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अमेरिका की इकॉनमी को लगा ईरान युद्ध का ग्रहण! सुपरपावर हुआ पस्त, भारत को मिल रही लगातार गुड न्यूज

 Edited By: Shivendra Singh
 Published : Apr 10, 2026 12:33 pm IST,  Updated : Apr 10, 2026 12:33 pm IST

मिडिल ईस्ट संकट ने जहां एक तरफ दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका की कमर तोड़ दी है, वहीं दूसरी तरफ भारत के लिए अच्छी खबरों का सिलसिला जारी है। एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में भारत की विकास दर के अनुमान को बढ़ाकर दुनिया को चौंका दिया है।

भारत और अमेरिका की...- India TV Hindi
भारत और अमेरिका की इकोनॉमी Image Source : CANVA

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखने लगा है। जहां एक तरफ अमेरिका की आर्थिक रफ्तार धीमी पड़ती नजर आ रही है, वहीं दूसरी तरफ भारत के लिए खुशखबरी का सिलसिला जारी है। अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भारत की मजबूत स्थिति को देखते हुए लगातार उसके ग्रोथ अनुमान बढ़ा रही हैं, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत एक मजबूत अर्थव्यवस्था बनकर उभर रहा है।

ईरान युद्ध और पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने अमेरिका की इकॉनमी पर दबाव बढ़ा दिया है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, 2025 की चौथी तिमाही में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर महज 0.5% रही, जो पहले की तिमाहियों के मुकाबले काफी कमजोर है। पूरे साल 2025 में अमेरिका की जीडीपी ग्रोथ 2.1% रही, जो 2024 (2.8%) और 2023 (2.9%) के मुकाबले गिरावट दिखाती है। वि

भारत के लिए आई बड़ी खुशखबरी

जहां अमेरिका दबाव में है, वहीं भारत की अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। एशियन डेव्हलपमेंट बैंक (ADB) ने वित्त वर्ष 2026 के लिए भारत की ग्रोथ दर 6.9% रहने का अनुमान जताया है। इससे पहले वर्ल्ड बैंक भी भारत की विकास दर 7.6% रहने का अनुमान दे चुका है। भारत की मजबूत घरेलू मांग, बेहतर वित्तीय हालात और अमेरिका द्वारा टैरिफ में कमी जैसे फैक्टर्स इस ग्रोथ को सपोर्ट कर रहे हैं।

मजबूत घरेलू मांग बना रही है सहारा

भारत की अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत उसकी घरेलू मांग है। देश के भीतर खपत लगातार मजबूत बनी हुई है, जिससे उद्योगों और सेवाओं को सहारा मिल रहा है। इसके अलावा, सरकार के सुधार, इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ता खर्च और निजी निवेश भी आर्थिक विकास को गति दे रहे हैं।

ADB की चेतावनी भी जरूरी

एशियन डेव्हलपमेंट बैंक ने भारत की ग्रोथ को लेकर पॉजिटिव रुख दिखाया है, लेकिन उसने कुछ जोखिमों की भी चेतावनी दी है। रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है और तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है। इससे महंगाई बढ़ेगी और एशियाई देशों की ग्रोथ पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, वैश्विक फाइनेंशियल कंडीशंस सख्त होने से कर्ज लेना महंगा हो सकता है, जो विकास के लिए चुनौती बन सकता है।

2027 के लिए भी पॉजिटिव संकेत

एशियन डेव्हलपमेंट बैंक ने वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.3% रहने का अनुमान जताया है। यूरोपियन यूनियन के साथ संभावित ट्रेड एग्रीमेंट, सरकारी कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी और सुधारों के चलते अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। हालांकि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने 2027 के लिए थोड़ा कम, यानी 6.9% ग्रोथ का अनुमान जताया है।

क्या बदल रहा है ग्लोबल इकॉनमी का संतुलन?

मौजूदा हालात यह संकेत दे रहे हैं कि वैश्विक आर्थिक संतुलन में बदलाव हो रहा है। एक ओर जहां अमेरिका जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था चुनौतियों का सामना कर रही है, वहीं भारत जैसे उभरते देश तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

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