आज इलेक्शन कमीशन ने उत्तर प्रदेश की वोटर लिस्ट का ड्राफ्ट जारी कर दिया है। इसके मुताबिक यूपी में करीब 2 करोड़ 89 लाख वोटर्स के नाम कट गए हैं। पिछली वोटर लिस्ट में यूपी में 15 करोड़ 44 लाख वोटर्स थे लेकिन SIR के बाद वोटर लिस्ट के नए ड्राफ्ट में 12 करोड़ 55 लाख नाम ही रह गए हैं। कांग्रेस नेता गुरदीप सिंह सप्पल ने यूपी में वोटर लिस्ट के SIR की ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने के बाद मंगलवार को दावा किया कि उनका और उनके परिवार के सदस्यों के नाम SIR से गायब हैं, जबकि उनके पास सारे कागजात हैं तथा 2003 की वोटर लिस्ट में भी उनके नाम थे।
कांग्रेस नेता ने UP SIR पर उठाए सवाल
कांग्रेस वर्किंग कमेटी से जुड़े गुरदीप सिंह सप्पल ने कहा कि उनका नाम सिर्फ इस आधार पर काट दिया गया कि उन्होंने अपना नाम साहिबाबाद विधानसभा क्षेत्र से नोएडा विधानसभा क्षेत्र में स्थानांतरित कराया था। सप्पल ने X पर पोस्ट किया, ‘‘उत्तर प्रदेश की एसआईआर मसौदा सूची प्रकाशित हो गई है। इसमें मेरा और मेरे परिवार का नाम गायब है, जबकि हमारे नाम 2003 की मतदाता सूची में शामिल थे, हमारे नाम पिछले चुनाव की मतदाता सूची में भी शामिल थे और हमारे माता-पिता के नाम भी 2003 की मतदाता सूची में शामिल थे।’’
'सभी जरूरी दस्तावेज हमारे पास'
उनका कहना है, ‘‘हमने निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार ज़रूरी दस्तावेज भी जमा कर दिए थे। हमारे पास पासपोर्ट, जन्म प्रमाणपत्र, आधार, बैंक खाता, प्रॉपर्टी के कागजात, दसवीं के प्रमाणपत्र, सब कुछ है।’’ सप्पल ने कहा, ‘‘मैं तो स्वयं भारत के उपराष्ट्रपति (हामिद अंसारी) के साथ और राज्य सभा सचिवालय में संयुक्त सचिव भी था। साथ ही कांग्रेस की सर्वोच्च समिति (कार्य समिति) का सदस्य हूं। यही नहीं, एसआईआर और अन्य मुद्दों पर निर्वाचन आयोग में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा भी कई बार रहा हूं और ये सब बीएलओ भी जानते हैं। लेकिन फिर भी हमारे नाम मसौदा सूची से कट गए।’’
उन्होंने दावा किया, ‘‘कारण यह है कि हमने अपना घर उत्तर प्रदेश की साहिबाबाद विधान सभा से नोएडा विधान सभा शिफ्ट कर लिया था। हमें बताया गया कि एसआईआर में स्थानांतरित हुए वोटरों का नाम बरकरार रखने का कोई प्रावधान नहीं है।’’
'यही है SIR की सच्चाई'
कांग्रेस नेता के अनुसार, अगर किसी वोटर ने अपना घर किसी नए इलाके में बदल लिया है, तो उसका नाम काट दिया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘मेरे जैसे करोड़ों वास्तविक मतदाता हैं। मैं तो शायद फिर भी नया फॉर्म 6 भर कर अपने नाम जुड़वा लूंगा, लेकिन कितने लोग ऐसा कर पायेंगे? यही है एसआईआर की सच्चाई।’’
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