हेल्थ डेस्क: पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को थायरॉयड की समस्या ज्यादा होती है। यह महिलाओं को 80 प्रतिशत ज्यादा होती है। जिसके कारण मेटाबॉलिज्म की दर धीमी पड़ जाती है। जिसके कारण शरीर में फैट जमा हो जाता है। इसका पेशेंट के हार्ट, मसल्स, हड्डियों पर भी बुरा असर पड़ता है और कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम होने लगती हैं। जानिए इसके लक्षण, कारण और कैसे करें बचाव।
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लक्षण
शुरुआती दौर में इस बीमारी के लक्षण सामने नहीं आते। समय बीतने के बाद धीरे-धीरे जब बीमारी बढ़ती है, तो इसके लक्षणों का दिखना शुरू होता है।
- मरीज को कमजोरी
- थकान
- वजन बढ़ना
- बेचैनी
- बाल झड़ना
- पेशियों की क्षमता में कमी
- पुरुषों में इरेक्टाईल डिस्फंक्शन
- यौनेच्छा में कमी महसूस होना
- हाथ-पैर ठंडा रहना।
- डिप्रेशन
- शारीरिक और मानसिक विकार
कारण
- अधिक तनाव लेने से भी थाराइड ग्रंथि पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
- प्रेग्नेंसी के समय शरीर में हार्मोन में बदलाव
- प्रोटीन पाउडर, सप्लीमेंट्स या कैप्सूल के रूप में सोया के प्रोडक्ट्स के अधिक सेवन
- प्रदूषण से हवा में मौजूद जहरीले कण थाइरोइड ग्रंथि को भी नुकसान करते है।
- दवाओं के साइड इफेक्ट के कारण
- भोजन में आयोडीन कम या ज्यादा यूज
- परिवार में अगर किसी को थाइरोइड हो तो दूसरे सदस्यों को भी थाइरोइड होने की संभावना बढ़ जाती है।
ऐसे करें बचाव
- तनाव से दूर रहना,
- स्वस्थ व सक्रिय जीवनशैली
- तला-भुना चीजों का करें कम सेवन
- ज्यादा मीठी चीजें खाने से बचे।
- ज्यादा कॉफी पीने से इसमें मौजूद एपिनेफ्रीन और नोरेपिनेफ्रीन थायरॉइड को बढ़ावा देते हैं।
- अधिक से अधिक एक्सरसाइज करें।