नयी दिल्ली। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) योग्य आयकर विभाग अधिकारियों का एक राष्ट्रीय समूह तैयार करेगा। यह समूह विभाग की ओर से देशभर की अदालतों में बड़े कानूनी विवादों में सफलता पाने के लिए मुकदमे लड़ेगा और इसके माध्यम से कानूनी वादों की संख्या में कमी लायी जाएगी।
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आयकर विभाग के लिए नीतियां तैयार करने वाले शीर्ष निकाय सीबीडीटी ने 2019-20 के लिए जारी नवीनतम केंद्रीय कार्य योजना में इस प्रस्ताव को आगे किया है। सीबीडीटी द्वारा जारी की जाने वाली केंद्रीय कार्य योजना आयकर विभाग के लिए मार्गदर्शक का काम करती है जिसे हर साल जारी किया जाता है।
इसमें कहा गया है कि दिल्ली मुख्यालय वाला विभाग का विधिक निदेशालय देशभर से चुनिंदा अधिकारियों का एक 'राष्ट्रीय समूह' बनाएगा। इसमें ऐसे अधिकारियों को शामिल किया जाएगा जो आयकर अधिनियम की किसी विशेष धारा, क्षेत्र या व्यापार में विशेषज्ञता रखते होंगे बड़े कानूनी मसलों में विभाग का पक्ष रखने में सक्षम होंगे। यह अधिकारी विभिन्न स्तरों पर लंबित कानूनी वादों में वकील या अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल की हर संभव मदद करने का काम करेंगे। यहां तक कि यह अधिकारी उच्चतम न्यायालय में भी विभाग की ओर से पक्ष रखने में मदद करेंगे।
बोर्ड का मानना है कि इससे बेहतर विधिक प्रबंधन सुनिश्चित होगा और कानूनी मामलों में कमी लाने में मदद मिलेगी। इसी कार्य योजना में आयकर विभाग को वित्त वर्ष 2019-20 में 1.30 करोड़ नए करदाता जोड़ने का लक्ष्य दिया गया है। यह सरकार की देश में कर दायरा बढ़ाने की योजना के अनुरूप है।
इसमें उत्तर पश्चिम क्षेत्र से 12,50,683 नए करदाता, पुणे क्षेत्र से 12,22,676, गुजरात क्षेत्र से 11,96,129, तमिलनाडु क्षेत्र से 9,35,501 और आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना क्षेत्र से 9,22,465 नए करदाता जोड़ने का लक्ष्य शामिल है। आयकर विभाग के देशभर में 18 क्षेत्रीय कार्यालय हैं।