Wednesday, March 11, 2026
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मुंबई में महिला कर्मचारियों के लिए ‘कम अर्ली–गो अर्ली’ सुविधा का ऐलान, जानें क्या होगी इसकी खासियत

Edited By: Subhash Kumar @ImSubhashojha Published : Mar 11, 2026 06:30 am IST, Updated : Mar 11, 2026 06:30 am IST

महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार ने विधान परिषद में घोषणा की है कि मुंबई महानगर क्षेत्र में महिला सरकारी कर्मचारियों को ‘कम अर्ली–गो अर्ली’ सुविधा मिलेगी। उन्होंने महिलाओं के सम्मान, अवसर और सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले समाज के निर्माण का संकल्प दोहराया है।

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Image Source : PTI सुनेत्रा पवार ने महिलाओं को दिया बड़ा तोहफा।

उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार ने मंगलवार को मुंबई महानगर क्षेत्र में कार्यरत महिला सरकारी कर्मचारियों के लिए “कम अर्ली–गो अर्ली” सुविधा देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है और ऐसा समाज बनाने के संकल्प को और मजबूत करना जरूरी है, जहाँ महिलाओं को सम्मान, समान अवसर और सुरक्षा सुनिश्चित हो। बता दें कि सुनेत्रा पवार अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर विधान परिषद में हुई विशेष चर्चा का उत्तर दे रही थीं।

उन्होंने बताया कि “कम अर्ली–गो अर्ली” व्यवस्था के तहत मुंबई महानगर क्षेत्र की महिला कर्मचारी सुबह 9:15 से 9:45 बजे के बीच कार्यालय में पहले आकर काम शुरू कर सकेंगी। जितने मिनट वे पहले काम शुरू करेंगी, उतने ही मिनट उन्हें शाम को कार्यालय से पहले निकलने की अनुमति दी जाएगी। इस प्रकार उन्हें अधिकतम 30 मिनट तक की छूट मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से पीक आवर के दौरान महिलाओं को होने वाली यात्रा संबंधी असुविधा कम होगी और उन्हें काफी राहत मिलेगी।

विधान परिषद में चर्चा में भाग लेने वाले सभी सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए सुनेत्रा पवार ने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए हैं। सरकार इन सभी सुझावों पर सकारात्मक रूप से विचार कर आवश्यक कदम उठाएगी। महिलाओं की सुरक्षा के संबंध में उन्होंने बताया कि लापता बच्चों को खोजने के लिए चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन मुस्कान’ अभियान के तहत जुलाई 2015 से फरवरी 2026 के बीच 14 अभियान चलाए गए, जिनके माध्यम से राज्यभर में 42,594 बच्चों का पता लगाया गया। इसके अलावा ‘ऑपरेशन शोध’ अभियान के माध्यम से 5,066 महिलाओं और 2,771 बच्चों को खोजा गया है। उन्होंने बताया कि राज्य के सभी जिलों में ‘मिसिंग सेल’ कार्यरत हैं, जबकि महिलाओं से जुड़े मामलों के समाधान के लिए 51 ‘भरोसा सेल’ स्थापित किए गए हैं।

महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने लाडकी बहिन, नमो महिला सशक्तिकरण, लेक लाडकी, अन्नपूर्णा और लखपति दीदी जैसी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए उमेद मॉल, उमेद मार्ट और महालक्ष्मी सरस जैसे उपक्रम चलाए जा रहे हैं तथा इन उत्पादों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध कराया गया है।

आंगनवाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं के मानदेय तथा बुनियादी सुविधाओं के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सरकार इस विषय में सकारात्मक दृष्टिकोण रखती है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य के 17,254 आंगनवाड़ी केंद्रों में पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। महिलाओं की सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ाया जा रहा है। इस दिशा में छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, चर्चगेट रेलवे स्टेशन और बोरीवली रेलवे स्टेशन पर साइबर अपराधों को रोकने के लिए विशेष व्यवस्था स्थापित की गई है।

उन्होंने बताया कि महिला सरकारी कर्मचारियों के लिए 180 दिनों की मातृत्व अवकाश की मंजूरी दी गई है। इसके बाद आवश्यकता होने पर महिलाएं बिना मेडिकल सर्टिफिकेट के अधिकतम एक वर्ष तक आधे वेतन पर अवकाश भी ले सकती हैं। राज्य में चौथी महिला नीति लागू की गई है और इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है।

ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए ‘आदिशक्ति अभियान’ चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य बाल विवाह को रोकना, अत्याचारमुक्त गांव बनाना और लड़कियों के स्कूल छोड़ने की दर कम करना है। सुनेत्रा पवार ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, स्वयं सहायता समूहों को मजबूत करने, महिला किसानों और कामगारों के लिए विशेष उपायों तथा महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दे रही है।

उन्होंने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए जिजाबाई, सावित्रीबाई फुले, अहिल्याबाई होलकर और महारानी ताराबाई के कार्यों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि महिलाओं का सशक्तिकरण केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और मानसिक सशक्तिकरण भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

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