ज्योतिष शास्त्र में राहु-केतु को मयावी ग्रह माना जाता है। इन दोनों ग्रहों की खराब स्थिति आपके जीवन में परेशानियां पैदा कर सकती है। हालांकि, एक ऐसा रत्न है जो के साथ ही शनि के बुरे प्रभावों को भी दूर कर सकता है। इस रत्न का नाम है लाजवर्त और इसे पहनने से आपको जीवन में बेहतरीन बदलाव देखने को मिल सकते हैं। आज हम आपको इसी रत्न के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे।
कौन पहन सकता है लाजवर्त रत्न?
लाजवर्त रत्न पहनने से पहले आपको यह मालूम होना चाहिए कि ये आपके लिए शुभ है या नहीं। अगर आपकी राशि मकर और कुंभ है तो आप इसे धारण करके शुभ परिणाम प्राप्त कर सकते हैं। वहीं तुला राशि के जातकों के लिए भी यह रत्न शुभ साबित होता है। अगर आपकी कुंडली में शनि, राहु-केतु की स्थिति शुभ है तो आप यह रत्न धारण करके लाभ प्राप्त कर सकते हैं। राहु-केतु की महादशा में भी ये रत्न पहनना शुभ होता है। हालांकि इसे धारण करने से पहले आपको किसी योग्य ज्योतिषाचार्य से सलाह अवश्य लेनी चाहिए।

लाजवर्त पहनने से मिलते हैं ये फायदे
लाजवर्त रत्न को पहनने से आपको मानसिक शांति की प्राप्ति होती है साथ ही आपकी सेहत में भी अच्छे बदलाव देखने को मिलते है। लाजवर्त पहनने से गले, हड्डियों और पेट से जुड़ी परेशानियों से आपको मुक्ति मिलती है। इस रत्न के प्रभाव से राहु-केतु के साथ ही शनि के बुरे प्रभाव भी दूर होने लगते हैं। आपको जीवन में सकारात्मकता आती है और करियर के क्षेत्र में आप उन्नति प्राप्त करते हैं। साथ ही आपका आर्थिक पक्ष भी सुधरता है। इसके साथ ही रचनात्मक कार्यों में आपको सफलता मिलती है। यह रत्न राहु-केतु के बुरे प्रभाव को दूर करता है इसलिए आपके जीवन में आने वाली अड़चनें भी दूर होती हैं।
लाजवर्त पहनने के नियम
लाजवर्त रत्न शनिवार को सूर्यास्त के बाद धारण करना शुभ माना जाता है। आप लोहे, स्टील या पंचधातु की अंगूठी में लाजवर्त को गढ़ाकर धारण कर सकते हैं। इस रत्न को धारण करते समय शनि और राहु-केतु के मंत्रों का जप करना शुभ माना जाता है। इस रत्न को मध्यमा उंगली पर धारण आपको करना चाहिए। इसके साथ ही आप गले में भी लाजवर्त रत्न को धारण कर सकते हैं।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
यह भी पढ़ें: