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गंजेपन से है परेशान, तो करें ये काम और 50 साल की उम्र में भी दिखें जवां

 Reported By: IANS
 Published : Apr 30, 2018 01:03 pm IST,  Updated : Apr 30, 2018 01:03 pm IST

50 वर्ष की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते करीब 50 फीसदी पुरुषों और महिलाओं को बाल की कमी की समस्या का सामना करना पड़ता है, इनमें से ज्यादातर मामलों की वजह आनुवांशिक होती है। पुरुषों में बालों को पहुंचने वाले नुकसान को 'मेल पैटर्न हेयर लॉस' कहते हैं। इससे सिर का अगला और ऊपरी हिस्सा ही प्रभावित होता है।

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हेल्थ डेस्क: 50 वर्ष की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते करीब 50 फीसदी पुरुषों और महिलाओं को बाल की कमी की समस्या का सामना करना पड़ता है, इनमें से ज्यादातर मामलों की वजह आनुवांशिक होती है। पुरुषों में बालों को पहुंचने वाले नुकसान को 'मेल पैटर्न हेयर लॉस' कहते हैं। इससे सिर का अगला और ऊपरी हिस्सा ही प्रभावित होता है।

अपोलो अस्पताल में वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अनूप धीर ने कहा कि बाल प्रत्यारोपण सर्जरी के अंतर्गत सिर के पिछले और अगल बगल के हिस्से से बालों के कोश को स्थानांतरित किया जाता है जहां गंजेपन वाले क्षेत्रों के मुकाबले आनुवांशिक रूप से मजबूत बाल होते हैं।

उन्होंने कहा कि बाल प्रत्यारोपण खोपड़ी में आपके बाल की कुल संख्या को नहीं बढ़ाता है, क्योंकि यहां हम सिर के पिछले हिस्से से बाल का वितरण इस तरह से करते हैं ताकि गंजेपन वाले हिस्से में भी पर्याप्त मात्रा में बाल अच्छे से दिखाई दें और जिस जगह से बाल लिया गया है, वह भी खराब न दिखाई दे।

डॉ. धीर ने कहा, "हम इसमें स्थायी बाल की जड़ों का इस्तेमाल करते हैं और उन्हें उन जगहों पर रोपते हैं। इसके लिए एफयूटी और एफयूई, दो विधियों का प्रयोग किया जा सकता है।"

उन्होंने कहा कि एफयूटी हेयर प्रत्यारोपण या स्ट्रिप विधि पुराना तरीका है जिसमें सिर के पिछले हिस्से से बाल वाली त्वचा के एक बारीक अंश को निकालकर ऐसे हिस्से में इस्तेमाल किया जाता है जहां बहुत कम बाल या ना के बराबर बाल होते हैं। एक छुरी की मदद से त्वचा के हिस्से को हटाने के बाद सर्जन सिर की त्वचा को बंद कर देते हैं। इस क्षेत्र को तत्काल ही आसपास के बालों से ढक दिया जाता है।

डॉ. धीर ने कहा कि अगले चरण में निकाली गई त्वचा के अंश को विभिन्न छोटे हिस्सों में विभाजित किया जाता है, जिसमें से प्रत्येक में एक या कुछ बाल होते हैं। इस्तेमाल किए गए अंशों की संख्या और बालों के प्रकार, गुणवत्ता एवं रंग के साथ उस जगह के आकार पर भी निर्भर करता है जहां इसे प्रत्यारोपित किया जाना है।

उन्होंने कहा कि इसके बाद सर्जन उस क्षेत्र को साफ करते हैं और सुन्न करते हैं जहां बाल को प्रत्यारोपित किया जाएगा, एक सुई या छुरी के साथ छेद बनाए जाते हैं और प्रत्येक छिद्र में बहुत ही सावधानी से प्रत्येक बाल को प्रत्यारोपित किया जाता है।

डॉ. धीर ने बताया कि एफयूई या फालिक्यूलर यूनिट एक्सट्रैक्शन या रूट एक्सट्रैक्शन सबसे कम नुकसानदायक बाल प्रत्यारोपण तकनीक है, जिसमें फालिक्यूलर यूनिट ग्राफ्ट (हेयर फालिसल्स) को एक-एक कर मरीज के उस क्षेत्र से निकाला जाता है और इसके बाद एक-एक कर कम बाल वाली जगहों पर प्रत्यारोपित किया जाता है।

उन्होंने कहा कि इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि जिस जगह से बाल निकाले जाते हैं वहां न के बराबर दाग धब्बे या निशान देखने को मिलते हैं। कोई निशान नहीं होता, इसलिए टांकों की भी जरूरत नहीं होती है, इसलिए जिस जगह से बाल निकाले जाते हैं वह कुछ ही दिनों के भीतर सामान्य हो जाती है और यह तकनीक उन लोगों के लिए लाभदायक है जो अपने बालों को छोटा रखना चाहते हैं।

बाल प्रत्यारोपण के बाद आपको कुछ दिनों तक दर्द की दवाएं और एंटीबायोटिक लेनी पड़ सकती है। आपका सर्जन एक या दो दिनों के लिए आपको सिर पर पहनने के लिए एक सर्जिकल ड्रेसिंग देगा। ज्यादातर लोग सर्जरी के दो से पांच दिनों के भीतर ही काम पर लौट जाते हैं। बाल प्रत्यारोपण के नतीजे सामान्य तौर पर संतोषजनक ही रहते हैं। कई बार अगर आपके बाल गिरते रहते हैं या फिर आपको मोटे बाल चाहिए होते हैं तो आपको कुछ अतिरिक्त सत्र लेने पड़ते हैं।

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