Somwar Vrat Katha (सोमवार व्रत कथा) Live: सनातन धर्म में सोमवार व्रत का विशेष महत्व माना गया है और ये व्रत भगवान शिव को समर्पित है। कहते हैं जो भी श्रद्धालु इस व्रत को सच्चे मन से रखता है उसकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। आज 26 जनवरी 2026 को माघ शुक्ल पक्ष का सोमवार है। अगर आपने भी सोमवार व्रत रखा है तो जान लें इस व्रत की पूजा विधि, सामग्री लिस्ट, व्रत कथा, शुभ मुहूर्त, आरती, भजन समेत संपूर्ण जानकारी।
सावन सोमवार की व्रत कथा अनुसार एक समय की बात है एक नगर में एक साहूकार रहता था। उसके पास धन-दौलत किसी चीज की कमी नहीं थी लेकिन फिर भी वह दुखी रहता था। जिसका कारण था उसकी कोई संतान न होना। संतान की प्राप्ति हेतु वो नियम से सोमवार व्रत किया करता था और भगवान शिव और माता पार्वती की सच्चे मन से पूजा करता था। एक दिन माता पार्वती ने भगवान शिव को उस साहूकार की मनोकामना को पूर्ण करने के लिए कहा। तब भगवान शिव ने कहा, इस संसार में व्यक्ति को उसके कर्मों के हिसाब से ही फल मिलता है, जिसके भाग्य में जो है उसे वही मिलता है। लेकिन तब भी पार्वती जी नहीं मानी और उन्होंने भगवान शिव से उस साहूकार की इच्छा पूरी करने के लिए कहा। माता के कहने पर भगवान शिव को साहूकार को पुत्र प्राप्ति का वरदान दे दिया लेकिन उन्होंने साथ ही ये भी कहा की वह बालक सिर्फ 12 साल तक ही जीवित रहेगा।
इस बात को सुनकर साहूकार को खुशी तो हुई लेकिन 12 वर्ष तक ही बेटे की उम्र जानकर उसे दुख भी हुआ। वह इसके बाद भी पहले की तरह की भगवान शिव की पूजा करता रहा। कुछ समय बाद साहूकार को एक सुंदर पुत्र की प्राप्ति हुई। वह बालक जब ग्यारह साल का हुआ तो साहूकार ने उसे उसके मामा के साथ पढ़ने के लिए काशी भेज दिया। साहूकार ने पुत्र के मामा को बहुत सारा धन देते हुए कहा कि तुम लोग रास्ते में यज्ञ और ब्राह्मणों को भोजन करवाते हुए जाना। वह दोनों काशी पहुंचने से पहले एक राज्य में पहुंचे जहां पर नगर के राजा की कन्या के विवाह का आयोजन हो रहा था। लेकिन उस कन्या का विवाह जिस व्यक्ति से हो रहा था वह एक आंख से काना था। ऐसे में राजकुमार के पिता की नजर साहूकार के बेटे पर पड़ी और उसने सोचा की क्यों न साहूकार के बेटे को दूल्हा बनाकर राजकुमारी का विवाह करा दिया जाए और विवाह के बाद उसे धन देकर जाने को कह दूंगा और कन्या को अपने घर ले आऊंगा। राजकुमार के पिता ने साहूकार के बेटे से ये बात मनवा ली।
लेकिन साहूकार का पुत्र इमानदार था। उसने विवाह के बाद जाते-जाते राजकुमारी के दुपट्टे पर लिखा कि तुम्हारा विवाह तो मेरे साथ हुआ है लेकिन अब जिस राजकुमार के साथ तुम्हें भेजा जाएगा वह एक आंख से काना है। जब राजकुमारी ने ये बात पढ़ी तो इसके बाद उसने जाने से मना कर दिया। इतने में मामा और भांजा वहां से जा चुके थे और काशी जाकर उन्होंने यज्ञ किया। जब लड़ता 12 साल का हुआ तो उस दिन खास यज्ञ का आयोजन किया गया था। लेकिन उसी दिन उस लड़के के प्राण निकल गए। मृत भांजे को देखकर मामा ने विलाप करना शुरू कर दिया। लेकिन उसी समय माता पार्वती और भगवान शिव वहीं से होकर जा रहे थे। पार्वती माता ने भोलेनाथ से कहा स्वामी मुझ से उस व्यक्ति के रोने के स्वर सहन नहीं हो रहे कृप्या करके आप इस व्यक्ति के कष्ट को दूर करें।
