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Masik Janmashtami 2026 Puja Vidhi, Mantra LIVE: मासिक जन्माष्टमी की रात्रि में पूजन के लिए यह रहेगा शुभ मुहूर्त, जानें पूजा विधि और मंत्र

Masik Janmashtami:साल 2026 में पहला मासिक जन्माष्टमी व्रत 10 जनवरी के दिन रखा जाएगा। इस दिन भगवान कृष्ण की पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। आध्यात्मिक उत्थान और पारिवारिक सुख शांति के लिए भी जन्माष्टमी व्रत को बेहद शुभ माना जाता है। आइए ऐसे में जान लेते हैं जन्माष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व।

Written By: Naveen Khantwal
Published : Jan 10, 2026 06:20 am IST, Updated : Jan 10, 2026 02:29 pm IST
Masik Janmashtmi- India TV Hindi
Image Source : FREEPIK मासिक जन्माष्टमी

Masik Janmashtami 2026 Puja Vidhi, Mantra: मासिक जन्माष्टमी का व्रत हर महीने में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। साल 2026 का पहला जन्माष्टमी व्रत माघ मास की अष्टमी तिथि को रखा जाएगा। अष्टमी तिथि 10 जनवरी 2026 को है और इस दिन मासिक कृष्ण जन्माष्टमी व्रत और श्रीकृष्ण भगवान की पूजा की जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जन्माष्टमी व्रत रखने से भक्तों के जीवन में सुख-समृद्धि आती है और पारिवारिक जीवन में भी शुभ फलों की प्राप्ति होती है। आइए ऐसे में जान लेते हैं जन्माष्टमी व्रत की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र आदि के बारे में विस्तार से।  

मासिक जन्माष्टमी 2026 शुभ पूजा मुहूर्त

माघ माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 10 जनवरी की सुबह 8 बजकर 23 मिनट से शुरू होगी और 11 जनवरी को 10 बजकर 20 मिनट तक रहेगी। ऐसे में कृष्ण जन्माष्टमी 10 जनवरी को ही मनाई जाएगी क्योंकि जन्माष्टमी के व्रत में निशिता काल (अर्धरात्रि) की पूजा का बड़ा महत्व है। हालांकि व्रत लेने वालों को सुबह श्रीकृष्ण पूजन करने के बाद संकल्प लेना चाहिए और अर्धरात्रि में भी पूजन करना चाहिए। निशिता काल में पूजा के लिए शुभ मुहूर्त रात 12 बजकर 2 मिनट से 12 बजकर 55 मिनट तक रहेगा।

Live updates :Masik Janmashtami 2026 LIVE: साल का पहला जन्माष्टमी व्रत आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और मंत्र

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  • 2:29 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    जन्माष्टमी के दिन इन चीजों का दिखना शुभ

    जन्माष्टमी के दिन अचानक मोर, गाय, पानी का भरा बर्तन, साधु-संत और बरगद के पेड़ का दिखना शुभ माना जाता है। ऐसा होने पर आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं। 

  • 1:57 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    जन्माष्टमी के दिन मोरपंख घर लाने से क्या होता है?

    भगवान कृष्ण मोरपंख का मुकुट धारण करते थे और वास्तु में भी मोरपंख को बेहद शुभ माना जाता है। ऐसे में अगर आप जन्माष्टमी के दिन मोरपंख घर लाते हैं तो वास्तु दोष से आपको छुटकारा मिलता है और साथ ही कृष्ण भगवान का आशीर्वाद भी आते हैं। माना जाता है कि मोरपंख को घर में रखने से राहु ग्रह का बुरा असर भी दूर होने लगता है। 

  • 1:24 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    जन्माष्टमी के दिन बाल कृष्ण को झुलाएं झूला

    जन्माष्टमी के दिन आपको बाल कृष्ण के लिए झूला लाना चाहिए और श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप को झूला झुलाना भी चाहिए। ऐसा करने से आप श्रीकृष्ण के प्रति अपने भक्ति भाव को तो प्रदर्शित करते ही हैं साथ ही सुख, समृद्धि की भी आपको प्राप्ति होती है। 

  • 12:45 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    जन्माष्टमी के दिन छोटे बच्चों को बांसुरी देने से क्या होता है?

