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क्या होता है मोबाइल का सोर्स कोड, जिसे लेकर मचा है बवाल? PIB फैक्ट चेक ने झूठे दावे की खोल दी पोल

 Written By: Harshit Harsh @HarshitKHarsh
 Published : Jan 12, 2026 11:26 am IST,  Updated : Jan 12, 2026 12:34 pm IST

स्मार्टफोन के सोर्स कोड को लेकर एक झूठे दावे की पोल खुल गई है। सरकार की फैक्ट चेकिंग यूनिट PIB फैक्ट चेक ने सरकार द्वारा जबरन सोर्स कोड की मांग को लेकर चली खबर को गलत बताया है।

Smartphone source code- India TV Hindi
क्या होता है स्मार्टफोन का सोर्स कोड? Image Source : INDIA TV

स्मार्टफोन के सोर्स कोड को लेकर बवाल मचा हुआ है। एक फर्जी खबर की भारत सरकार की फैक्ट चेकिंग यूनिट PIB फैक्ट चेक ने पोल खोल दी है। इस खबर में दावा किया जा रहा था कि भारत सरकार सिक्योरिटी सिस्टम में बदलाव लाने की तैयारी में है, जिसमें स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों को अपने डिवाइस का सोर्स कोड शेयर करने के लिए कहा जाएगा। यह स्मार्टफोन निर्माता कंपनियों पर प्रेशर बनाने के लिए किया जा रहा है।

रॉयटर्स की इस रिपोर्ट को PIB फैक्ट चेक ने गलत बताया है और कहा है कि सरकार ने ऐसा कोई भी प्रस्ताव नहीं रखा गया है। स्मार्टफोन कंपनियों से उनका सोर्स कोड या फोन का सीक्रेड कोड शेयर करने की मांग नहीं की गई है। आइए, जानते हैं कि स्मार्टफोन का सोर्स कोड क्या होता है, जिसे लेकर यह मामला सामने आया है।

क्या होता है मोबाइल का सोर्स कोड?

दरअसल, मोबाइल फोन का सीक्रेट सोर्स कोड उस फोन के अंदर चलने वाले सॉफ्टवेयर और ऑपरेटिंग सिस्टम को तैयार करने वाली असली प्रोग्रामिंग लैंग्वेज की फाइलें हैं। आसान भाषा में कहा जाए तो यह किसी बिल्डिंग के ब्लू प्रिंट की तरह होता है। स्मार्टफोन का सोर्स कोड भी स्मार्टफोन का ब्लू-प्रिंट होता है, जो काफी कॉफिडेंशियल होता है। यह स्मार्टफोन में यूज होने वाले कई सेंसर और फीचर्स को कंट्रोल करता है। यही कारण है कि स्मार्टफोन कंपनियां अपने मोबाइल फोन का सोर्स कोड किसी के साथ शेयर नहीं करती हैं क्योंकि इसमें डिवाइस से जुड़ी सिक्योरिटी टेक्नोलॉजी छिपी होती है।

क्यों है विवाद?

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने हाल ही में मोबाइल डिवाइस की सेफ्टी के लिए एक जरूरी रेगुलेटरी फ्रेमवर्क लाने के लिए रूटीन स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन शुरू करने की योजना बनाई है। यह एक बेसिक प्रोटोकॉल का हिस्सा है, जिसमें डिवाइस की सुरक्षा और सेफ्टी स्टैंडर्ड का ध्यान रखा जाएगा। पीआईबी फैक्ट चेक की टीम ने यह साफ किया है कि इस रूटीन स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन पर कोई आखिरी फैसला नहीं लिया गया है। ऐसे में स्मार्टफोन के सोर्स कोड से जुड़ी खबरें पूरी तरह से गलत है।

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