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कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए MP में अब सिर्फ मेडिकल के लिए ही इस्तेमाल होगी ऑक्सीजन, प्रशासन ने आदेश जारी किए

मध्यप्रदेश में कोरोना संक्रमित मरीज अब दो मोर्चों पर जंग लड़ रहे है। पहला कोरोना संक्रमण और दूसरा सांसें चलते रहने के लिए आक्सीजन‌।

Anurag Amitabh Anurag Amitabh @anuragamitabh
Published on: April 08, 2021 17:09 IST
कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए एमपी में अब सिर्फ मेडिकल के लिए ही इस्तेमाल होगी ऑक्सीजन- India TV Hindi
Image Source : PTI कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए एमपी में अब सिर्फ मेडिकल के लिए ही इस्तेमाल होगी ऑक्सीजन

भोपाल: मध्यप्रदेश में कोरोना संक्रमित मरीज अब दो मोर्चों पर जंग लड़ रहे है। पहला कोरोना संक्रमण और दूसरा सांसें चलते रहने के लिए आक्सीजन‌। आक्सीजन के संकट में शिवराज सरकार केंद्र से लेकर गुजरात सरकार से आक्सीजन की दरकार कर रही है तो दूसरी तरफ आक्सीजन के व्यवसायिक इस्तेमाल पर पाबंदी लगाते हुए सिर्फ अस्पतालों में सप्लाई करने का फरमान जारी कर दिया है। इसके लिए बकायदा अब अफसरों ने मानीटिरिंग भी शुरू हो गईं है।‌

एक तरफ एमपी में बेकाबू कोरोना और दूसरी तरफ कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए जीवनदायिनी बनी आक्सीजन की कमी के संकट में ना सिर्फ कोविड मरीजों की बल्कि सरकार की सांस भी फूलने लगी हैं। महाराष्ट्र और गुजरात से अब तक जो आक्सीजन एमपी में सप्लाई हो रही थी वो अब बढ़ती डिमांड के साथ कमी में तब्दील होती जा रही है। यही वजह है कि कोरोना के रोजाना के रिकार्ड तोड़ आंकड़ों के बीच अब कोविड केयर अस्पतालों में आक्सीजन से सांसे ले रहे कोविड मरीजों की सांसों पर संकट आ गया है।भोपाल के डेडिकेटेड कोविड सेंटर सीएमएच अस्पताल में 10 पेशेंट के लिए 60 सिलेंडर ऑक्सीजन को जरूरत है लेकिन सप्लाई सिर्फ दस की है।

डॉ फ़ज़ल पर रहमान, संचालक, सीएमएच कोविड सेंटर ने बताया कि हमारे पास 10 कोविड के पेशेंट है जिनमें से आठ पेशेंट बहुत ज्यादा देखभाल की रिक्वायरमेंट है जितनी रिक्वायरमेंट है उसके साथ से हमें सप्लाई नहीं मिल पा रही है हम बहुत ज्यादा परेशान रहे हैं। बहुत मुश्किल से सिलेंडर अरेंज किए गए हमारे स्टॉक में 10 सिलेंडर जो 30 से 4 घंटे में खत्म हो जाएंगे जबकि रिक्वायरमेंट 60 की है। भोपाल के सीएमएच कोविड केयर अस्पताल में कोविड मरीज के परिजन भी आक्सीजन की कमी से डरें हुए है। अभिजीत मकोडिया, कोविड मरीज के परिजन ने बताया कि मेरे ससुर साहब भर्ती हैं और सीएम की बहुत जरूरत पड़ रही है कल रात में बहुत दिक्कत हुई इसके बाद अस्पताल वालों ने बाहर से ऑक्सीजन बुलवाया बहुत सारे जो लोग भर्तियों सभी को ऑक्सीजन की जरूरत है।

अस्पतालों में आक्सीजन की कमी के चलते अब सरकार ने आक्सीजन सप्लायर्स को फरमान जारी कर आक्सीजन के व्यवसायिक इस्तेमाल पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है। अब से आक्सीजन सप्लायर्स आक्सीजन को सिर्फ अस्पतालों के लिए दे रहे हैं और इस पर भी बकायदा निगरानी का जिम्मा पुलिस प्रशासन ने संभाल लिया है। भोपाल के तमाम अस्पतालों में करीब 60 फीसदी आक्सीजन की सप्लाई कर रहे गोविंदपुरा इंडस्ट्रीयल एरिया में मौजूद आईनाक्स एयर प्रोडक्ट प्लांट में आक्सीजन के लिए आने जाने वाले सिलेंडरो और गाड़ियों की अब प्रशासन के अफ़सर मॉनिटरिंग कर एंट्री कर रहे हैं ये देखने के लिए कि आक्सीजन सिर्फ और सिर्फ अस्पतालों में ही जानी चाहिए और इसकी कलाबाजी ना हो। 

