कोलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विपक्षी दलों पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल तृणमूल कांग्रेस के 21 जुलाई के शहीद दिवस को विफल करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने किसी विपक्षी दल का नाम नहीं लिया। उन्होंने शहर के मध्य में स्थित एस्प्लेनेड में आयोजन स्थल पर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
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तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने कार्यक्रम स्थल पर संवाददाताओं से कहा, ‘‘जब कोई राज्य सचिवालय ‘नबान्न’ की ओर रैली की घोषणा करता है तो क्या हमें कोई समस्या होती है? जब आप (विपक्ष) पुलिस की अनुमति के बिना रैलियां करते हैं तो हम आपके रास्ते में नहीं आते।’’ उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस सभी के लोकतांत्रिक अधिकारों में विश्वास करती है कि वे अपना विरोध जताने के लिए रैलियां निकालें।
सत्तावाद के खिलाफ लोकतंत्र की लड़ाई
उन्होंने कहा कि 21 जुलाई का कार्यक्रम सत्तावाद के खिलाफ लोकतंत्र की लड़ाई है। बनर्जी ने कहा, ‘‘लेकिन आप तब घबरा जाते हैं जब 21 जुलाई को मां माटी मानुष के अधिकारों को बचाने के लिए बड़ी संख्या में लोग तृणमूल कांग्रेस की रैली में आते हैं।’’ मुख्यमंत्री का यह बयान कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा शहर में जुलूसों की अनुमति के समय पर कुछ प्रतिबंध लगाए जाने के दो दिन बाद आया है ताकि यातायात जाम से बचा जा सके और यात्रियों को अपने कार्यस्थलों तक सुगमता से पहुंचने में मदद मिल सके। अदालत ने 21 जुलाई को यातायात में किसी भी प्रकार की बाधा न आने देने के अनुरोध वाली एक याचिका पर यह आदेश दिया।
ममता बनर्जी ने कहा, "आपने समानांतर रैलियां बुलाईं। खैर, रैली कीजिए, लेकिन लोग हमारे साथ हैं।" वह उसी दिन बुलाई गई बीजेपी की रैलियों की ओर इशारा कर रही थीं। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने सीपीएम नीत वाम मोर्चे पर "लोकतंत्र की हत्या" का आरोप लगाया और कहा कि उसके 34 साल के शासनकाल में लोकतंत्र बचाने की लड़ाई में कई लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
टीएमसी क्यों मनाती है शहीद दिवस?
ममता बनर्जी ने कहा कि 21 जुलाई को तृणमूल कांग्रेस लोकतंत्र की हत्या करने के माकपा के प्रयास का विरोध करने के लिए तृणमूल के सैकड़ों पार्टी कार्यकर्ताओं के बलिदान को याद करती है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी हर साल शहीद दिवस रैली का आयोजन 1993 में कांग्रेस के प्रदर्शनकारियों पर पुलिस गोलीबारी की याद में करती है, जिस समय वह कांग्रेस की युवा शाखा की नेता थीं। इस रैली में शामिल होने के लिए लाखों लोग कोलकाता पहुंचते हैं। (इनपुट-भाषा)