    जन्माष्टमी के दिन छोटे बच्चों को अगर आप बांसुरी उपहार के रूप में देते हैं तो कृष्ण भगवान की कृपा आप पर बरसती है। आपके जीवन की परेशानियों का अंत होता है। साथ ही ऐसा करने से संगीत की देवी मां सरस्वती भी प्रसन्न होती हैं।

  • 12:01 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    Masik Janmashtami: जन्माष्टमी पर राशि अनुसार करें इन चीजों का दान

    • मेष और वृश्चिक: लाल कपड़े, गुड़, गेहूं।
    • मिथुन और कन्या: हरे वस्त्र, हरी चूड़ियां। 
    • वृषभ और तुला: मिश्री, चांदी।
    • कर्क: दही, चावल, सफेद मिठाई।
    • सिंह: तिल, गुड़, लाल वस्त्र।
    • धनु और मीन: केला, पीली मिठाई, पीले वस्त्र। 
    • मकर और कुंभ: जूते, कपड़े, पंखे। 
  • 11:26 AM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    जन्माष्टमी के दिन किए गए इन कार्यों से बरसेगी श्रीकृष्ण की कृपा

    राधा रानी के नाम का जप करें
    तुलसी माता की पूजा करें
    गाय को रोटी में गुड़ मिलाकर खिलाएं

  • 10:58 AM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    Janmashtami Daan: जन्माष्टमी के दिन किन चीजों का दान करना चाहिए

    जन्षाष्टमी के दिन आपको फल, वस्त्र, अन्न, गाय, धार्मिक पुस्तक और पीले रंग की वस्तुओं का दान करना चाहिए। इन चीजों का दान करने से भगवान कृष्ण की कृपा आपको प्राप्त होती है। 

  • 10:34 AM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    Masik Janmashtami 2026: जन्माष्टमी की रात्रि पूजा में जरूर शामिल करें ये चीजें

    मासिक जन्माष्टमी के अर्ध रात्रि में श्रीकृष्ण की पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि श्रीकृष्ण का जन्म अर्धरात्रि में ही हुआ था। रात्रि पूजन में क्या चीजें आपको शामिल करनी चाहिए, आइए जानते हैं।

    माखन-मिश्री
    धनिया पंजीरी
    पंचमेवा
    गंगाजल
    दूध-दही
    मिठाई
    चंदन 
    हल्दी
    मौली
    शंख
    मोरपंख
    तुलसी दल

  • 10:02 AM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    Masik Janmashtami 2026: जन्माष्टमी पर इन चीजों को घर लाना शुभ

    1. मोर पंख
    2. बांसुरी
    3. धातु की कामधेनु
    4. लड्डू गोपाल के लिए वस्त्र
    5. कान्हा जी के लिए झूला
  • 9:36 AM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    जन्माष्टमी के दिन न करें ये गलतियां

    • तामसिक भोजन का सेवन न करें
    • तुलसी के पत्तों को गलती से भी न तोड़ें
    • क्रोध करने से बचें 
    • नशीले पदार्थों का सेवन न करें
    • व्रत रखा है तो दिन में सोने से बचें
  • 9:24 AM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    मासिक जन्माष्टमी के दिन कब से कब तक रहेगा अभिजीत मुहूर्त?

