मुंबई: महाराष्ट्र के नगर निगम चुनावों में राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का प्रदर्शन बहुत खराब रहा है। जनता ने एक बार फिर राज ठाकरे को पूरी तरह नकार दिया है। 10 से ज्यादा नगर निगमों में पार्टी का खाता तक नहीं खुल सका। वहीं, असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन यानी कि AIMIM ने शानदार प्रदर्शन किया और राज ठाकरे की पार्टी से काफी आगे निकल गई। चुनावों में MNS को BMC में सिर्फ 6 सीटें मिलीं, ठाणे, नवी मुंबई और नासिक में पार्टी ने 1-1 सीट जीती, जबकि कल्याण में 5 सीटों पर सिमट गई।
Related Stories
10 से ज्यादा नगर निगमों में नहीं खुला खाता
10 से ज्यादा नगर निगमों में MNS को एक भी सीट नहीं मिली। इनमें पुणे, पिंपरी-चिंचवड़, पनवेल, वसई-विरार, उल्हास नगर, भिवंडी, नागपुर, सोलापुर, चंद्रपुर और जलगांव जैसे बड़े शहर शामिल हैं। 20 साल बाद राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने चुनाव से ठीक पहले हाथ मिलाया था, लेकिन राज ठाकरे को इसका कोई फायदा नहीं मिला। पार्टी का प्रदर्शन पहले से भी बदतर रहा। महाराष्ट्र के नगर निगम चुनावों ने बता दिया है कि राज ठाकरे की सियासी ताकत नहीं बची है और तमाम छोटी पार्टियां जनाधार के मामले में उनसे काफी आगे निकल गई हैं।

AIMIM ने कई बड़ी पार्टियों को छोड़ा पीछे
महाराष्ट्र में ओवैसी की पार्टी AIMIM ने राज ठाकरे की MNS समेत कई बड़े दलों को काफी पीछे छोड़ दिया। जहां MNS 10 से ज्यादा नगर निगमों में खाता तक नहीं खोल पाई, वहीं AIMIM ने 13 नगर निगमों में अच्छी-खासी सीटें हासिल कीं। मुंबई BMC में AIMIM ने 8 सीटें जीतीं, जबकि MNS सिर्फ 6 पर सिमट गई। ठाणे में भी AIMIM ने 5 सीटें हासिल कीं, लेकिन MNS को सिर्फ 1 सीट मिली। ओवैसी की पार्टी ने पूरे महाराष्ट्र में प्रदर्शन के मामले में शरद पवार की एनसीपी को भी पीछे छोड़ा है। AIMIM ने महाराष्ट्र में 125 से ज्यादा सीटें हासिल की हैं, जबकि शरद पवार की एनसीपी के खाते में महज 36 सीटें दर्ज हैं।
राज ठाकरे और MNS का सियासी भविष्य
ये नतीजे राज ठाकरे और उनकी पार्टी MNS के लिए बड़ा झटका हैं। महाराष्ट्र में MNS की सियासी जमीन लगातार सिकुड़ती जा रही है। जनता ने एक बार फिर राज ठाकरे को नकार दिया, जो दिखाता है कि उनकी क्षेत्रीय और मराठी अस्मिता वाली राजनीति अब पहले जैसी अपील नहीं कर रही। उद्धव ठाकरे से गठबंधन का भी कोई फायदा नहीं मिला, जो बताता है कि परिवारिक सुलह भी वोटरों को प्रभावित नहीं कर सकी। MNS का 10 से ज्यादा शहरों में खाता न खुलना पार्टी की कमजोरी को उजागर करता है। भविष्य में राज ठाकरे को अपनी रणनीति बदलनी होगी, वरना पार्टी का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।
महाराष्ट्र की सियासत में इन नतीजों का मतलब
ये चुनाव महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत दे रहे हैं। AIMIM का उभार दिखाता है कि मुस्लिम वोट बैंक अब मजबूत हो रहा है, खासकर शहरों में जहां ओवैसी की पार्टी ने धमाकेदार जीत दर्ज की। 13 नगर निगमों में AIMIM का खाता खुलने से साफ है कि ये 'सेक्युलर' राजनीति करने की बात कहने वाली पार्टियों के लिए चुनौती बन गई है। वहीं, MNS जैसी क्षेत्रीय पार्टियां संघर्ष कर रही हैं, और ऐसा होने से नए समीकरण बनते जा रहे हैं। ये नतीजे बताते हैं कि वोटर अब सिर्फ भावनाओं के उबाल में वोट नहीं दे रहे। कुल मिलाकर, महाराष्ट्र में राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं, और आने वाले दिनों में यहां सियासी तस्वीर में काफी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।