मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में आज बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) छोड़कर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने के महज 24 घंटे के भीतर सचिन अहीर महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति निर्विरोध निर्वाचित हो गए।
शुरुआत में शिवसेना (यूबीटी) ने जगन्नाथ अभ्यंकर को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन सदन की परंपरा का हवाला देते हुए सरकार ने चुनाव निर्विरोध कराने की अपील की। इसके बाद विपक्ष ने अपना नामांकन वापस ले लिया और सचिन अहीर सर्वसम्मति से उपसभापति चुने गए।
वैसे भी विधान परिषद में महायुति के पास स्पष्ट बहुमत था, जबकि महाविकास आघाड़ी के पास संख्या बल काफी कम था। सचिन अहीर के निर्विरोध चुने जाने के बाद राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई।
शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने साधा निशाना
शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि क्या वे उन लोगों के साथ बैठना स्वीकार करते हैं जिन पर राम मंदिर और महाकाल कॉरिडोर जैसे मामलों में भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं।
कांग्रेस नेता नाना पटोले का भी सामने आया बयान
कांग्रेस नेता नाना पटोले ने भी भाजपा पर विपक्षी दलों को तोड़ने और दबाव की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि “मोदी है तो मुमकिन है” और भाजपा विपक्ष के विधायकों और सांसदों को अपनी ओर खींचने का काम कर रही है। कुछ भी किया जा सकता है।
नाना पटोले ने कहा कि ये लोग भ्रष्टाचार और तोड़फोड़ की राजनीति करके किसी को भी कोई भी पद दिला सकते हैं। शुरू से ही यही इनकी नीति रही है और उसी पर ये काम कर रहे हैं।
महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता नाना पटोले ने एनसीपी के कांग्रेस में विलय की अटकलों को पूरी तरह खारिज किया। उन्होंने कहा कि ऐसी खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। पटोले ने आरोप लगाया कि इस तरह की खबरें बीजेपी और सत्ता पक्ष के लोग जानबूझकर फैला रहे हैं, ताकि जनता का ध्यान असली मुद्दों और उनकी तोड़फोड़ की राजनीति से भटकाया जा सके।
मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील ने पलटवार किया
वहीं भाजपा की ओर से मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील ने पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा पर आरोप लगाने वाले कई नेता अंततः भाजपा में ही शामिल हो जाते हैं और लोग विकास की राजनीति के कारण पार्टी का रुख कर रहे हैं।
भाजपा एमएलसी प्रसाद लाड ने भी विपक्ष को आत्मचिंतन की सलाह देते हुए कहा कि भाजपा पर तोड़फोड़ के आरोप लगाने के बजाय विपक्ष को अपने नेताओं के पार्टी छोड़ने के कारणों पर विचार करना चाहिए। शुक्र है कि सचिन अहीर के पार्टी छोड़ने के बाद किसी ने उन्हें मारने तुड़वाने की बातें नहीं की।
शिवसेना मंत्री संजय शिरसाट ने किया ये दावा
शिवसेना मंत्री संजय शिरसाट ने दावा किया कि उनकी पार्टी किसी पर दबाव नहीं बनाती और न ही किसी को तोड़ती है। उन्होंने कहा कि लोग अपनी इच्छा से पार्टी की विचारधारा से प्रभावित होकर शिवसेना में शामिल हो रहे हैं। शिरसाट ने यह भी दावा किया कि “ऑपरेशन टाइगर 3.0” शुरू हो चुका है और आने वाले समय में और भी नेता उनकी पार्टी में शामिल होंगे ।
अब सबकी नजरें महाराष्ट्र की राजनीति पर टिकी हैं। सचिन अहीर के शिंदे शिवसेना में जाने के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या आने वाले दिनों में शिवसेना (यूबीटी), कांग्रेस या अन्य विपक्षी दलों के और विधायक या एमएलसी महायुति का दामन थामेंगे। साथ ही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) को लेकर भी राजनीतिक अटकलों का दौर जारी है।
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