    अभिजीत मुहूर्त को पूजा, ध्यान, दान आदि के लिए बेहद शुभ माना जाता है। मासिक जन्माष्टमी के दिन अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 08 मिनट से दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा।

  • 9:06 AM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    मासिक जन्माष्टमी पर करें भगवान कृष्ण के इन नामों का जप

    1. कृष्ण
    2. कमलनाथ
    3. वासुदेव
    4. देवाकीनन्दन
    5. वसुदेवात्मज
    6. पुण्य
    7. लीलामानुष विग्रह
    8. यशोदावत्सल
    9. हरि
    10. श्रीशाय
    11. अनन्त
  • 8:52 AM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    Masik Janmastami 2026: जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल को जरूर लगाएं इन चीजों का भोग

    • माखन-मिश्री
    • पंजीरी
    • खीर 
    • पंचामृत
    • खीरा
    • केला
    • दही
  • 8:38 AM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    मासिक जन्माष्टमी पर करें पारिवारिक खुशहाली के लिए ये उपाय

    पारिवारिक खुशहाली के लिए जन्माष्टमी के दिन तुलसी का एक पौधा आपको घर लाना चाहिए। तुलसी के पौधे को घर की पूर्व दिशा में आपको स्थापित करना चाहिए। इस पौधे को घर में लगाने के बाद प्रतिदिन इसकी पूजा करनी चाहिए और पूजा के बाद 3 या 7 बार इसकी परिक्रमा करनी चाहिए। ऐसा करने से परिवार जीवन में खुशहाली आती है। वैवाहिक जीवन भी सुखमय बना रहता है।

  • 8:17 AM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    Masik Janmastami 2026: नन्द के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की

    आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की,
    नन्द के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की।।
    बृज में आनंद भयो, जय यशोदा लाल की,
    हाथी घोडा पालकी, जय कन्हैया लाल की।।
    जय हो नंदलाल की, जय यशोदा लाल की,
    गोकुल में आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की।।
    आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की,
    नन्द के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की।।
    बृज में आनंद भयो, जय यशोदा लाल की,
    हाथी घोडा पालकी, जय कन्हैया लाल की।।
    कोटि ब्रह्माण्ड के अधिपति लाल की,
    हाथी घोडा पालकी, जय कन्हैया लाल की।।
    गउवे चराने आये, जय हो पशुपाल की,
    गोकुल में आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की।।
    पूनम के चाँद जैसी, शोभा है बाल की,
    हाथी घोडा पालकी, जय कन्हैया लाल की।।
    आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की,
    गोकुल में आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की।।
    कोटि ब्रह्माण्ड के अधिपति लाल की,
    नन्द के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की।।
    गउवे चराने आये, जय हो पशुपाल की,
    नन्द के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की।।
    भक्तो के आनंदकंद, जय यशोदा लाल की,
    हाथी घोडा पालकी, जय कन्हैया लाल की।।
    जय यशोदा लाल की, जय हो गोपाल की,
    गोकुल में आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की।।
    कोटि ब्रह्माण्ड के अधिपति लाल की,
    नन्द के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की।।
    गउवे चराने आये, जय हो पशुपाल की,
    नन्द के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की।।
    आनद से बोलो सब, जय हो बृज लाल की,
    हाथी घोडा पालकी, जय कन्हैया लाल की।।
    जय हो बृज लाल की, पावन प्रतिपाल की,
    गोकुल में आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की।।
    कोटि ब्रह्माण्ड के, अधिपति लाल की,
    नन्द के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की।।
    गउवे चराने आये, जय हो पशुपाल की,
    नन्द के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की।।
    आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की,
    नन्द के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की।।
    जय हो नंदलाल की, जय यशोदा लाल की,
    हाथी घोडा पालकी, जय कन्हैया लाल की।।
    बृज में आनंद भयो, जय यशोदा लाल की,
    नन्द के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की।।

  • 8:05 AM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    Bhaye Pragat Kripala Dindayal Aarti: भये प्रगट गोपाला दीनदयाला यशुमति के हितकारी

