म्यांमार भारत को उड़द का मुख्य निर्यातक देश है। इसके अलावा, भारत सिंगापुर, थाईलैंड और ब्राजील से उड़द का आयात करता है।
नोटिफिकेशन में कहा गया है कि डंपिंग रोधी शुल्क पांच साल की अवधि के लिए लगाया जाएगा। दोनों देश भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदार हैं।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरे मामले में कहा है कि अगर टेस्ला भारत के टैरिफ से बचने के लिए वहां फैक्टरी लगाती है तो ये अमेरिका के प्रति अन्याय होगा। बताते चलें कि वाइट हाउस में 13 फरवरी को प्रधानमंत्री मोदी के साथ मीटिंग से कुछ घंटे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ने जवाबी टैरिफ लगाने की घोषणा की थी।
अमेरिकी बैंकों ने भी BoE की तिजोरियों में काफी सोना रखा हुआ है। लेकिन ट्रंप की टैरिफ वाली धमकियों के बीच अमेरिकी बैंक अलर्ट हो गए हैं और लंदन में रखा हुआ सोना न्यूयॉर्क ला रहे हैं। अमेरिकी बैंकों को संदेह है कि ट्रंप सोने के आयात पर भी भारी टैरिफ लगा सकते हैं।
हिंदी को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त राष्ट्र भी भारत के साथ संजीदा हो गया है। संयुक्त राष्ट्र ने हिंदी को बहुत महत्वपूर्ण बताया है। भारत ने हिंदी को बढ़ावा देने के लिए 70 लॉख अमेरिकी डॉलर दिया है।
ट्रंप जब पहली बार अमेरिका के राष्ट्रपति बने थे, तब उन्होंने स्टील पर 25 प्रतिशत और एल्युमीनियम पर 10 प्रतिशत टैरिफ की घोषणा की थी। हालांकि, उस समय उन्होंने अपने कई पार्टनर्स को राहत दी थी और उनमें कनाडा, मेक्सिको और ब्राजील भी शामिल थे।
पीएम ने कहा, ''मुझे पूरा विश्वास है कि ओडिशा बहुत जल्द विकास की उन ऊंचाइयों को छुएगा, जिसकी किसी ने कभी कल्पना भी नहीं की होगी। मुझे खुशी है कि मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी का पूरा दल राज्य के विकास को गति देने के लिए प्रतिबद्ध है।''
घरेलू मुद्रा में गिरावट से भारत के सोने के आयात ‘बिल’ में वृद्धि होगी। पिछले 10 वर्षों के निर्यात आंकड़ों से पता चलता है कि कमजोर रुपये से निर्यात को कोई मदद नहीं मिलती है, जबकि अर्थशास्त्रियों की राय इससे उलट है।
सरकार ने एक बार फिर से Laptop, PC, Tablet आदि इंपोर्ट करने वाली कंपनियों को बड़ी राहत दी है। ये कंपनिया अभी एक और साल फ्री में लैपटॉप, कम्प्यूटर और टैबलेट को भारत में इंपोर्ट कर सकती हैं, लेकिन इसके लिए नया इंपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया गया है।
भारत का तेल आयात, जिसकी कीमत ज्यादातर डॉलर में होती है, रुपये के मूल्यह्रास के चलते काफी महंगा हो सकता था, हालांकि, ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 5 प्रतिशत की गिरावट से इसका असर कम हो गया है, जो दिसंबर 2023 में 77 डॉलर प्रति बैरल से 73 डॉलर प्रति बैरल हो गया है।
चीन को निर्यात आलोच्य अवधि में बढ़कर 6.91 अरब डॉलर रहा जो एक साल पहले 2023-24 में अप्रैल-सितंबर के दौरान 7.63 अरब डॉलर था। अमेरिका 2023-24 में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार था।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 22 सितंबर को दिल्ली में प्याज की खुदरा कीमत 55 रुपये प्रति किलो थी, जो एक साल पहले की समान अवधि में 38 रुपये प्रति किलोग्राम थी। मुंबई और चेन्नई में प्याज कीमतें क्रमशः 58 रुपये और 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं।
दोनों देश सीईपीए को उन्नत करने के लिए समीक्षा बैठकें कर रहे हैं, जिसे जनवरी 2010 में क्रियान्वित किया गया था। अब तक समीक्षा वार्ता के 10 से अधिक दौर आयोजित हो चुके हैं।
अगस्त 2024 में अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सिंगापुर, बांग्लादेश, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, फ्रांस, नेपाल, बेल्जियम और तुर्की को होने वाले निर्यात में भी गिरावट दर्ज की गई है। इस दौरान यूएई, स्विट्जरलैंड, दक्षिण कोरिया, जापान, थाईलैंड, वियतनाम और ताइवान से आयात में बढ़ोतरी हुई है।
जुलाई में भारत के कुल आयात में रूसी कच्चे तेल का रिकॉर्ड 44 प्रतिशत हिस्सा रहा। यह बढ़कर रिकॉर्ड 2.07 मिलियन बैरल प्रति दिन हो गया। यूक्रेन के खिलाफ युद्ध शुरू करने के बाद से रूस के साथ भारत का व्यापार बढ़ा है।
वित्त वर्ष 2024-25 की पहली तिमाही में वस्तुओं और सेवाओं का कुल निर्यात लगभग 200 अरब डॉलर रहा है। जून में कच्चा तेल आयात 19.62 प्रतिशत बढ़कर 15 अरब डॉलर हो गया।
राजस्व बजट में सरकार की राजस्व प्राप्तियां और उसका व्यय शामिल होता है। राजस्व प्राप्तियों को कर और गैर-कर राजस्व में विभाजित किया जाता है। सामान्य मूल्य स्तर में लगातार बढ़ोतरी मुद्रास्फीति है।
इंडोनेशिया और मलेशिया भारत को रिफाइंड पामोलिन और सीपीओ के प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं, जो मुख्य रूप से अर्जेंटीना और ब्राजील से सोया तेल और रूस, रोमानिया, यूक्रेन और अर्जेंटीना से सूरजमुखी तेल का आयात करता है।
रूस से सस्ता तेल खरीदना जारी रखने की भारत की रणनीति के चलते वित्त वर्ष 2022-23 के पहले 11 महीनों के दौरान देश के तेल आयात बिल में लगभग 7.9 बिलियन डॉलर की बचत हुई है और देश को अपने चालू खाता घाटे को कम करने में भी मदद मिली है।
India export in March : भू-राजनीतिक तनावों के चलते मार्च में भारत का एक्सपोर्ट घटकर 41.68 अरब डॉलर रह गया। वहीं, देश का आयात 5.98 प्रतिशत घटकर 57.28 अरब डॉलर रह गया।
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