तब भगवान शिव ने कहा कि ये व्यक्ति साहूकार के पुत्र की मृत्यु पर रो रहा है। इसकी आयु पूरी हो चुकी है। लेकिन माता पार्वती इस बात को नहीं मानी और कहने लगीं की इसकी आयु आपको बढ़ानी होगी। वरना इसके माता पिता अपने प्राण त्याग देंगे। भगवान शिव ने माता पार्वती की बात मानते हुए उस लड़के को जीवनदान दे दिया। जिसके बाद बालक अपनी शिक्षा को पूरी करने के बाद अपने माता पिता के वापस चला गया। वहीं साहूकार और उसकी पत्नी ने ये निर्णय लिया था कि अगर उनका पुत्र जीवित नहीं आया तो वो दोनों अपने प्राण दे देंगे लेकिन जब उन्होंने अपने बेटे के वापस आने की बात सुनीं तो वे दोनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। भगवान शिव ने साहूकार को सपने में दर्शन देकर कहा कि श्रेष्ठी, मैंने तेरे सोमवार के व्रत करने और व्रत कथा सुनने से प्रसन्न होकर तेरे पुत्र को लंबी आयु का वरदान दिया है। कहते हैं जो कोई भी इसी प्रकार सोमवार व्रत करता है या कथा सुनता उसके सभी दुख दूर होते हैं और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
सोमवार के व्रत में सात्विक फलाहार जैसे फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना, सेंधा नमक का उपयोग करके बनी लौकी की सब्जी, सिंघाड़े या कुट्टू के आटे की पूरी या परांठे खा सकते हैं। इस दिन अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए।
ॐ नमः पार्वती पतये, हर- हर महादेव॥
॥ श्रीशिवपञ्चाक्षरस्तोत्रम् ॥
नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय,
भस्माङ्गरागाय महेश्वराय ।
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय,
तस्मै न काराय नमः शिवाय ॥१॥
मन्दाकिनी सलिलचन्दन चर्चिताय,
नन्दीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय ।
मन्दारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय,
तस्मै म काराय नमः शिवाय ॥२॥
शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्द,
सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय ।
श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय,
तस्मै शि काराय नमः शिवाय ॥३॥
वसिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्य,
मुनीन्द्रदेवार्चितशेखराय।
चन्द्रार्क वैश्वानरलोचनाय,
तस्मै व काराय नमः शिवाय ॥४॥
यक्षस्वरूपाय जटाधराय,
पिनाकहस्ताय सनातनाय ।
दिव्याय देवाय दिगम्बराय,
तस्मै य काराय नमः शिवाय ॥५॥
पञ्चाक्षरमिदं पुण्यं यः पठेच्छिवसन्निधौ ।
शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते ॥
सत्य, सनातन, सुंदर,
शिव! सबके स्वामी ।
अविकारी, अविनाशी,
अज, अंतर्यामी ॥
ॐ हर हर हर महादेव..॥
आदि अनंत, अनामय,
अकल, कलाधारी ।
अमल, अरूप, अगोचर,
अविचल अघहारी ॥
ॐ हर हर हर महादेव..॥
ब्रह्मा, विष्णु, महेश्वर,
तुम त्रिमूर्तिधारी ।
कर्ता, भर्ता, धर्ता,
तुम ही संहारी ॥
ॐ हर हर हर महादेव..॥
रक्षक, भक्षक, प्रेरक,
तुम औढरदानी ।
साक्षी, परम अकर्ता,
कर्ता अभिमानी ॥
ॐ हर हर हर महादेव..॥
मणिमय भवन निवासी,
अति भोगी, रागी ।
सदा मसानबिहारी,
योगी वैरागी ॥
ॐ हर हर हर महादेव..॥
छाल, कपाल, गरल,
गल, मुंडमाल व्याली ।
चिताभस्म तन, त्रिनयन,
अयन महाकाली ॥
ॐ हर हर हर महादेव..॥
प्रेत-पिशाच, सुसेवित
पीत जटाधारी ।
विवसन, विकट रूपधर,
रुद्र प्रलयकारी ॥
ॐ हर हर हर महादेव..॥
शुभ्र, सौम्य, सुरसरिधर,
शशिधर, सुखकारी ।
अतिकमनीय, शान्तिकर
शिव मुनि मन हारी ॥
ॐ हर हर हर महादेव..॥
निर्गुण, सगुण, निरंजन,
जगमय नित्य प्रभो ।
कालरूप केवल, हर!
