देशभर में 16 अप्रैल 2021 को विनायक चतुर्थी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से उपासक को सभी समस्याओं से छुटकारा मिलता है। हिन्दू कैलेंडर के मुताबिक हर मास की चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी या संकष्टी चतुर्थी होती है। शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी और कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं। इस दिन रवि योग में गणेश जी की विधि-विधान से पूजा होती है। आईए जानते हैं गणेश चतुर्थी पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और महत्व के बारे में।
ब्रह्म मुहूर्त- 17 अप्रैल को सुबह 04:14 से 04:59 बजे तक
अभिजित मुहूर्त- 11:43 सुबह से दोपहर बाद 12:34 तक
विजय मुहूर्त- दोपहर बाद 02:17 बजे से शाम 03:08 तक
गोधूलि मुहूर्त- शाम 06:20 बजे से शाम 06:44 बजे तक
विनायक चतुर्थी के दिन उपासक सुबह उठकर स्नानादि करके लाला रंग का साफ सुथरा कपड़ा पहनें। उसके बाद गणेश भगवान की प्रतिमा के सामने धूप दीप प्रज्वलित करके घी दूर्बा, रोली अक्षत चढ़ाएं। उसके बाद भगवान गणेश को भोग लगाएं। शाम को व्रत कथा पढ़कर चंद्रदर्शन करने के बाद व्रत को खोलें।
विनायक चतुर्थी के दिन भगवान गणपति की पूजा करने से वे प्रसन्न होते हैं। भक्तों के कार्यों में आने वाले संकटों को दूर करते हैं। उनकी कृपा से व्यक्ति के कार्य बिना विघ्न बाधा के पूर्ण होते हैं। वे शुभता के प्रतीक हैं और प्रथम पूज्य भी हैं, इसलिए कोई भी कार्य करने से पूर्व श्री गणेश जी की पूजा की जाती है।
16 अप्रैल को सुबह 05 बजकर 55 मिनट से रात 11 बजकर 40 मिनट तक रवि योग बन रहा है। ऐसे में विनायक चतुर्थी की पूजा रवि योग में होगी।
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