आक्सीजन सप्लायर मान रहे हैं कि गुजरात और महाराष्ट्र और नोएडा से अब तक आक्सीजन आ रही थी, जिसकी अब मांग के अनुसार पूर्ति नहीं हो पा रही है। अब से सिर्फ अस्पतालों को ही आक्सीजन भेजी जा रही है। लेकिन अगर केसेस बढ़ते हैं और आक्सीजन की पूर्ति नहीं हो पाती तो हालात बिगड़ सकते हैं। जगजीत सिंह, एडमिनिस्ट्रेटर, आईनाक्स एयर प्रोडक्ट, भोपाल  ने कहा कि कमी तो हो गई है जितने अस्पताल से उन सब जगह डिमांड बढ़ गई है सप्लाई उतना ही थी सप्लाई में कोई कमी नहीं थी सप्लाई निरंतर जारी है लेकिन जिसे आप से डिमांड बढ़ी है हम दूसरी जगह से भी इंतजाम कर दिए हैं गुजरात से सप्लाई बंद हो गई है महाराष्ट्र की और मोदीनगर प्लांट से हमने ऑक्सीजन बुलाना शुरू कर दिया है लेकिन आने में आप पहुंचने में 2 दिन का टाइम जरूर लगता है,एकदम से बेहद ज्यादा बढ़ गई है जहां पहले 10 सिलेंडर लग रहे थे आप वहां पर 30 से 50 लगने तक लगने लगे, गुजरात महाराष्ट्रं से माल आता हूं। 

  • आक्सीजन संकट से पहले भोपाल में ही 4 हजार सिलेंडर की खपत होती थी, जो अब बढ़कर 7 हजार हो गई है।
  • इसी तरह एक दिन में 50 हजार क्यूबिक मीटर सप्लाई हो रही है जिसमें 40 हजार क्यूबिक मीटर अस्पतालों के प्लांट और 10 हजार क्यूबिक मीटर सिलेंडर से की जा रही है। 
  • सामान्य तौर पर भोपाल में अस्पतालों में 890 लीटर प्रति मिनट आक्सीजन का जरूरत पड़ती थी जो अब कोरोना मरीजों के भर्ती होने के बाद बढ़कर 2200 से 2300 लीटर प्रति मिनट हो गई है। 
  • कोरोना के गंभीर मरीजों के लिए कई बार 40 से 60 लीटर प्रति मिनट की रफ्तार से आक्सीजन देनी पड़ती है, जबकि सामान्य मरीजों को 10 लीटर प्रति मिनट की।

आपको बता दें कि तेजी से बढ़ते संक्रमण के कारण ऑक्सीजन की कमी सामने आई है लेकिन सवाल सरकार के सामने भी है कि जब मार्च से ही मामले लगातार बढ़ रहे थे तब सरकार ने ऑक्सीजन की अग्रिम व्यवस्था क्यों नहीं की

मध्य प्रदेश के कोरोना वायरस आंकड़े

  • 7 मार्च को एमपी में 24घंटे में कोरोना संक्रमित मरीज की संख्या 429।
  • 7 अप्रेल को एमपी में 24 घंटे में कोरोना संक्रमित मरीज की संख्या 4043।
  • एक महीने में एक्टिव केस बढ़े 7 गुना।
  • 7 दिनों में सामने आए बीए हजार से ज्यादा संक्रमित मरीज।
  • भोपाल के 51 अस्पतालों में 3012 आक्सीजन बेड पर 1256 मरीज भर्ती हैं।
  • इसमें 103 मरीज वेंटिलेटर पर हैं।
  •  इसमें ICU -HDU के 1161 में से 679 भरे हुए हैं।

ऑक्सीजन के चलते बदहाली का यह हाल सिर्फ राजधानी भोपाल में ही नही प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी दिखाई दे रहा है। उज्जैन खरगोन समेत सागर में भी ऑक्सीजन की कमी देखी गई जिसके चलते प्रशासन परेशान रहा। सागर सागर की बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में सूत्रों की माने जंबो सिलेंडर से सेंट्रल लाइन में सप्लाई हो रही थी जिसके चलते ऑक्सीजन प्रेशर कम हुआ तो दूसरे नॉन कोविड-19 की सप्लाई कोविड-19 वार्ड के पेशेंट को दी गई। तस्वीरों में जम्बो ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ एनआईसीयू में भर्ती नवजात बच्चों की दूसरे वार्ड में शिफ्ट करते देखा गया।हालांकि बीएमसी केडी डॉ आर एस वर्मा मानते हैं ऑक्सीजन की कमी नहीं थी।

आक्सीजन के संकट के चलते सीएम शिवराज केंद्र सरकार और गुजरात सरकार से बात कर चुके हैं, अब केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से बात कर अब आक्सीजन की सप्लाई होने लगेगी। फिलहाल भिलाई से अतिरिक्त आक्सीजन मिलना शुरू हो गई है। बहरहाल बीते साल भी कोरोना के शुरुआती दौर में एमपी में आक्सीजन का अकाल पड़ गया था तब जैसे तैसे स्थिति कंट्रोल में हुई लेकिन इस दफा कोरोना डबल पावर के साथ एमपी में  एक्टिव केस एक महीने में ही 7 गुना बढ़ गए हैं जाहिर है ऐसे में भर्ती कोविड मरीजों की जान आक्सीजन पर ही टिकी है और अगर आक्सीजन की सप्लाई कोविड मरीजों की रोजाना की संख्या के हिसाब से नहीं हुई तो हालात क्या होंगे इसका अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

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