    भये प्रगट गोपाला दीनदयाला यशुमति के हितकारी।
    हर्षित महतारी सुर मुनि हारी मोहन मदन मुरारी ॥
    कंसासुर जाना मन अनुमाना पूतना वेगी पठाई।
    तेहि हर्षित धाई मन मुस्काई गयी जहाँ यदुराई॥
    तब जाय उठायो हृदय लगायो पयोधर मुख मे दीन्हा।
    तब कृष्ण कन्हाई मन मुस्काई प्राण तासु हर लीन्हा॥
    जब इन्द्र रिसायो मेघ पठायो बस ताहि मुरारी।
    गौअन हितकारी सुर मुनि हारी नख पर गिरिवर धारी॥
    कन्सासुर मारो अति हँकारो बत्सासुर संघारो।
    बक्कासुर आयो बहुत डरायो ताक़र बदन बिडारो॥
    तेहि अतिथि न जानी प्रभु चक्रपाणि ताहिं दियो निज शोका।
    ब्रह्मा शिव आये अति सुख पाये मगन भये गये लोका॥
    यह छन्द अनूपा है रस रूपा जो नर याको गावै।
    तेहि सम नहि कोई त्रिभुवन सोयी मन वांछित फल पावै॥
    नंद यशोदा तप कियो , मोहन सो मन लाय।
    देखन चाहत बाल सुख , रहो कछुक दिन जाय॥
    जेहि नक्षत्र मोहन भये ,सो नक्षत्र बड़िआय।
    चार बधाई रीति सो , करत यशोदा माय॥

  • 7:44 AM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    Janmashtmi Vrat Kath: जन्माष्टमी व्रत कथा

    जन्माष्टमी से जुड़ी धार्मिक कथा के अनुसार, द्वापर युग में कंस नाम का एक राजा हुआ जो अत्यंत क्रूर और अत्याचारी था। कंस के पिता उग्रसेन अपने पुत्र की रीति-नीतियों से बेहद दुखी थे। जब उन्होंने कंस को सबक सिखाने की कोशिश की तो कंस ने पिता को गद्दी से हटाकर खुद को ही राजा घोषित कर दिया। गद्दी पर बैठने के बाद मथुरा के लोगों पर कंस ने और अधिक अत्याचार करना शुरू कर दिया। 

    कंस भले ही बेहद अत्याचारी राजा था लेकिन अपनी बहन देवकी से वो अत्यंत प्रेम करता था। उसी ने वासुदेव से देवकी का विवाह भी तय किया और विवाह के बाद रथ पर बैठाकर देवकी को वासुदेव के घर ले जाने लगा। हालांकि रास्ते में हुई एक भविष्यवाणी ने देवकी और वासुदेव के जीवन की कायापलट कर दी। 

    कंस जब देवकी और वासुदेव के साथ रथ पर बैठकर आगे बढ़ रहा था तो आकाशवाणी हुई- अरे मुर्ख जिस बहन को तो बड़े प्रेम से विदा कर रहा है उसी की आठवीं संतान तेरी मृत्यु का कारण बनेगी। इसके बाद कंस क्रोध में आ गया और उसने वासुदेव को मारने का प्रयास किया। हालांकि देवकी ने यह कहकर वासुदेव को बचा लिया कि वो अपनी हर संतान को पैदा होते ही कंस के हवाले कर देगी। इसके बाद कंस ने देवकी और वासुदेव को कारागार में डाल दिया। कंस से किए वादे के चलते एक के बाद एक 7 संतानों को देवकी ने कंस को सौंप दिया और कंस ने निर्ममता से उनकी हत्या कर दी। 

    जब देवकी की आठवीं संतान के पैदा होने का समय आया तो कंस ने कारागार के आसपास कड़ा पहरा कर दिया। भगवान कृष्ण के जन्म से पहले भगवान विष्णु ने देवकी और वासुदेव के सपने में आकर उन्हें मनुष्य अवतार में आने की बात कही। साथ उन्होंने कहा कि जन्म के बाद मुझे नन्द और यशोदा के पास लालन-पालन के लिए आप छोड़ दें। जब देवकी की संतान होने वाली थी उसी समय यशोदा भी बच्चे को जन्म देने वाली थी। 

    भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की रात्रि में देवकी ने कृष्ण को जन्म दिया। भगवान की कृपा से उस दौरान कारागार के सभी पहरेदार मूर्छित हो गए जिसके चलते वासुदेव भगवान कृष्ण को सूप में लिटाकर उन्हें नन्द के घर ले जाने लगे। रास्ते में यमुना को उन्होंने पार किया जिसमें शेषनाग ने भी उनकी मदद की। वासुदेव जब गोकुल पहुंचे तो बाल कृष्ण को नंद के घर सुलाकर यशोदा की पुत्री माया को अपने साथ ले आए। कंस ने यशोदा की पुत्री को देवकी की संतान समझकर उसे मारने का प्रयास किया लेकिन वह शिशु कंस के हाथ से छूटकर दिव्य प्रकाश बन गया। इसी प्रकास से फिर आकाशवाणी हुई कि- तू मुझे जो समझकर मारना चाहता है वो तो सुरक्षित गोकुल पहुंच गया है और वही तेरा नाश करेगा। इसके बाद माया अंतर्ध्यान हो गई। 

    भगवान कृष्ण ने युवा अवस्था में कंस का वध किया और मथुरा के लोगों को उसके अत्याचार से छुटकारा दिलाया। अपने संपूर्ण जीवनकाल में भगवान कृष्ण ने कई लीलाएं रची और गीता के उपदेश से दुनिया को नया ज्ञान प्रदान किया। 

  • 7:19 AM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    Masik Janmashtmi 2026: भगवान कृष्ण को लगाएं इन चीजों का भोग

     

    1. खीर
    2. रबड़ी
    3. सूजी का हलवा
    4. तुलसी दल
    5. लड्डू
  • 6:56 AM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    Aarti Kunj Bihari Ki: आरती कुंज बिहारी की

    आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।
    गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला।
    श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला।

    आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली।
    लतन में ठाढ़े बनमाली; भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक,
    चंद्र सी झलक, ललित छवि श्यामा प्यारी की॥
    श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥

    आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

    कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं।
    गगन सों सुमन रासि बरसै; बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग,
    ग्वालिन संग; अतुल रति गोप कुमारी की॥
    श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥

    आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

    जहां ते प्रकट भई गंगा, कलुष कलि हारिणि श्रीगंगा।
    स्मरन ते होत मोह भंगा; बसी सिव सीस, जटा के बीच,
    हरै अघ कीच; चरन छवि श्रीबनवारी की॥
    श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥

    आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

    चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू।
    चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू; हंसत मृदु मंद,चांदनी चंद,
    कटत भव फंद; टेर सुन दीन भिखारी की॥
    श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

    आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

    आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
    आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

  • 6:38 AM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    Krishna Janmashtami Mantra: कृष्ण जन्माष्टमी पर इन मंत्रों के जप से होगा लाभ

    • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।
    • ॐ क्लीं कृष्णाय नमः।
    • कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः।।
    • हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे।।
  • 6:23 AM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    Masik Krishna Janmashtami Puja Vidhi: जन्माष्टमी पूजा विधि

    जन्माष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान ध्यान के बाद आपको पूजा स्थल की सफाई करनी चाहिए और गंगाजल का छिड़काव करना चाहिए। इसके बाद दूध, घी, शहद, दही और पंचामृत से भगवान कृष्ण की मूर्ति का अभिषेक आपको करना चाहिए। संभव हो तो इस दिन श्री कृष्ण भगवान को पीले वस्त्र पहनाएं। श्रृंगार के लिए मोरपंख, बांसुरी, चंदन, रोली, फूल आदि का इस्तेमाल आपको करना चाहिए। इसके बाद श्रीकृष्ण के मंत्रों का जप, आरती आदि का पाठ आपको करना चाहिए। जन्माष्टमी के दिन सुबह की पूजा के साथ ही निशिता काल की पूजा भी आपको अवश्य करनी चाहिए। 

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