एसआईपी में कभी भी एक समान रिटर्न नहीं मिलता है। लेकिन, लंबी अवधि में नुकसान होने का जोखिम काफी कम हो जाता है।
एसआईपी (सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) एक अनुशासित निवेश का तरीका है, जिसमें निवेशक नियमित अंतराल पर म्यूचुअल फंड में एक तय राशि निवेश करते हैं। इसके जरिये आप बड़ा फंड बना सकते हैं।
म्यूचुअल फंड को आम निवेशकों के लिए सबसे आसान और असरदार निवेश ऑप्शन माना जाता है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले करीब 90% लोग कुछ ऐसी आम गलतियां कर बैठते हैं, जो उनके वेल्थ क्रिएशन के सपने को कमजोर कर देती हैं।
भारत में निवेश करने वाले NRI निवेशकों के लिए यह मामला किसी मिसाल से कम नहीं है। मुंबई की एक महिला ने भारत में म्यूचुअल फंड निवेश से करीब 1.35 करोड़ रुपये की कमाई की और उस पर भारत में एक भी रुपया टैक्स नहीं चुकाया।
निवेशकों को इस बात का हमेशा ध्यान रखना होगा कि एसआईपी में कभी भी एक समान रिटर्न नहीं मिलता है। लेकिन, लंबी अवधि में नुकसान होने का जोखिम काफी कम हो जाता है।
एसआईपी में आपको हर महीने एक तय तारीख पर एक फिक्स अमाउंट जमा करना होता है। एसआईपी में शेयर बाजार के मोटे रिटर्न के साथ कंपाउंडिंग का भी बंपर फायदा मिलता है।
म्यूचुअल फंड्स सीधे तौर पर शेयर बाजार में होने वाले कारोबार से जुड़े हुए हैं। ऐसे में, शेयर बाजार में की अस्थिरता ने निवेशकों के म्यूचुअल फंड्स पोर्टफोलियो को भी अस्थिर कर दिया।
म्यूचुअल फंड में SIP की शुरुआत करने वाले लोगों के मन में एक आम सवाल होता है कि हर महीने कितनी SIP करनी चाहिए? इसका जवाब सिर्फ आपकी सैलरी पर नहीं, बल्कि आपकी उम्र पर भी निर्भर करता है।
म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने वालों के लिए सेबी (SEBI) ने एक अहम बदलाव किया है। यह बदलाव आपकी जेब पर सीधा असर डाल सकता है, क्योंकि अब म्यूचुअल फंड की फीस यानी एक्सपेंस रेशियो को नए और साफ तरीके से तय किया जाएगा।
रिपोर्ट के मुताबिक रिसर्च, डिजिटल प्लेटफॉर्म और एजुकेशन तक जबरदस्त पहुंच ने इस बदलाव को आकार देने में बहुत बड़ी और अहम भूमिका निभाई है।
भारतीय शेयर बाजार में मची उथल-पुथल के बीच ऐसे कई म्यूचुअल फंड स्कीम्स हैं, जो अपने निवेशकों के पोर्टफोलियो को मैनेज किया हुआ है।
एसआईपी में कभी भी एक जैसा रिटर्न नहीं मिलता है। एसआईपी में मिलने वाला रिटर्न पूरी तरह से शेयर बाजार की चाल पर निर्भर करता है।
इक्विटी स्टेक में अपेक्षित बढ़ोतरी का श्रेय सट्टेबाजी आधारित कारोबार की जगह लॉन्ग टर्म निवेश की ओर बदलाव को दिया जा सकता है।
SIP, यानी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान, निवेश का एक तरीका है जिसमें एक तय रकम को रेगुलर इंटरवल पर, जैसे महीने या तिमाही में, म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट किया जाता है। यह तरीका डिसिप्लिन्ड इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देता है और समय के साथ पैसा जमा करने में मदद करता है। इसमें रिटर्न की कोई लिमिट नहीं है। आपको बहुत हाई रिटर्न भ
एसआईपी कभी भी एक जैसा रिटर्न नहीं मिलता है और ये पूरी तरह से शेयर बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव पर निर्भर करता है।
डिजिटल दौर में हर दिन लाखों लोग बाजार में कदम रख रहे हैं, म्यूचुअल फंड के एसेट्स 80 ट्रिलियन के पार पहुंच गए हैं और डिमैट अकाउंट की संख्या नए रिकॉर्ड बना रही है। लेकिन इस चमकदार तस्वीर के पीछे एक सच्चाई है जो डराती भी है और चौंकाती भी।
ETF निवेशकों को छोटी रकम से शुरुआत करने की सुविधा देते हैं, लेकिन म्यूचुअल फंड में आमतौर पर ज़्यादा मिनिमम इन्वेस्टमेंट की ज़रूरत होती है।
जानकार का कहना है कि आने वाले समय में भी निवेश का अधिकांश प्रवाह लिक्विड, मनी मार्केट और हाई-क्वालिटी एक्रूअल फंड्स में केंद्रित रह सकता है।
क्वांट स्मॉल कैप फंड, भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की सबसे पुरानी स्कीम्स में से एक है। क्वांट स्मॉल कैप फंड की शुरुआत 1996 में हुई थी।
बीते कुछ सालों में, म्यूचुअल फंड्स में निवेश करने वाले लोगों की संख्या में काफी तेज बढ़ोतरी हुई है। खास बात ये है कि इनमें छोटे निवेशकों और महिलाओं की संख्या काफी ज्यादा है।
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