज शिंदे, ललित झा और महेश कुमावत को खालिस्तानी आतंकवादी द्वारा 13 दिसंबर, 2023 को संसद को निशाना बनाने की धमकी के बारे में पहले से ही जानकारी थी। चार आरोपियों को मौके से हिरासत में लिया गया था, जबकि झा और कुमावत को बाद में गिरफ्तार किया गया था। (भाषा के इनपुट के साथ)

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