महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज है, खासकर आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर। इस बीच, इंडिया टीवी को दिए एक इंटरव्यू के दौरान राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP- अजित पवार गुट) के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल ने गठबंधन, विपक्ष और पार्टी की आंतरिक स्थिति पर खुलकर अपनी बात रखी।
प्रफुल्ल पटेल ने उन अटकलों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि महायुति में एनसीपी के साथ 'सौतेला व्यवहार' हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में मजबूती से काम कर रही है।
महायुति में सौतेला व्यवहार पर प्रफुल्ल पटेल ने कहा, "इस बात में सत्य नहीं है।" उन्होंने कहा, "धनंजय मुंडे का इस्तीफा हमने तय किया। जनता का भी विचार करते हुए हमें फैसले लेने पड़ते हैं। हालांकि, आज तक धनंजय मुंडे किसी भी इंक्वॉयरी में दोषी कहीं भी पाए नहीं गए हैं। उस वक्त माहौल इतना गर्म था कि हमने खुद तय किया और धनंजय मुंडे को बुलाकर कहा कि थोड़े दिन के लिए आप साइड हो जाएंगे तो बेहतर है।"
"नवाब मलिक के साथ पार्टी खड़ी"
उन्होंने उन दावों को भी नकारा जिनमें कहा गया था कि अजित पवार किसी दबाव में काम कर रहे हैं। नवाब मलिक को लेकर उन्होंने कहा कि वो हमेशा से NCP के नेता रहे हैं और रहेंगे। पार्टी पूरी तरह उनके साथ खड़ी है। पटेल के अनुसार, "दिल्ली से हमारे ऊपर कोई दबाव नहीं है। जो लोग दिल्ली रोने-गाने जाते हैं, उनकी अपनी जरूरत हो सकती है, हमारी नहीं।" इसके साथ ही, उन्होंने उस थ्योरी को सिरे से खारिज कर दिया कि "अमृत शिवसेना-बीजेपी को मिला और विष NCP को।"
पुणे और पिंपरी-चिंचवड जैसे इलाकों में जहां NCP और BJP आमने-सामने हैं, उसे लेकर पटेल ने 'एडजस्टमेंट' की संभावना जताई। उन्होंने कहा कि छोटे चुनावों को बड़ी राजनीति से नहीं जोड़ना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अजित पवार का 'घी-शक्कर' वाला बयान महज एक मुहावरा था, जिसे गलत संदर्भ में नहीं लिया जाना चाहिए।
दोनों NCP के साथ आने की अटकलें
वहीं, शरद पवार और अजित पवार के गुटों के फिर से साथ आने की खबरों पर पटेल ने विराम लगा दिया। उन्होंने कहा कि दोनों NCP का साथ आना फिलहाल सिर्फ अटकलें हैं। उनका मानना है कि अगर पवार परिवार राजनीतिक रूप से मिलता है, तो इससे NDA के भीतर टकराव की स्थिति बन सकती है, जिसे वे टालना चाहेंगे।
उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला
प्रफुल्ल पटेल ने पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस और शरद पवार के साथ जाने से उद्धव की शिवसेना कमजोर हुई है। पटेल के अनुसार, उद्धव ठाकरे ने सबसे बड़ा यू-टर्न लिया। उन्होंने अपने पिता (बालासाहेब ठाकरे) के बुनियादी सिद्धांतों को त्याग दिया। भाषण में भीड़ जुटाने से वोट नहीं मिलता है।
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