लाल बहादुर शास्त्री का कद भले ही छोटा था, जीवन भले ही सादा रहा हो लेकिन देश के लिए उन्होंने हमेशा सबसे आगे रहकर काम किया। उन्होंने बखूबी अपनी काबिलियत को दुनिया के सामने साबित किया। यह अलग बात है कि पीएम रहते ही उनकी मौत हो गई और ये हमारे देश का दुर्भाग्य था।
11 जनवरी 1966 की आधी रात देश के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का सोवियत संघ के ताशकंद में निधन हो गया था। उनकी मौत को लेकर समय- समय पर सवाल उठते रहे हैं। आखिर उस रात ताशकंद में क्या हुआ था?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती पर उनकी समाधि राजघाट पहुंचे और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद वे पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के समाधि स्थल विजय घाट भी पहुंचे
लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के मौके पर हम आपको ये बता रहे हैं कि उनका असली नाम क्या था। दरअसल शास्त्री एक उपाधि थी, जिसे उन्होंने प्राप्त किया था लेकिन उनका पूरा नाम कुछ और ही था।
बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर मनोज कुमार ने इसी साल 4 अप्रैल को 87 साल की उम्र में अंतिम सांस ली थी। उन्होंने अपनी एक्टिंग से सालों तक दर्शकों का खूब मनोरंजन भी किया। नेशनल अवॉर्ड, दादा साहेब फाल्के, पद्मश्री अवॉर्ड और 8 फिल्मफेयर अवॉर्ड से सम्मानित हो चुके मनोज कुमार की आज बर्थ एनिवर्सरी है।
ताशकंद समझौते के बाद शास्त्री जी ने अपने घर में बात की थी। इसके बाद वह बहुत खुश नहीं थे। अगले दिन ही उनकी लाश होटल के कमरे में मिली थी। शास्त्री जी की मौत अभी भी रहस्य बनी हुई है।
पंडित जवाहर लाल नेहरू के देहांत के बाद लाल बहादुक शास्त्री करीब डेढ़ साल भारत के प्रधानमंत्री रहे। आसान नहीं थी पंडित नेहरू के बनाए गए छवि को मैच करना। लेकिन लाल बहादुर शास्त्री बखूबी अपनी काबिलियत को दुनिया के सामने साबित किया। यह अलग बात है कि पीएम रहते ही उनकी मौत हो गई और ये हमारे देश का दुर्भाग्य था।
भोपाल में पूर्व पीएम लाल बहादुर शास्त्री के मूर्ति पर असामाजिक तत्वों ने रखे जूते तो कांग्रेस नेताओं ने मूर्ति को दूध से नहलाया और आरोपियों के खिलाफ की मांग की।
कंगना रनौत ने आज के दिन पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को याद किया है। कंगना रनौत ने उनकी जयंती पर एक पोस्ट शेयर कर लिखा कि देश के पिता नहीं बल्कि देश के लाल होते हैं। कंगना रनौत ने लाल बहादुर शास्त्री की तारीफ भी की है।
Lal Bahadur Shastri Jayanti: देश के तीसरे प्रधानमंत्री रहे लाल बहादुर शास्त्री का आज 120वां जन्मदिन मनाया जा रहा है। साल 1966 में ताशकंद में रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी असामयिक मृत्यु बहस और जांच का विषय बनी हुई है।
लाल बहादुर शास्त्री के पोते विभाकर शास्त्री ने आज कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया और आज ही भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए।
पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की आज पुण्यतिथि है। आज ही के दिन साल 1966 में तासकंद में उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। शास्त्री जी का कद भले ही छोटा था, जीवन भले ही सादा रहा हो। लेकिन देश के लिए उन्होंने हमेशा सबसे आगे रहकर काम किया।
लाल बहादुर शास्त्री का प्रधानमंत्री बन जाना पहले से तय नहीं था इसे संयोग भी कह सकते हैं। लाल बहादुर शास्त्री उस समय कोई बहुत ज्यादा ताकतवर दावेदार थे, लेकिन अपनी सादगी और गांधीवादी छवि के कारण सभी के दिलों में घर कर गए थे।
संसद के विशेष सत्र में पीएम मोदी नए संसद भवन के लिए उत्सुक भी दिखें और पुराने संसद भवन के लिए भावुक भी। उन्होंने संसद भवन की गरिमा को याद किया और इस बात पर चर्चा की कि देश की प्रगति में संसद का कितना अधिक योगदान रहा।
1965 में पाकिस्तान ने कश्मीर पर कब्जे के लिए ऑपरेशन जिब्राल्टर शुरू किया था। बता दें कि जिब्राल्टर स्पेन के पास एक छोटा सा टापू है। अरब की सेनाओं ने इसी टापू के माध्यम से स्पेन पर कब्जा किया था।
लाल बहादुर शास्त्री के पोते विभाकर शास्त्री को कांग्रेस वर्किंग कमेटी में शामिल नहीं किया गया है। इससे निराश विभाकर शास्त्री ने ट्वीट कर कहा कि मेरी तपस्या में कुछ कमी रह गई है।
पंडित नेहरू के निधन के बाद भारत के दूसरे प्रधानमंत्री के रूप में 9 जून 1964 को लाल बहादुर शास्त्री ने शपथ ली। कुछ महीनों बाद पाकिस्तान से जंग हो गया। शास्त्री इसी जंग के समझौते के कारण ताशकंद गए थे।
Lal Bahadur Shastri: भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जैसा सादगीपूर्ण व्यक्तित्व भारतीय राजनीति में विरले ही देखने को मिला।
Lal Bahadur Shastri Jayanti: भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती बड़े ही धूमधाम से मनाई जा रही है। पूर्व प्रधानमंत्री की सादगी और सहजता से हर कोई उनका कायल था।
Lal Bahadur Shastri: लाल बहादुर शास्त्री देश के दूसरे प्रधानमंत्री थे। उनका जन्म 2 अक्टूबर सन् 1904 में उत्तर प्रदेश के मुगलसराय जिले में हुआ था। एक साधारण सी कद-काठी वाले शास्त्री जी ने सार्वजनिक जीवन में श्रेष्ठता के जो प्रतिमान स्थापित किए वे बहुत ही कम देखने को मिलते है।
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