राहु को शांत कर भाग्य चमकाने में मदद करती है अष्टधातु, लेकिन ये लोग न करें धारण
राहु को शांत कर भाग्य चमकाने में मदद करती है अष्टधातु, लेकिन ये लोग न करें धारण
Edited by: Shivani Singh@lastshivani
Published : Feb 04, 2022 06:09 pm IST,
Updated : Feb 04, 2022 06:21 pm IST
आठ धातुओं से मिलकर बनी अष्टधातु का ज्योतिष शास्त्र में बहुत अधिक महत्व है। जानिए अष्टधातु पहनने के फायदे और नुकसान
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Ashtadhatu advantages and disadvantages
Highlights
अष्टधातु पहनने से राहु के अशुभ प्रभाव कम होते हैं
जानिए अष्टधातु पहनने से होने वाले फायदे
हिंदू धर्म में अष्टधातु यानी सभी धातुओं को मिलाकर बनी धातु का बहुत अधिक महत्व है। आमतौर पर अष्टधातु का इस्तेमाल हिंदू और जैन धर्म में मूर्तियों के निर्माण में प्रयोग किया जाता है। क्योंकि यह धातु काफी शुभ मानी जाती है। वहीं ज्योतिष शास्त्र की बात करें तो अगर कुंडली में राहु की दशा काफी खराब है तो अष्टधातु पहनने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा इस धातु से बनीं अंगूठी या कड़ा पहनने से नवग्रह संतुलित रहते हैं।
अष्टधातु आठ तरह की धातुओं से मिलकर बनती हैं जो सोना, चांदी, तांबा, सीसा, जस्ता, टिन, लोहा और पारा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हर धातु में अपनी एक ऊर्जा होती है। अगर इन धातुओं को सही समय पर ग्रहों की स्थिति देखकर धारण किया जाए तो लाभकारी माना जाता है। जानिए किन लोगों को अष्टधातु पहनना चाहिए और किन लोगों को नहीं।
अगर जन्मपत्रिका में राहु अशुभ स्थिति में हो तो आपके लिए कष्टदायक हो सकता है। राहु के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए दाएं हाथ में अष्टधातु से मिलकर बना कड़ा धारण कर लें। इससे आपको राहत मिल सकती हैं।
अगर व्यापार में फायदा और नौकरी में तरक्की चाहते हैं तो अष्टधातु से बनी अंगूठी या फिर लॉकेट धारण करना लाभकारी हो सकता है।
किसी भी चीज का निर्णय लेने में कठिनाई होती है तो अष्टधातु का कड़ा या अंगूठी धारण कर सकते हैं। इससे दिमाग स्थिर रहने के साथ ही एकाग्रता बढ़ेगी।
मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं तो अष्टधातु से बनी अंगूठी या कड़ा पहन सकते हैं।
सभी ग्रहों के दुष्प्रभाव से बचने के लिए ज्योतिषी से पूछकर अष्टधातु धारण कर सकते हैं। इससे आपको नौ ग्रहों से होने वाली पीड़ा को शांत करने में मदद मिलेगा।
अगर किस्मत को चमकाना चाहते हैं तो शुभ मुहूर्त में अष्टधातु की अंगूठी धारण कर सकते हैं।
अष्टधातु में लोहे का इस्तेमाल किया जाता है जिसके स्वामी शनि माने जाते है। इसलिए ज्योतिष से पूछकर ही अष्टधातु को धारण करें। क्योंकि इसमें चंद्रमा की धातु चांदी भी होती है। दोनों ग्रह मिलकर जातक को अशुभ असर दिखा सकते हैं।
अष्टधातु में सोना, तांबा, चांदी, पीतल के क्रमश: स्वामी गुरु, मंगल, चंद्रमा और सूर्य है। इसलिए ज्योतिष से पूछकर ही पहनें क्योंकि सूर्य और गुरु बुरे फल दे सकते हैं।
अगर आपका स्वभाव राहु वाला है तो इस धातु को धारण न करें। इससे स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ने के साथ जीवन में कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। आप चाहे तो जन्मपत्रिका को दिखाकर इस धातु को पहन सकते हैं।
डिस्क्लेमर- ये आर्टिकल जन सामान्य सूचनाओं पर आधारित है। इंडिया टीवी इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता। इसलिए इस धातु को धारण करने से पहले ज्योतिष या रत्नों की विशेषता जानने वाले एक्सपर्ट से जरूर सलाह लें।