कालातीत विभो ॥
ॐ हर हर हर महादेव..॥
सत-चित-आनँद, रसमय,
करुणामय, धाता ।
प्रेम-सुधा-निधि, प्रियतम,
अखिल विश्व-त्राता ॥
ॐ हर हर हर महादेव..॥
हम अति दीन, दयामय!
चरण-शरण दीजै ।
सब विधि निर्मल मति,
कर अपना कर लीजै ॥
ॐ हर हर हर महादेव..॥
ॐ जय गंगाधर जय हर,
जय गिरिजाधीशा ।
त्वं मां पालय नित्यं,
कृपया जगदीशा ॥
ॐ हर हर हर महादेव ॥
कैलासे गिरिशिखरे,
कल्पद्रुमविपिने ।
गुंजति मधुकरपुंजे,
कुंजवने गहने ॥
ॐ हर हर हर महादेव ॥
कोकिलकूजित खेलत,
हंसावन ललिता ।
रचयति कलाकलापं,
नृत्यति मुदसहिता ॥
ॐ हर हर हर महादेव ॥
तस्मिंल्ललितसुदेशे,
शाला मणिरचिता ।
तन्मध्ये हरनिकटे,
गौरी मुदसहिता ॥
क्रीडा रचयति,
भूषारंचित निजमीशम् ।
इंद्रादिक सुर सेवत,
नामयते शीशम् ॥
ॐ हर हर हर महादेव ॥
बिबुधबधू बहु नृत्यत,
हृदये मुदसहिता ।
किन्नर गायन कुरुते,
सप्त स्वर सहिता ॥
धिनकत थै थै धिनकत,
मृदंग वादयते ।
क्वण क्वण ललिता वेणुं,
मधुरं नाटयते ॥
ॐ हर हर हर महादेव ॥
रुण रुण चरणे रचयति,
नूपुरमुज्ज्वलिता ।
चक्रावर्ते भ्रमयति,
कुरुते तां धिक तां ॥
ॐ हर हर हर महादेव ॥
तां तां लुप चुप,
तां तां डमरू वादयते।
अंगुष्ठांगुलिनादं,
लासकतां कुरुते ॥
ॐ हर हर हर महादेव ॥
कपूर्रद्युतिगौरं,
पञ्चाननसहितम् ।
त्रिनयनशशिधरमौलिं,
विषधरकण्ठयुतम् ॥
ॐ हर हर हर महादेव ॥
सुन्दरजटायकलापं,
पावकयुतभालम् ।
डमरुत्रिशूलपिनाकं,
करधृतनृकपालम् ॥
ॐ हर हर हर महादेव ॥
मुण्डै रचयति माला,
पन्नगमुपवीतम् ।
वामविभागे गिरिजा,
रूपं अतिललितम् ॥
ॐ हर हर हर महादेव ॥
सुन्दरसकलशरीरे,
कृतभस्माभरणम्।
इति वृषभध्वजरूपं,
तापत्रयहरणं ॥
ॐ हर हर हर महादेव ॥
शंखनिनादं कृत्वा,
झल्लरि नादयते ।
नीराजयते ब्रह्मा,
वेदऋचां पठते ॥
ॐ हर हर हर महादेव ॥
अतिमृदुचरणसरोजं,
हृत्कमले धृत्वा ।
अवलोकयति महेशं,
ईशं अभिनत्वा ॥
ॐ हर हर हर महादेव ॥
ध्यानं आरति समये,
हृदये अति कृत्वा ।
रामस्त्रिजटानाथं,
ईशं अभिनत्वा ॥
ॐ हर हर हर महादेव ॥
संगतिमेवं प्रतिदिन,
पठनं यः कुरुते ।
शिवसायुज्यं गच्छति,
भक्त्या यः श्रृणुते ॥
ॐ हर हर हर महादेव ॥
॥ दोहा ॥
जय गणेश गिरिजा सुवन,
मंगल मूल सुजान ।
कहत अयोध्यादास तुम,
देहु अभय वरदान ॥
॥ चौपाई ॥
जय गिरिजा पति दीन दयाला ।
सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥
भाल चन्द्रमा सोहत नीके ।
कानन कुण्डल नागफनी के ॥
अंग गौर शिर गंग बहाये ।
मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे ।
छवि को देखि नाग मन मोहे ॥ 4
मैना मातु की हवे दुलारी ।
बाम अंग सोहत छवि न्यारी ॥
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी ।
करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥
नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे ।
सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ ।
या छवि को कहि जात न काऊ ॥ 8
देवन जबहीं जाय पुकारा ।
तब ही दुख प्रभु आप निवारा ॥
किया उपद्रव तारक भारी ।
देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ॥
तुरत षडानन आप पठायउ ।
लवनिमेष महँ मारि गिरायउ ॥
आप जलंधर असुर संहारा ।
सुयश तुम्हार विदित संसारा ॥ 12
त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई ।
सबहिं कृपा कर लीन बचाई ॥
किया तपहिं भागीरथ भारी ।
पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी ॥
दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं ।
सेवक स्तुति करत सदाहीं ॥
वेद नाम महिमा तव गाई।
अकथ अनादि भेद नहिं पाई ॥ 16
प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला ।
जरत सुरासुर भए विहाला ॥
