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दुनिया भर में 80 से अधिक शहरों में एक साथ क्यों हो रहा मार्च, वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया मचादो से जुड़ा है मामला

 Edited By: Dharmendra Kumar Mishra
 Published : Dec 07, 2025 10:43 am IST,  Updated : Dec 07, 2025 10:43 am IST

अमेरिका और वेनेजुएला में तनाव के बीच दुनिया के 80 शहरों में मार्च निकल रहा है। यह मार्च वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया मचादो के नोबेल पुरस्कार जीतने के जश्न में है।

मारिया मचादो, वेनेजुएला की विपक्षी नेता और नोबेल पुरस्कार विजेता- India TV Hindi
मारिया मचादो, वेनेजुएला की विपक्षी नेता और नोबेल पुरस्कार विजेता Image Source : AP

कराकास: दुनिया भर के 80 से अधिक बड़े शहरों में अचानक एक साथ मार्च निकल रहा है। यह देखकर लोग भी हैरान हैं। आखिर ऐसा क्यों है और मार्च निकालने वाले कौन हैं। दरअसल यह मामला हाल ही में नेबोल शांति पुरस्कार जीतने वाली वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचादो से जुड़ा है। यह मार्च मारिया के समर्थन में निकाला जा रहा है। 

क्यों हो रहा मार्च

मारिया के समर्थकों ने शनिवार को दुनिया के कई शहरों में मार्च निकाला। इस मार्च के निकाले जाने की वजह अगले हफ्ते होने वाले नोबेल शांति पुरस्कार समारोह से पहले मारिया की जीत का जश्न मनाने और वेनेजुएला की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं पर ध्यान खींचने के लिए है। 

इन प्रमुख शहरों में निकला मार्च

मैड्रिड, उट्रेख्त, ब्यूनस आयर्स, लीमा सहित दर्जनों शहरों में लोग सड़कों पर उतरे। मचादो की संस्था ने शनिवार को दुनिया भर में 80 से अधिक शहरों में प्रदर्शन होने की उम्मीद जताई। लीमा में भीड़ मचादो के पोस्टर लिए हुए थी और “मुक्त वेनेजुएला” के नारे लगा रही थी। देश का पीला-नीला-लाल झंडा कंधों पर लटकाए या टोपी पर लगाए प्रदर्शनकारी तख्तियां उठाए हुए थे जिन पर लिखा था – “नोबेल पुरस्कार वेनेजुएला का है”। लीमा में आठ साल से रह रही वेनेजुएला की वेरोनिका दुरान ने कहा, “मचाडो का नोबेल शांति पुरस्कार इसलिए मनाया जा रहा है क्योंकि यह सभी वेनेजुएलावासियों का प्रतिनिधित्व करता है-उन लोगों का जो लोकतंत्र बहाल करने की लड़ाई में शहीद हुए और उन राजनीतिक कैदियों का जो अभी भी जेलों में हैं।

अमेरिका और वेनेजुएला में चल रहा भारी तनाव


ये प्रदर्शन ऐसे वक्त हो रहे हैं जब वेनेजुएला का लंबा संकट निर्णायक मोड़ पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन कैरिबियाई क्षेत्र में बड़ी सैन्य तैनाती कर रहा है और बार-बार वेनेजुएला की धरती पर हमले की धमकी दे रहा है। राष्ट्रपति निकोलस मादुरो इसे अपनी सत्ता खत्म करने की कोशिश मानते हैं। विपक्ष ने भी यह धारणा और मजबूत कर दी है, क्योंकि उसने फिर से वादा किया है कि वह जल्द ही देश की सत्ता संभालेगा। मचादो ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर साझा एक वीडियो संदेश में कहा, “हम ऐसे समय से गुजर रहे हैं जब हमारी धैर्य, दृढ़ता और संगठन की परीक्षा ली जा रही है। ऐसे समय जब हमारे देश को और भी अधिक समर्पण की जरूरत है क्योंकि अब इन सभी वर्षों की लड़ाई और वेनेजुएला के लोगों की गरिमा को नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मान मिला है।”

मचादो को क्यों मिला पुरस्कार

58 वर्षीय मचादो को 10 अक्टूबर को यह पुरस्कार मिला था। उन्हें दक्षिण अमेरिकी देश में लोकतांत्रिक बदलाव के लिए संघर्ष करने वाली उस महिला के रूप में सम्मानित किया गया “जो बढ़ते अंधेरे के बीच लोकतंत्र की लौ जलाए रखती हैं।”मचादो ने विपक्ष के प्राइमरी चुनाव जीते थे और पिछले साल मादुरो के खिलाफ राष्ट्रपति चुनाव लड़ने वाली थीं, लेकिन सरकार ने उन्हें चुनाव लड़ने से रोक दिया। उनकी जगह सेवानिवृत्त राजनयिक एडमुंडो गोंजालेज मैदान में उतरे, जिन्होंने पहले कभी चुनाव नहीं लड़ा था। 28 जुलाई 2024 के चुनाव से पहले व्यापक दमन हुआ -अयोग्य घोषित करना, गिरफ्तारियां और मानवाधिकार उल्लंघन किया जाना। 

मचादो जब हो गईं थीं भूमिगत

एक वक्त ऐसा भी आया जब वेनेजुएला की विपक्षी नेता मचादो को भूमिगत होना पड़ा था। दरअसल मादुरो के वफादारों से भरे राष्ट्रीय चुनाव परिषद ने मादुरो को विजेता घोषित कर दिया, जबकि विश्वसनीय सबूत इसके विपरीत थे। गोंजालेज को गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद पिछले साल स्पेन में शरण लेनी पड़ी थी। इस बीच मचादो भूमिगत हो गई। 9 जनवरी को कराकास में एक कमजोर पड़े प्रदर्शन में शामिल होने के बाद उन्हें कुछ देर हिरासत में लिया गया था। उसके बाद से वे सार्वजनिक रूप से नहीं दिखी। अगले ही दिन मादुरो ने तीसरे छह साल के कार्यकाल के लिए शपथ ली थी।(एपी)

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