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पाकिस्तान में तेल संकट से मचा कोहराम, अगले 2 हफ्तों के लिए बंद रहेंगे सभी स्कूल, WFH का आदेश, अधिकारियों की कटेगी सैलरी

 Published : Mar 09, 2026 10:22 pm IST,  Updated : Mar 09, 2026 11:07 pm IST

पाकिस्तान में तेल के संकट का असर दिखने लगा है। शहबाज सरकार को कड़े फैसले लेने पड़ रहे हैं। पीएम शहबाज ने स्कूलों को बंद रखने का ऐलान किया है। साथ ही ऑफिस में सरकारी कर्मचारियों के लिए 50% वर्क फ्रॉम होम का आदेश सुनाया है।

पाकिस्तान पीएम शहबाज शरीफ- India TV Hindi
पाकिस्तान पीएम शहबाज शरीफ Image Source : AP

पाकिस्तान में तेल संकट अभी से गहरा गया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ऐलान किया कि इस हफ्ते के बाद अगले 2 हफ्ते के लिए सभी स्कूल बंद रहेंगे। मिडिल ईस्ट में तनाव से तेल संकट गहरा गया है। पाकिस्तान में फ्यूल बचाने के लिए हायर एजुकेशन तुरंत ऑनलाइन कर दी गई है। स्कूलों को बंद करने का ऐलान किया गया है।

फ्यूल अलाउंस में 50 प्रतिशत की कटौती

इसके साथ ही शहबाज शरीफ ने कहा कि अगले 2 महीनों में सरकारी विभागों को फ्यूल अलाउंस में 50 प्रतिशत की कटौती की जाएगी। सरकार ने पाकिस्तान में हफ्ते में 4 दिन काम करने का फैसला किया है।

दो दिन की काटी जाएगी सैलरी

शहबाज ने सरकारी संस्थानों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम जरूरी करने का भी फैसला किया है। ग्रेड-20 और उससे ऊपर के उन अधिकारियों की दो दिन की सैलरी काटी जाएगी, जो महीने में 3 लाख से ज्यादा कमाते हैं।

बढ़ती तेलों की कीमतों को देखते हुए लिया गया फैसला

मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष का असर पाकिस्तान में साफ दिखने लगा है। शहबाज सरकार ने आर्थिक दबाव और बढ़ते तेलों की कीमतों को देखते हुए ये ऐलान किया है। सरकार ने खर्च कम करने और देश की अर्थव्यवस्था पर बोझ कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं।

तेल संकट के बीच सांसदों की बढ़ाई गई सैलरी

शहबाज सरकार ने घोषणा की कि 50 प्रतिशत सरकारी कर्मचारी घर से काम करेंगे, यह कदम आने-जाने, फ्यूल की खपत और ऑपरेशनल लागत को कम करने के लिए है। उन्होंने यह भी बताया कि संसद सदस्यों की सैलरी में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी, जबकि सरकारी विभागों को बड़े पैमाने पर बचत के प्रयासों के तहत खर्चों में 50 प्रतिशत की कटौती करने का निर्देश दिया गया है।

फाइनेंशियल दबाव को किया जा रहा मैनेज

अधिकारियों का कहना है आर्थिक उथल-पुथल और बढ़ती एनर्जी कीमतों के कारण होने वाले फाइनेंशियल दबाव को मैनेज करने के लिए सरकार को कड़े फैसले लेने पड़ रहे हैं।

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