Nepal Politics: नेपाल की राजनीति में भी 'खेला' हो गया है। पीटीआई सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नेपाल के प्रधानमंत्री प्रचंड नेपाली कांग्रेस से अलग होने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री ओली की पार्टी के साथ नई सरकार बनाने जा रहे हैं। दरअसल, नेपाल में पहले से ही प्रचंड सरकार के रूप में जो सरकार सत्ता में है, वो उतनी ताकतवर नहीं है। क्योंकि वहां गठबंधन की सरकार है। नेपाली पीएम प्रचंड नेपाली कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार चला रहे थे। ऐसे में थोड़ा बहुत भी ऊपर-नीचे हुआ तो सरकार सकती थी।
नेपाल में अभी तक माओवादी सेंटर और नेपाली कांग्रेस के गठबंधन की सरकार रही और नेशनल असेंबली के चेयरमैन वाले सवाल पर देश की दोनों बड़ी पार्टियों के बीच दूरी बढ़ने लगी। इसका नतीजा यह निकला कि इस गठबंधन के साथ बने रहने पर सवाल उठने लगे थे। यही कारण रहा कि पीएम प्रचंड ने नेपाली कांग्रेस से अलग होकर केपी शर्मा ओली, जो पूर्व पीएम हैं नेपाल के, उनकी पार्टी के साथ मिलकर सरकार बनाने जा रहे हैं।
कुछ दिन पहले नेपाल की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी में से एक माओवादी सेंटर की स्थायी समिति की बैठक हुई थी। इस बैठक के बाद माओवादी सेंटर ने ऐलान कर दिया था कि वे नेशनल असेंबली के अध्यक्ष पद का चुनाव लडे़ेंगे। इस कारण यह मामला बिगड़ता गया।
नेपाली कांग्रेस ने हाल ही में एक ‘महा समिति’ नाम से एक बैठक बुलाई थी। ध्यान दिया जाना चाहिए कि नेपाली कांग्रेस देश की सबसे बड़ी पॉलिटिकल पार्टी है। 19 फरवरी को नेपाली कांग्रेस की जो बैठक हुई थी, उसमें पार्टी के भीतर मांग उठी कि हमें गठबंधन के नेतृत्व में अगले चुनाव में नहीं जाना चाहिए। 2026 में नेपाल में अगला चुनाव प्रस्तावित है। गठबंधन के खिलाफ नेपाली कांग्रेस की ये आवाज माओवादी सेंटर को रास नहीं आई और उन्होंने एक समानांतर लाइन ले ली। यही कारण रहा कि अब नेपाली कांग्रेस से अलग होकर ओली की पार्टी के साथ मिलकर प्रचंड सरकार चलाएंगे।
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