Somwar Vrat Katha (सोमवार व्रत कथा) Live: सनातन धर्म में सोमवार व्रत का विशेष महत्व माना गया है और ये व्रत भगवान शिव को समर्पित है। कहते हैं जो भी श्रद्धालु इस व्रत को सच्चे मन से रखता है उसकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। आज 26 जनवरी 2026 को माघ शुक्ल पक्ष का सोमवार है। अगर आपने भी सोमवार व्रत रखा है तो जान लें इस व्रत की पूजा विधि, सामग्री लिस्ट, व्रत कथा, शुभ मुहूर्त, आरती, भजन समेत संपूर्ण जानकारी।
सोमवार पूजा मुहूर्त (Somwar Puja Muhurat 26 Jan 2026)
- गोधूलि मुहूर्त - 05:53 पी एम से 06:19 पी एम
- सायाह्न सन्ध्या - 05:55 पी एम से 07:15 पी एम
सोमवार व्रत की विधि (Somwar Vrat Vidhi)
- सोमवार व्रत में सुबह जल्दी उठकर स्नान कर भगवान शिव की विधि विधान पूजा करें।
- पूजा के समय व्रत का संकल्प लें।
- भगवान शिव को फूल, बेल पत्र, भांग, धतूरा इत्यादि चढ़ाएं।
- धूप-दीप जलाकर अराधना करें।
- सोमवार व्रत की कथा सुनें।
- कथा के बाद भगवान शिव के मंत्रों और चालीसा का पाठ करें।
- फिर भगवान शिव की आरती करें।
- अंत में भोग लगाकर पूजा संपन्न करें।
- सोमवार व्रत में 1 समय भोजन किया जा सकता है।
- इस व्रत में नमक का सेवन करने से बचना चाहिए। लेकिन अगर आप बिना नमक के नहीं रह सकते हैं तो आप दिन में एक समय नमक ले सकते हैं।
सोमवार व्रत कथा इन हिंदी (Somwar Vrat Katha In Hindi)
सावन सोमवार की व्रत कथा अनुसार एक समय की बात है एक नगर में एक साहूकार रहता था। उसके पास धन-दौलत किसी चीज की कमी नहीं थी लेकिन फिर भी वह दुखी रहता था। जिसका कारण था उसकी कोई संतान न होना। संतान की प्राप्ति हेतु वो नियम से सोमवार व्रत किया करता था और भगवान शिव और माता पार्वती की सच्चे मन से पूजा करता था। एक दिन माता पार्वती ने भगवान शिव को उस साहूकार की मनोकामना को पूर्ण करने के लिए कहा। तब भगवान शिव ने कहा, इस संसार में व्यक्ति को उसके कर्मों के हिसाब से ही फल मिलता है, जिसके भाग्य में जो है उसे वही मिलता है। लेकिन तब भी पार्वती जी नहीं मानी और उन्होंने भगवान शिव से उस साहूकार की इच्छा पूरी करने के लिए कहा। माता के कहने पर भगवान शिव को साहूकार को पुत्र प्राप्ति का वरदान दे दिया लेकिन उन्होंने साथ ही ये भी कहा की वह बालक सिर्फ 12 साल तक ही जीवित रहेगा।
इस बात को सुनकर साहूकार को खुशी तो हुई लेकिन 12 वर्ष तक ही बेटे की उम्र जानकर उसे दुख भी हुआ। वह इसके बाद भी पहले की तरह की भगवान शिव की पूजा करता रहा। कुछ समय बाद साहूकार को एक सुंदर पुत्र की प्राप्ति हुई। वह बालक जब ग्यारह साल का हुआ तो साहूकार ने उसे उसके मामा के साथ पढ़ने के लिए काशी भेज दिया। साहूकार ने पुत्र के मामा को बहुत सारा धन देते हुए कहा कि तुम लोग रास्ते में यज्ञ और ब्राह्मणों को भोजन करवाते हुए जाना। वह दोनों काशी पहुंचने से पहले एक राज्य में पहुंचे जहां पर नगर के राजा की कन्या के विवाह का आयोजन हो रहा था। लेकिन उस कन्या का विवाह जिस व्यक्ति से हो रहा था वह एक आंख से काना था। ऐसे में राजकुमार के पिता की नजर साहूकार के बेटे पर पड़ी और उसने सोचा की क्यों न साहूकार के बेटे को दूल्हा बनाकर राजकुमारी का विवाह करा दिया जाए और विवाह के बाद उसे धन देकर जाने को कह दूंगा और कन्या को अपने घर ले आऊंगा। राजकुमार के पिता ने साहूकार के बेटे से ये बात मनवा ली।
लेकिन साहूकार का पुत्र इमानदार था। उसने विवाह के बाद जाते-जाते राजकुमारी के दुपट्टे पर लिखा कि तुम्हारा विवाह तो मेरे साथ हुआ है लेकिन अब जिस राजकुमार के साथ तुम्हें भेजा जाएगा वह एक आंख से काना है। जब राजकुमारी ने ये बात पढ़ी तो इसके बाद उसने जाने से मना कर दिया। इतने में मामा और भांजा वहां से जा चुके थे और काशी जाकर उन्होंने यज्ञ किया। जब लड़ता 12 साल का हुआ तो उस दिन खास यज्ञ का आयोजन किया गया था। लेकिन उसी दिन उस लड़के के प्राण निकल गए। मृत भांजे को देखकर मामा ने विलाप करना शुरू कर दिया। लेकिन उसी समय माता पार्वती और भगवान शिव वहीं से होकर जा रहे थे। पार्वती माता ने भोलेनाथ से कहा स्वामी मुझ से उस व्यक्ति के रोने के स्वर सहन नहीं हो रहे कृप्या करके आप इस व्यक्ति के कष्ट को दूर करें।
तब भगवान शिव ने कहा कि ये व्यक्ति साहूकार के पुत्र की मृत्यु पर रो रहा है। इसकी आयु पूरी हो चुकी है। लेकिन माता पार्वती इस बात को नहीं मानी और कहने लगीं की इसकी आयु आपको बढ़ानी होगी। वरना इसके माता पिता अपने प्राण त्याग देंगे। भगवान शिव ने माता पार्वती की बात मानते हुए उस लड़के को जीवनदान दे दिया। जिसके बाद बालक अपनी शिक्षा को पूरी करने के बाद अपने माता पिता के वापस चला गया। वहीं साहूकार और उसकी पत्नी ने ये निर्णय लिया था कि अगर उनका पुत्र जीवित नहीं आया तो वो दोनों अपने प्राण दे देंगे लेकिन जब उन्होंने अपने बेटे के वापस आने की बात सुनीं तो वे दोनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। भगवान शिव ने साहूकार को सपने में दर्शन देकर कहा कि श्रेष्ठी, मैंने तेरे सोमवार के व्रत करने और व्रत कथा सुनने से प्रसन्न होकर तेरे पुत्र को लंबी आयु का वरदान दिया है। कहते हैं जो कोई भी इसी प्रकार सोमवार व्रत करता है या कथा सुनता उसके सभी दुख दूर होते हैं और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।