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केंद्र सरकार ने ग्लोबल हंगर रिपोर्ट को बताया गलत, बोले- यह देश की वास्तविक स्थिति को नहीं दिखाती

Edited By: Shailendra Tiwari @@Shailendra_jour Published : Nov 28, 2024 06:25 pm IST, Updated : Nov 28, 2024 06:25 pm IST

केंद्र सरकार ने लोकसभा में ग्लोबल हंगर रिपोर्ट में दर्शायी गई भारत की स्थिति को गलत बताया है। बता दें कि ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत को पाकिस्तान से स्थान दिया गया था।

प्रतीकात्मक फोटो- India TV Hindi
Image Source : SOCIAL MEDIA प्रतीकात्मक फोटो

हाल ही में ग्लोबल हंगर रिपोर्ट-2024 इंडेक्स में भारत को 105वें स्थान पर रखा गया था। अब केंद्र सरकार ने लोकसभा में इस पर अपना जवाब दिया है। सरकार ने कहा कि ग्लोबल हंगर रिपोर्ट-2024 इंडेक्स में इस्तेमाल की गई भूख की माप "त्रुटिपूर्ण" है और यह भारत की वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाती है। सरकार ने जोर देकर कहा कि वह कुपोषण के मुद्दे को हल करने के लिए गंभीर प्रयास कर रही है।

भारत को दिया था 105वां स्थान

कंसर्न वर्ल्डवाइड, वेल्ट हंगर हिल्फ़ और इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल लॉ ऑफ़ पीस एंड आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट द्वारा जारी किए गए स्टडी में भारत को 127 देशों में से 105वां स्थान दिया गया है।

इन घटकों को इंडेक्स में नहीं लिया जा सकता

जूनियर कंज्यूमर अफेयर, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री निमूबेन जयंतीभाई बांभनिया ने कहा, "ग्लोबल हंगर इंडेक्स 'भूख' के पैमाने को एक त्रुटिपूर्ण माप है और यह भारत की वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाता है। चार घटक संकेतकों में से तीन (स्टंटिंग, वेस्टिंग और बाल मृत्यु दर) बच्चों के स्वास्थ्य से संबंधित हैं और इन्हें जनसंख्या में भूख को दर्शाने के लिए नहीं लिया जा सकता है।"

2023 की तुलना में हुआ सुधार

उन्होंने कहा, "2023 की तुलना में 2024 में भारत की रैंकिंग में सुधार हुआ है, जो मुख्य रूप से इंडीकेटर के चौथे घटक इंडीकेटर, यानी अल्पपोषण की व्यापकता (पीओयू) में सुधार के कारण है।" पिछले साल की ग्लोबल हंगर रिपोर्ट में भारत की रैंकिंग 125 देशों में 111 थी।

कुपोषण की चुनौतियों का समाधान

मंत्री ने कहा, "आंगनवाड़ी सेवाओं और पोषण अभियान के तहत सप्लिमेंटरी न्यूट्रीशन प्रोग्राम के प्रयासों को दोबारा से शुरू किया गया है और 'सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0' के रूप में एकीकृत किया गया है।" उन्होंने कहा, "इसका उद्देश्य पोषण सामग्री और वितरण में रणनीतिक बदलाव के माध्यम से बच्चों, किशोरियों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के बीच कुपोषण की चुनौतियों का समाधान करना है, साथ ही स्वास्थ्य, तंदुरुस्ती और प्रतिरक्षा को बढ़ावा देने वाली प्रथाओं को विकसित करने और बढ़ावा देने के लिए एक एकीकृत पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है।"

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