कीन्ही दया तहं करी सहाई ।
नीलकण्ठ तब नाम कहाई ॥
पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा ।
जीत के लंक विभीषण दीन्हा ॥
सहस कमल में हो रहे धारी ।
कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी ॥ 20
एक कमल प्रभु राखेउ जोई ।
कमल नयन पूजन चहं सोई ॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर ।
भए प्रसन्न दिए इच्छित वर ॥
जय जय जय अनन्त अविनाशी ।
करत कृपा सब के घटवासी ॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै ।
भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै ॥ 24
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो ।
येहि अवसर मोहि आन उबारो ॥
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो ।
संकट से मोहि आन उबारो ॥
मात-पिता भ्राता सब होई ।
संकट में पूछत नहिं कोई ॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी ।
आय हरहु मम संकट भारी ॥ 28
धन निर्धन को देत सदा हीं ।
जो कोई जांचे सो फल पाहीं ॥
अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी ।
क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ॥
शंकर हो संकट के नाशन ।
मंगल कारण विघ्न विनाशन ॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं ।
शारद नारद शीश नवावैं ॥ 32
नमो नमो जय नमः शिवाय ।
सुर ब्रह्मादिक पार न पाय ॥
जो यह पाठ करे मन लाई ।
ता पर होत है शम्भु सहाई ॥
ॠनियां जो कोई हो अधिकारी ।
पाठ करे सो पावन हारी ॥
पुत्र हीन कर इच्छा जोई ।
निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई ॥ 36
पण्डित त्रयोदशी को लावे ।
ध्यान पूर्वक होम करावे ॥
त्रयोदशी व्रत करै हमेशा ।
ताके तन नहीं रहै कलेशा ॥
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे ।
शंकर सम्मुख पाठ सुनावे ॥
जन्म जन्म के पाप नसावे ।
अन्त धाम शिवपुर में पावे ॥ 40
कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी ।
जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥
॥ दोहा ॥
नित्त नेम कर प्रातः ही,
पाठ करौं चालीसा ।
तुम मेरी मनोकामना,
पूर्ण करो जगदीश ॥
मगसर छठि हेमन्त ॠतु,
संवत चौसठ जान ।
अस्तुति चालीसा शिवहि,
पूर्ण कीन कल्याण ॥
26 जनवरी 2026 को राहुकाल सुबह 08:33 से 09:53 बजे तक रहेगा।
ॐ जय शिव ओंकारा, प्रभु जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ हर हर हर महादेव॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे। शिव पंचानन राजे।
हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ हर हर हर महादेव.॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे। प्रभु दस भुज अति सोहे।
तीनों रूप निरखते। त्रिभुवन मन मोहे ॥ ॐ हर हर हर महादेव॥
अक्षमाला बनमाला मुण्डमाला धारी। शिव मुण्डमाला धारी।
चंदन मृगमद चंदा, सोहे त्रिपुरारी॥ ॐ हर हर हर महादेव॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे। शिव बाघम्बर अंगे।
ब्रह्मादिक सनकादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ हर हर हर महादेव॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता। शिव कर में त्रिशूल धर्ता।
जगकर्ता जगहर्ता जगपालनकर्ता॥ ॐ हर हर हर महादेव॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका। स्वामी जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ हर हर हर महादेव॥
त्रिगुण शिवजी की आरती जो कोई नर गावे। प्रभु प्रेम सहित गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ हर हर हर महादेव॥
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