सीआईआई-सीबीआरई की रिपोर्ट के मुताबिक, भूमि/विकास स्थलों ने इक्विटी निवेश का सबसे बड़ा हिस्सा आकर्षित किया, जो कि कैलेंडर ईयर 2022-24 के बीच कुल फ्लो का 44 प्रतिशत हिस्सा था।
कंपनी के निदेशक मंडल की पूंजी जुटाने वाली समिति ने 8 अप्रैल, 2025 को अपनी बैठक में 10 रुपये प्रति इक्विटी शेयर के निर्गम मूल्य पर 10 रुपये अंकित मूल्य के 3,695 करोड़ इक्विटी शेयर जारी कर अलॉट किए हैं।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मिडकैप कैटेगरी में जनवरी 2025 में 5,148 करोड़ रुपये का प्रवाह देखा गया, जबकि स्मॉलकैप कैटेगरी में 5,721 करोड़ रुपये का प्रवाह देखा गया।
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के FAQs में कहा गया है, "अगर सेक्शन 10(10डी) की शर्तें पूरी नहीं होती हैं, तो बीमा पॉलिसी के तहत मिलने वाले रिटर्न कैपिटल गेन्स टैक्स (यूनिट-लिंक्ड बीमा पॉलिसी के लिए) या अन्य स्रोतों से इनकम (यूएलआईपी के अलावा अन्य पॉलिसी के लिए) के रूप में टैक्स लगाया जा सकता है।"
सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) में निवेश 26,459 करोड़ रुपये रहा, जो नवंबर में 25,320 करोड़ रुपये था। एसआईपी प्रबंधन के तहत एसेट 13.63 लाख करोड़ रुपये रहीं, जो कुल का लगभग पांचवां हिस्सा है।
टॉप इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में टॉप पर दो स्कीम मिराए एसेट म्यूचुअल फंड की थीं। मोतीलाल ओसवाल ELSS टैक्स सेवर फंड और मोतीलाल ओसवाल नैस्डैक 100 FOF ने 2024 में क्रमशः लगभग 50.49% और 50.37% रिटर्न दिया।
जानकारों का कहना है कि एफपीआई तभी वापस आएंगे जब उन्हें भारतीय कंपनियों में आय में वृद्धि दिखाई देगी, जो अगले साल की दूसरी छमाही में होगी। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026 में आय वृद्धि बढ़कर 17 प्रतिशत हो जाएगी, जबकि वित्त वर्ष 25 के लिए इसका अनुमान 4 प्रतिशत है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने भी इस तेजी को और बढ़ावा दिया, जिन्होंने पिछले दो सत्रों में 5,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया।
पिछले पांच सालों में, भारतीय बाजारों ने लगातार लगभग 15 प्रतिशत चक्रवृद्धि सालाना वृद्धि दर दी है, चीनी बाजार कहीं भी इसके करीब नहीं हैं। निवेशकों के पैसे के फ्लो और नए पेपर की सप्लाई के बीच असंतुलन के चलते पिछले पांच सालों में 40 प्रतिशत स्मॉल और मिडकैप शेयरों में 5 गुना बढ़ोतरी हुई है।
AMFI के चीफ एग्जीक्यूटिव वेंकट चलसानी ने कहा कि एसआईपी के जरिए निवेश में हो रही बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि निवेशक अब अनुशासित ढंग से निवेश कर वेल्थ क्रिएशन को तवज्जो दे रहे हैं।
एयरलाइन ने अपनी मौजूदा समस्या के लिए फ्लीट में कमी, विमानों का ग्राउंड होना, वर्किंग कैपिटल की उच्च लागत, बढ़ती हुई निश्चित लागत, एयरपोर्ट पर निश्चित किराया और वैधानिक बकाया जैसे कारकों को जिम्मेदार ठहराया।
वोडाफोन आइडिया के शेयर में बीते एक साल में काफी तेजी आई है। यह उछाल 136 प्रतिशत का है। वोडाफोन-आइडिया इस साल अपनी 5G सर्विस लॉन्च कर सकती है।
Investments in India: 21वीं सदी टेक्नोलॉजी की है। अब सिर्फ इतना कहना पूरा सच नहीं रह गया है। 21वीं सदी इंडिया की हो रही है। निवेश के हर पैमाने पर भारत का डंका दुनिया में बज रहा है। इंडिया प्राइवेट इक्विटी रिपोर्ट 2023 जो बातें कही गई है, वह वाकई चौंकाने वाली है।
इक्विटी म्यूचुअल फंड के एसेट अंडर मैनजमेंट सितंबर के अंत तक बढ़कर 12.8 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गईं। जून के अंत तक यह 11.1 लाख करोड़ रुपये थीं।
शेयर बाजार में मिलने वाले रिटर्न पर नजर डालें तो ऐसी कंपनियों की कोई कमी नहीं है जिसमें निवेशकों की रकम 10 साल में 10 गुना से ज्यादा बढ़ी है।
आर्थिक सलाहकार के मुताबिक प्रोत्साहन के बावजूद, महामारी प्रतिबंधों के हटने के बाद भी बैंक ऋण वृद्धि छह प्रतिशत के निम्न स्तर पर ही है। हालांकि और क्षेत्रों को खोले जाने से वृद्धि को गति मिलेगी।
इक्विटी योजनाओं में जून में शुद्ध रूप से 5,988 करोड़ रुपये, मई में 10,083 करोड़ रुपये, अप्रैल में 3,437 करोड़ रुपये और मार्च में 9,115 करोड़ रुपये का निवेश आया था।
जुलाई अंत तक म्यूचुअल फंड उद्योग के प्रबंधन के तहत परिसंपत्तियां (एयूएम) 35.32 लाख करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्चस्तर पर पहुंच गईं, जो जून के अंत तक 33.67 लाख करोड़ रुपये थीं।
बाजार में बढ़त के साथ बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों की पूंजी इस साल 15 जून को अपने उच्चतम स्तर 2,31,58,316.92 करोड़ रुपये पर पहुंच गई थी।
बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, एफपीआई ने इक्विटी में 24,204 करोड़ रुपये और डेट में 761 करोड़ रुपये निवेश किए। इस तरह एक फरवरी से 19 फरवरी के बीच कुल निवेश 24,965 करोड़ रुपये रहा।
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